- मृत्यु की स्वतंत्र जांच, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग।
आईआईटी (IIT) दिल्ली के M.Sc. फिजिक्स के दूसरे साल के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद रविवार (23 अगस्त, 2026) को AISA ने IIT दिल्ली के गेट नंबर 5 के बाहर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने छात्र की मौत की स्वतंत्र जांच कराने और संस्थान में छात्रों के लिए बेहतर अकादमिक और काउंसलिंग व्यवस्था की मांग की.
ऋषिकेश कुमार की शनिवार (22 अगस्त) को लेक्चर हॉल कॉप्लेक्स की छठी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी. AISA का कहना है कि इस साल IIT दिल्ली में यह दूसरी बार छात्र की मौत है. संगठन ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि ऐसी घटनाओं को सिर्फ व्यक्तिगत मानसिक स्वास्थ्य की समस्या बताकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
रिसर्च प्रोजेक्ट और सेमेस्टर ड्रॉप का दावा
AISA ने दावा किया कि ऋषिकेश को एक प्रमुख रिसर्च प्रोजेक्ट नहीं दिया गया था और उन्हें एक सेमेस्टर छोड़ना पड़ा था. संगठन ने कहा कि छात्रों के अकादमिक भविष्य से जुड़े फैसलों में फैकल्टी और सुपरवाइजर के अधिकारों की समीक्षा होनी चाहिए. संगठन का आरोप है कि अकादमिक अवसरों की कमी, सेमेस्टर ड्रॉप और छात्रों पर मौजूद दबाव जैसे मुद्दों की भी जांच होनी चाहिए.
काउंसलिंग व्यवस्था पर भी सवाल
प्रदर्शन के दौरान AISA ने IIT दिल्ली की काउंसलिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. संगठन ने मांग की कि संस्थान में कितने काउंसलर उपलब्ध हैं, छात्रों को उनसे मदद लेने में कितनी आसानी होती है और काउंसलिंग व्यवस्था कितनी प्रभावी है, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए.
मौत की स्वतंत्र जांच की मांग
AISA ने ऋषिकेश कुमार की मौत की स्वतंत्र जांच के साथ-साथ IIT दिल्ली में इस तरह की पिछली घटनाओं की भी जांच कराने की मांग की. संगठन ने छात्रों के अकादमिक भविष्य से जुड़े फैसलों में ज्यादा पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की.
AISA ने IIT दिल्ली प्रशासन पर छात्रों की समस्याओं को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया. हालांकि, ऋषिकेश की मौत के पीछे अकादमिक दबाव या संस्थागत लापरवाही होने के संगठन के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्र की मौत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और संस्थान को छात्रों की अकादमिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर जवाबदेही तय करनी चाहिए.
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