मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. इस बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार (25 मई) को धार स्थित भोजशाला परिसर में न केवल मां वाग्देवी (सरस्वती) के दर्शन किए, बल्कि यहां ‘सरस्वती लोक’ और ‘राजा भोज रिसर्च इंस्टीट्यूट’ की स्थापना करने की घोषणा कर दी है. इस दौरान उन्होंने कहा कि भोजशाला केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांसकृतिक धरोहर है.
मुख्यमंत्री मोहन यादव सोमवार को दोपहर करीब 1 बजकर 30 मिनट पर भोजशाला पहुंचे और यहां उन्होंने मां वाग्देवी के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. इस दौरान मंदिर में काफी भीड़ देखने को मिली. इसके साथ ही सुरक्षा के खास इंतजाम भी किेए गए थे. पूजा-अर्चना के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह दिन गंगा दशहरा के शुभ अवसर के साथ मेल खाता है.
LIVE: भोजशाला, धार में दर्शन-पूजन https://t.co/zsVnWm79QF
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) May 25, 2026
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कोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में दर्शन करने वाले पहले मुख्यमंत्री
उन्होंने धार को राजा भोज का शहर बताया और आगे कहा, “मैं कोर्ट के फैसले के लिए धार के लोगों को बधाई देता हूं. इस फैसले के पीछे आपका 750 साल पुराना संघर्ष है. कोर्ट ने सच को झूठ से अलग कर दिया है.” मोहन यादव के इस दौरे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि धार के भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर के मामले में 15 मई को आये कोर्ट के फैसले के बाद वो यहां पूजा करने वाले पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं.
मोहन यादव का दौरा खास क्यों?
उनके इस दौरे को बीजेपी के सांस्कृतिक प्रोजेक्ट और हिंदुत्व के एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है. गौर हो कि अयोध्या, काशी और मथुरा के बाद भोजशाला बीजेपी और संघ के मुख्य एजेंडों में से एक रहा है. आने वाले चुनावों को देखते हुए बीजेपी भोजशाला के जरिए एक मजबूत नैरेटिव सेट करने का प्रयास कर सकती है. बता दें कि 15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार के भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर के मामले में फैसला सुनाते हुए हिंदू समुदाय की दो जनहित याचिकाएं मंजूर कर लीं.
कोर्ट ने इस मध्यकालीन स्मारक की धार्मिक प्रकृति देवी सरस्वती के मंदिर के तौर पर तय की. इसके साथ ही कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिमों को हर शुक्रवार भोजशाला परिसर में नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी. हालांकि, अब मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को चुनौती देते हुए 22 मई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.
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