Nandan Nilekani Panel: देश में परिक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित और पेपर-लीक प्रूफ बनाने के लिए काम कर रहे हाई पावर टास्क फोर्स को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. केंद्र सरकार ने इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलकेणि की अगुवाई वाले इस विशेष पैनल का कार्यकाल बढ़ा दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देशव्यापी परीक्षा सुधारों को अंतिम रूप देने के लिए गठित इस टास्क फोर्स को अब अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए जनवरी 2027 तक का समय दिया गया है.
जुलाई में हुआ था गठन, आए 50 हजार से ज्यादा सुझाव
इस छह सदस्यीय हाई-पावर कमेटी का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसी साल 25 जुलाई को किया गया था. दरअसल, देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में बड़े पैमाने पर पेपर लीक और तकनीकी गड़बड़ियों का विवाद सामने आया था. इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उनके इस्तीफे के ठीक अगले दिन सरकार ने इस टास्क फोर्स का ऐलान किया था.
गठन के बाद से ही पैनल लगातार अलग-अलग पक्षों के साथ बैठकें कर रहा है. अब तक इस टास्क फोर्स को देश भर के छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों से 50,000 से अधिक महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हो चुके हैं. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल करके इस पैनल द्वारा अब तक की गई प्रगति की पूरी जानकारी भी शेयर की है.
इस हाई-पावर पैनल में शामिल हैं देश के बड़े दिग्गज
नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले इस टास्क फोर्स में देश के कई जाने-माने विशेषज्ञों को शामिल किया गया है ताकि तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तर पर सुधार किए जा सकें. इस कमेटी के अन्य सदस्यों में ISRO के पूर्व अध्यक्ष एस सोमनाथ, IB के पूर्व निदेशक तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक वी कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट अमृत लाल मीना शामिल हैं.
यह पैनल ISRO के ही एक और पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन से भी लगातार सलाह-मशविरा कर रहा है, जिन्होंने साल 2024 के NEET पेपर लीक विवाद के बाद सरकार द्वारा गठित एक कमेटी की कमान संभाली थी.
यह भी पढ़ें: विदेश से MBBS डिग्री पर NMC के जवाब से कंफ्यूजन, एडमिशन लेने से पहले जानें नियम
कंम्पयूटर बेस्ड टेस्ट और एआई आधारित परीक्षाओं पर जोर
इस टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर सरकार पहले ही यह घोषणा कर चुकी है कि आने वाले समय में NEET परीक्षा को पूरी तरह से कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी ऑनलाइन मोड में आयोजित किया जाएगा. के. राधाकृष्णन कमेटी ने भी पहले यह सुझाव दिया था कि परीक्षा को पूरी तरह पेन-एंड-पेपर मोड पर छोड़ने के बजाय चरणों में और हाइब्रिड या कंप्यूटर मोड पर कराया जाना चाहिए.
अब नंदर नीलेकणि का यह पैनल देश की पूरी परीक्षा प्रणाली को आधुनिक तकनीक से लैस करने पर काम कर रहा है. पैनल के प्रमुख नंदन नीलेकणि ने पारंपरिक प्रश्न पत्रों की व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने की वकालत की है. उनका मानना है कि पेपर लीक को रोकने के लिए एआई द्वारा रीयल-टाइम में जनरेट होने वाले टेस्ट पेपर सबसे सुरक्षित और कारगर साबित हो सकते हैं.
यह भी पढ़ें: Cost Of Studying Abroad: किन देशों में सबसे महंगी है शिक्षा? BA के लिए भी लाखों होते हैं खर्च
Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI
