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Explained: क्या रूस में प्लेग का मामला नई महामारी बनेगा? कितना खतरनाक और कैसे बचें


रूस के साइबेरिया में एक प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की 28 साल की लैब वर्कर की मौत के बाद हड़कंप मचा हुआ है. क्रेमलिन ने अब दूसरे संदिग्ध मामले की खबरों को ‘फर्जी’ बताया है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने रूस से पूरी जानकारी मांगी है. WHO चीफ टेड्रोस एडहेनॉम गेब्रेयसस ने कहा है, ‘हमारे पास इस घटना की पूरी तस्वीर नहीं है और हम पूरा रिस्क असेसमेंट नहीं कर पा रहे हैं.’ WHO ने रूस के लिए रिस्क ‘कम’ और यूरोप के लिए ‘बहुत कम’ बताया है. लेकिन सवाल बना हुआ है कि क्या प्लेग का सच क्या है और यह महामारी बन सकता है या नहीं…

साइबेरिया के इरकुत्स्क इलाके में स्थित ‘इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ साइबेरिया एंड द फार ईस्ट’ में काम करने वाली 28 साल की लैब टेक्नीशियन दर्या शिपिलोवा की 2 अक्टूबर 2026 को मौत हो गई.

रूसी सरकारी न्यूज एजेंसी TASS के मुताबिक, उन्हें ‘अज्ञात कारण की निमोनिया’ थी. लोकल मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि उन्होंने डॉक्टरों को बताया था कि लैब में काम करते समय एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी, जिसमें प्लेग के बैक्टीरिया थे.

यह इंस्टीट्यूट 1934 में सोवियत यूनियन के दौर से चल रहा है और प्लेग, हैजा, एंथ्रेक्स जैसी खतरनाक बीमारियों पर रिसर्च करता है. घटना के बाद, शेलेखोव शहर के अस्पताल को क्वारंटीन कर दिया गया और करीब 200 लोगों को मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया. इरकुत्स्क के गवर्नर इगोर कोब्ज़ेव ने इसे ‘एक खतरनाक संक्रामक बीमारी’ बताया और पूरे इलाके में पब्लिक इवेंट्स रद्द कर दिए.

प्लेग क्या और कितना खतरनाक है?

प्लेग एक बैक्टीरियल बीमारी है, जो ‘यर्सिनिया पेस्टिस’ नाम के बैक्टीरिया से होती है. इसके तीन मुख्य रूप हैं- ब्यूबोनिक, न्यूमोनिक और सेप्टिसेमिक प्लेग. जिस मामले की बात हो रही है, वह न्यूमोनिक प्लेग हो सकता है, जो फेफड़ों को अटैक करता है और सबसे खतरनाक माना जाता है.

तो प्लेग का इलाज है या नहीं?

हां, इलाज है. प्लेग को एंटीबायोटिक्स से ठीक किया जा सकता है. जैसे जेंटामाइसिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन, स्ट्रेप्टोमाइसिन, लेवोफ्लोक्सासिन और मॉक्सीफ्लोक्सासिन. अगर शुरुआत में ही इलाज मिल जाए, तो रिकवरी की दर बहुत ऊंची है. समस्या यह है कि अगर देर हो जाए, तो न्यूमोनिक प्लेग जानलेवा हो सकता है.

क्या इससे बड़ा प्रकोप फैल सकता है?

फिलहाल, WHO का कहना है कि इस घटना से रूस में रिस्क ‘कम’ और यूरोप में ‘बहुत कम’ है. रूस की हेल्थ एजेंसी रोस्पोट्रेबनाडज़ोर ने कहा है कि ‘आबादी के लिए कोई महामारी का खतरा नहीं है’ और करीब 5,000 लैब टेस्ट में कोई खतरनाक पैथोजन नहीं मिला है. 90 प्रतिशत से ज्यादा कॉन्टैक्ट्स का मेडिकल ऑब्जर्वेशन पूरा हो चुका है.

WHO चीफ ने चेतावनी दी है कि ‘हम इस घटना की पूरी तस्वीर नहीं जानते’ और रूस को दूसरे संदिग्ध मामले की जानकारी साफ करनी चाहिए. WHO की एपिडेमिक मैनेजमेंट डायरेक्टर मारिया वैन केरखोव ने कहा, ‘हमें नहीं पता कि वह कैसे संक्रमित हुईं’ और ‘हमें समय पर जानकारी चाहिए.’

रूस क्या कह रहा है?

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मीडिया रिपोर्ट्स को ‘फर्जी जानकारी’ बताया है और कहा है कि लोगों को सिर्फ सरकारी बयानों पर भरोसा करना चाहिए. रूस का दावा है कि मौत का कारण ‘सामान्य तीव्र श्वसन वायरल संक्रमण’ था.

एक रूसी एपिडेमियोलॉजिस्ट मिखाइल फावोरोव ने इस दावे पर सवाल उठाया है कि टेस्ट ट्यूब टूटने से संक्रमण हुआ. उन्होंने कहा, ‘यह मजाक है. इरकुत्स्क के एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट में काम करने वाला व्यक्ति प्रोटेक्टिव सूट पहनता है. टेस्ट ट्यूब टूटने पर संक्रमण की संभावना बहुत कम होती है.’

दुनिया क्या कर रही है?

अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और WHO ने रूस से पारदर्शिता की मांग की है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह बायोलॉजिकल वेपन से जुड़ा नहीं लगता, लेकिन अमेरिका ने औपचारिक रूप से रूस से ज्यादा जानकारी मांगी है. मंगोलिया ने रूस के साथ अपनी सीमा पर ‘हेल्थ सर्विलांस और मॉनिटरिंग’ शुरू कर दी है.

तो क्या हमें डरना चाहिए या नहीं?

WHO और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का कहना है कि आम जनता के लिए खतरा कम है. रूस पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे स्थिति साफ नहीं हो पा रही है. मेडागास्कर, कांगो और पेरू जैसे देशों में प्लेग के हर साल सैकड़ों मामले आते हैं. एंटीबायोटिक्स की मौजूदगी में यह पहले जैसा ‘ब्लैक डेथ’ नहीं रहा. फिर भी, जब कोई लैब वर्कर इस बीमारी से मरता है, तो सवाल उठना लाजमी है.



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