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PM इंटर्नशिप में बढ़ी युवाओं की भागीदारी, फिर भी नहीं हो पाई 10% से ज्यादा की बढ़ोतरी


केंद्र सरकार की ओर से युवाओं को रोजगार के अवसर देने और उनकी स्किल्स को सामने लाने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में कई बड़े बदलाव किए गए हैं. योजना के दायरे को टॉप 500 कंपनियों से बढ़ाकर एमएसएमई और सनराइज सेक्टर तक विस्तार कर दिया है. योजना में मासिक स्टाइपेंड को लगभग दो गुना करके 9000 रुपये कर दिया गया है. वहीं एज और एजुकेशन क्राइटेरिया की शर्तों में भी ढील दी गई है और इंटर्नशिप की अवधि को भी 12 महीने से घटाकर 6 से 9 महीने कर दिया गया है. इन सभी बदलाव के बाद तीसरे राउंड में युवाओं के भागीदारी में 67 से 100% तक बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन काॅर्पोरेट कार्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार एक नई समस्या भी सामने आई है. दरअसल कंपनियों की ओर से पोस्ट किए गए कुल इंटर्नशिप मौको की तुलना में ज्वाइन करने वाले युवाओं की दर अब भी 10 प्रतिशत से कम बनी हुई है. वहीं आपको बता दे कि प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम का तीसरा राउंड अप्रैल में शुरू हुआ था, जो अब दिसंबर में खत्म होगा. 

एक नजर में पीएम इंटर्नशिप स्कीम 

  • मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स के आंकड़ों के अनुसार राउंड 1 में कंपनियों की ओर से 1,27,508 इंटर्नशिप के मौके निकल गए थे, जिनके लिए 6,21,000 आवेदन आए. इनमें से 60,866 उम्मीदवारों को ऑफर भी मिले, लेकिन केवल 8,760 यानी लगभग 6.9 प्रतिशत युवाओं ने ही ज्वाइन किया. इनमें से केवल 3,731 यानी 42.6 प्रतिशत युवा ही अपनी इंटर्नशिप पूरी कर सके. 
  • राउंड 2 के आंकड़े देखे तो कंपनियों ने 1,18,948 पद निकाले, इसके लिए 4,55,000 आवेदन मिले. वहीं 71,192 ऑफर में से केवल 7308 यानी 6.1 प्रतिशत उम्मीदवारों ने ही कंपनियों में ज्वाइन किया. इनमें से इंटर्नशिप पूरी करने वालों की दर 39.4 प्रतिशत यानी 2,880 उम्मीदवारों ने इंटर्नशिप पूरी की है. 
  • इसके बाद अब अप्रैल 2026 में शुरू हुए राउंड 3 की बात करें, तो इस राउंड में 340 कंपनियों ने रिकॉर्ड 1,54,366 पद पोस्ट किए, जिनके लिए 3,50,259 आवेदन आए. वहीं 25,794 उम्मीदवारों को ऑफर दिए गए और अब तक 14,620 उम्मीदवारों ने इसे ज्वाइन किया है. इससे तीसरे राउंड में जॉइनिंग रेट सुधरकर 9.5 प्रतिशत पहुंचा है, लेकिन यह अब भी कुल मौकों से 10 प्रतिशत कम है 

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बीच में ही इंटर्नशिप क्यों छोड़ रहे युवा?

युवाओं के पीएम इंटर्नशिप को बीच में छोड़ने को लेकर कई वजह सामने आई है. यह इंटर्नशिप करने वाला एक रांची का युवा बताता है कि उसने कंप्यूटर हार्डवेयर में डिप्लोमा किया था, लेकिन उसे पास के गांव में लोन एजेंट के तौर पर चक्कर लगाने पड़ते थे. उसका कहना है कि मैं ऑफिस में कुछ स्किल सीखना चाहता था, क्योंकि मैंने कंप्यूटर मेंटेनेंस की पढ़ाई की. लेकिन इसके बजाय मुझे लोन रिकवरी एजेंट, फील्ड वर्क दिया गया, जिसके चलते उसने यह इंटर्नशिप छोड़ दी. वहीं कुछ कैंडिडेट्स का कहना था कि इंटर्नशिप करते समय उन्हें दूसरी फुल टाइम जॉब के मौके मिले, जिसके कारण भी उन्होंने इंटर्नशिप छोड़ दी.

वहीं पीएम इंटर्नशिप को लेकर एक और युवा का कहना है कि उन्होंने बीबीए के पहले साल में तेल रिफाइनरी कंपनी में इंटर्नशिप ज्वाइन की थी. उनका आरोप है कि उन्हें केवल पेट्रोल पंपों पर जाकर ग्राहकों से कंपनी के ऐप के जरिए पेमेंट करवाने और कैशबैक का प्रचार करने का काम दिया, जिसमें कोई स्किल या ऑफिस ट्रेनिंग नहीं थी. इसकी वजह से उन्होंने इंटर्नशिप छोड़ दी. इसी तरह पीएम इंटर्नशिप स्कीम छोड़ने के पीछे युवाओं के अलग-अलग कारण रहे हैं. 

IT और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में शानदार एक्सपीरियंस 

कुछ सेक्टर में फील्ड वर्क को लेकर पीएम इंटर्नशिप स्कीम में शिकायतें रही. वहीं आईटी और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में उम्मीदवारों का एक्सपीरियंस शानदार माना जा रहा है. इसे लेकर भी कुछ युवाओं का एक्सपीरियंस सामने आया है. दरअसल विजयवाड़ा के रहने वाले एक युवक का कहना है कि उन्होंने जनवरी 2025 में एक आईटी कंपनी में इंटर्नशिप शुरू की, उन्हें 4 महीने की इंस्ट्रक्टर एलईडी ट्रेनिंग, 2 महीने की सेल्फ पेस डिजिटल लर्निंग और 6 महीने की ऑन द जॉब ट्रेनिंग दी गई. वहीं 12 महीने की इंटर्नशिप पूरी करने और रिक्रूटमेंट एग्जाम देने के बाद मार्च 2026 में उन्हें इस आईटी कंपनी में फुल टाइम जॉब मिल गई. 

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