बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए माता- पिता हर मुमकिन कदम उठाते हैं. सरकार भी इसमें उनकी मदद करने में पीछे नहीं रहती है. बेटियों के सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए ही सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना शुरू की. इस योजना के तहत आप अपनी बेटी के भविष्य के लिए कुछ पैसा जोड़कर रख सकते हैं. हालांकि इसे लेकर माता पिता के मन में कुछ सवाल होते हैं, जिनका जवाब आज हम आपको लेकर आते हैं.
पैरेंट्स के सवाल?
सुकन्या योजना के बारे में तो पैरेंट्स जानते हैं, लेकिन इसके नियमों को लेकर अक्सर कन्फ्यूज रहते हैं. जैसे इस स्कीम में निवेश करने पर खाता मैच्योर कब होगा? खाते से पैसे कब निकाल सकते हैं? ’21 साल’ नियम क्या है? आदि. लेकिन ये कोई बड़ी बात नहीं है, बल्कि ये बहुत ही आसान से नियम हैं जिनके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं.
’21 साल’ नियम क्या है?
सुकन्या योजना में निवेश करने वाले अधिकतर लोग सोचते हैं कि जब बेटी 21 साल की हो जाती है, तब पैसा मिल जाता है. लेकिन ऐसा नहीं होता, नियम के मुताबिक सुकन्या योजना खाते की मैच्योरिटी बेटी की उम्र से नहीं, बल्कि खाता खोलने की तारीख से 21 साल पूरे होने पर होती है. उदाहरण के लिए यदि आपने अपनी बेटी के 10वें जन्मदिन के मौके पर सुकन्या योजना में खाता खोला है, तब ये खाता 21 साल बाद यानी बेटी के 31 साल की उम्र के होने पर मैच्योर होगा.
क्या बीच में कभी निकाले जा सकते हैं पैसे?
कई लोगों का सवाल ये भी होता है कि यदि बेटी की ज़रूरत के हिसाब से उन्हें 21 साल होने से पहले पैसों की जरूरत है तो क्या वो खाते से निकाल सकते हैं? इसका जवाब है, हां! आप बेटी की जरूरत के हिसाब से पैसे बीच में निकाल सकते हैं. लेकिन इसके लिए बेटी का 18 साल का होना जरूरी है. जब बेटी 18 साल की उम्र की हो जाएगी, तब उसकी कॉलेज फीस या शादी के लिए इन पैसों में से 50% रकम निकाल सकते हैं.
