National Overseas Scholarship India : विदेश जाकर पढ़ाई करने का सपना हर साल लाखों छात्र देखते हैं. अच्छी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना, नए देश में पढ़ाई करना और बेहतर करियर बनाना यह सब किसी बड़े मौके जैसा लगता है, लेकिन इस सपने के बीच सबसे बड़ी रुकावट अक्सर पैसे की होती है. कई बार योग्य और मेहनती छात्र सिर्फ इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि उनके पास विदेश की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते हैं. इसी समस्या को दूर करने के लिए भारत सरकार कई स्कॉलरशिप योजनाएं चलाती है. इन्हीं में से एक जरूरी योजना नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप (National Overseas Scholarship , NOS) है. जिसके तहत हर साल 125 स्कॉलरशिप दी जाती हैं. यह योजना खास तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए बनाई गई है, जिससे वे भी विदेश में उच्च शिक्षा हासिल कर सकें.
नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप क्या है?
नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत चलाई जाती है. इसका मुख्य उद्देश्य उन छात्रों की मदद करना है, जो सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं और विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं. यह स्कॉलरशिप सिर्फ पोस्टग्रेजुएट (Master’s) और PhD की पढ़ाई के लिए दी जाती है.
कौन कर सकता है आवेदन?
इस स्कॉलरशिप का फायदा हर कोई नहीं ले सकता है. यह खास वर्गों के लिए बनाई गई है. इसके तहत अनुसूचित जाति (SC) के छात्र, डिनोटिफाइड, नोमैडिक और सेमी-नोमैडिक ट्राइब्स, भूमिहीन कृषि मजदूरों के परिवार और पारंपरिक कारीगरों के परिवार शामिल हैं. इस योजना के लिए कुछ जरूरी शर्तें भी तय की गई हैं. जिसमें उम्मीदवार के पास कम से कम 60 प्रतिशत अंक होने चाहिए. आवेदन करने की अधिकतम उम्र 35 वर्ष होनी चाहिए. साथ ही परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. छात्र ने विदेश की किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले लिया हो या उसके पास ऑफर होना चाहिए.
आवेदन कैसे करें?
1. इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन किया जाता है. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट nosmsje.gov.in पर जाएं.
2. वहां रजिस्ट्रेशन करके लॉगिन ID बनाएं.
3. अपनी व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी भरें.
4. अब जरूरी दस्तावेज अपलोड करें, जैसे जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, एडमिशन प्रूफ.
5. सभी जानकारी सही भरने के बाद फॉर्म सबमिट करें.
सिलेक्शन प्रोसेस कब होता है?
इस स्कॉलरशिप के लिए चयन साल में दो बार किया जाता है. जिसमें पहला चरण फरवरी-मार्च और अगर सीटें बचती हैं तो दूसरा चरण सितंबर-अक्टूबर में होता है. जिन छात्रों का एडमिशन पहले से टॉप रैंक वाली यूनिवर्सिटी में होता है, उन्हें प्राथमिकता दी जाती है.
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कितनी स्कॉलरशिप मिलती हैं?
हर साल कुल 125 स्कॉलरशिप दी जाती हैं, जिसमें 115 स्कॉलरशिप अनुसूचित जाति (SC) छात्रों के लिए, 6 स्कॉलरशिप डिनोटिफाइड, नोमैडिक और सेमी-नोमैडिक ट्राइब्स के लिए और 4 स्कॉलरशिप भूमिहीन कृषि मजदूरों और पारंपरिक कारीगर परिवारों के लिए होती हैं. इसके अलावा, इसमें 30 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं. अगर पर्याप्त महिला उम्मीदवार नहीं मिलतीं, तो ये सीटें अन्य योग्य उम्मीदवारों को दी जा सकती हैं.
इस स्कॉलरशिप में क्या-क्या खर्च शामिल है?
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लगभग पूरी पढ़ाई का खर्च कवर करती है. इस स्कॉलरशिप में पूरी ट्यूशन फीस, रहने और खाने के लिए स्टाइपेंड, अकादमिक जरूरतों के लिए कंटीजेंसी ग्रांट, वीजा फीस, मेडिकल इंश्योरेंस, आने-जाने का हवाई टिकट शामिल है. यह मदद छात्रों को आर्थिक बोझ से मुक्त करती है, जिससे वे पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान दे सकें.
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