चुनाव आयोग ने गुरुवार (17 सितंबर) को पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता (LoP) ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात की. ऋतब्रत ने कहा कि हमने इलेक्शन कमीशन के सामने अपनी बात रखी है और रेजीनगर और नंदीग्राम में होने वाले उपचुनाव से जुड़े सवालों के जवाब दिये हैं. इन उपचुनावों के लिए नॉमिनेशन भरने की आखिरी तारीख कल थी और आज स्क्रूटनी हुई, इसलिए अब सिंबल अलॉटमेंट का मामला पेंडिंग है.
उन्होंने आगे कहा, ‘हमने फॉर्म A और B जमा कर दिए हैं. हालांकि, कालीघाट से भी फॉर्म A और B जमा किए गए हैं, इसलिए चुनाव आयोग को ही आखिरी फैसला लेना होगा. हम तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और हमने फॉर्म A जमा किया है. अब यह प्रक्रिया चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर के हाथ में है, जो आयोग से सलाह-मशविरा करने के बाद फैसला लेंगे. चुनाव आयोग सबसे बड़ी संस्था है. हमें उस पर भरोसा रखना चाहिए. हम संसदीय लोकतंत्र में काम करते हैं, इसलिए हमें चुनाव आयोग पर भरोसा करना होगा.’
नाम और सिंबल पर आज होगा फैसला?
माना जा रहा है कि आज यह तय हो जाएगा कि पार्टी का चुनाव चिह्न और नाम किसे मिलेगा. आयोग ने सुनवाई के दौरान दोनों गुटों से दस्तावेज लाने को कहा था और उनकी अंतिम दलीलें उन्हीं दस्तावेजों पर आधारित होंगी. पिछली बार, आयोग ने 12 सितंबर को दोनों गुटों की दलीलें सुनी थीं लेकिन आयोग ने तब कोई फैसला नहीं लिया था. इसके बजाय, आयोग ने दोनों गुटों से कुछ अतिरिक्त दस्तावेज मांगे थे.
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चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को बुलाया
दोनों गुटों के प्रतिनिधिमंडलों को गुरुवार को सुनवाई के अंतिम दौर के लिए बुलाया गया. राजनीतिक जानकारों की मानें तो अगर चुनाव आयोग गुरुवार को ही पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के भविष्य पर अंतिम फैसला ले भी लेता है तो भी मामला यहीं खत्म नहीं होगा. एक
IANS ने एक राजनीतिक जानकार के हवाले से बताया कि जो भी गुट इस फैसले से नाखुश होगा, वह निश्चित तौर पर से इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा.
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