मिडिल ईस्ट में जंग के बादल एक बार फिर से गहराने लगे हैं. यूएस और इजरायल ने अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ फिर से एक बड़े सैन्य हमले की रूपरेखा तैयार कर ली है. यह नया ऑपरेशन बेहद खतरनाक सैन्य अभियान हो सकता है, जिसके तहत ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर, परमाणु ठिकानों और उसके मिसाइल-ड्रोन ठिकानों को सीधा निशाना बनाया जाएगा. इस संभावित जंग के बीच ईरान ने भी अमेरिका को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए बेहद घातक हथियार ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब’ का इस्तेमाल करने की तैयारी में है.
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने इस योजना को अंजाम देने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. दोनों देशों की वायुसेना ने इराक के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए स्ट्राइक मैन्यूवर बढ़ा दिए हैं. इसी सिलसिले में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हफ्ते इजरायल का दौरा कर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से संभावित हमलों पर सीधी चर्चा की. अमेरिकी रणनीतिकारों का मानना है कि हमलों का एक और दौर पिछले आठ महीनों से जारी संघर्ष के बाद ईरान की अर्थव्यवस्था को तबाही के कगार पर धकेल देगा, जिससे तेहरान कूटनीतिक स्तर पर झुकने के लिए मजबूर हो जाएगा.
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस नए सैन्य ऑपरेशन को अंतिम हरी झंडी देंगे या नहीं ये अभी तय नहीं है. व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि ट्रंप ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देने के लिए सभी सैन्य विकल्पों को खुला रख रहे हैं. दूसरी तरफ अमेरिका और इजरायल की इस रणनीति के जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता हुसैन मोहब्बी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि जिस तरह अमेरिका के पास ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब’ है, ठीक उसी तरह ईरान अब’फादर ऑफ ऑल बॉम्ब’ को दुनिया के सामने लाने जा रहा है, जो दुश्मनों के लिए एकदम नया और सरप्राइज होगा.
हालांकि, उन्होंने इस हथियार की क्षमता या तकनीकी जानकारी का खुलासा नहीं किया. मोहब्बी ने ये भी दावा किया कि जून 2025 में इजरायल और ईरान के बीच हुए 12 दिवसीय युद्ध के बाद से ईरान का मिसाइल स्टॉक 1.5 गुना बढ़ चुका है और उनकी मारक क्षमता, सटीकता और विनाशकारी पावर में भारी सुधार हुआ है. उन्होंने कहा, ‘ईरान अब केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक और असममित युद्ध नीति पर काम कर रहा है, जिसके तहत हमला होने पर दुश्मन को भारी तबाही का सामना करना पड़ेगा.’
यह पूरा तनाव उन रिपोर्ट्स के बाद और भड़क गया, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान के पहाड़ के नीचे गहराई में बने ‘पिकैक्स माउंटेन’ न्यूक्लियर फैसिलिटी को तबाह करने के लिए अपने सबसे भारी नॉन न्यूक्लियर बम (मदर ऑफ ऑल बॉम्ब) के इस्तेमाल पर विचार कर रहा है. करीब 9,800 किलो का यह बम जमीन के ऊपर बड़ा विस्फोट तो कर सकता है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रेनाइट की भारी चट्टानों के नीचे बने ईरान के परमाणु ठिकाने को यह पूरी तरह नष्ट नहीं कर पाएगा. इसके अलावा धीमी गति से उड़ने वाले MC-130 परिवहन विमान से इसे गिराना अमेरिकी वायुसेना के लिए ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम के सामने एक बड़ा जोखिम भी बन सकता है.
अमेरिका ने फिलहाल क्षेत्र में अपनी सैन्य स्थिति को बेहद मजबूत कर लिया है. नवंबर की शुरुआत तक अमेरिकी सेना के तीन एयरक्राफ्ट कैरियर, हजारों मरीन सैनिक, लड़ाकू विमान और स्पेशल ऑपरेशन्स फोर्स मिडिल ईस्ट में पूरी तरह तैनात हो जाएंगे. अमेरिका इस सैन्य दबाव का इस्तेमाल ईरान से परमाणु कार्यक्रम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समुद्री मार्ग पर जारी गतिरोध को सुलझाने के लिए बातचीत की मेज पर फायदा उठाने के रूप में करना चाहता है. जबकि ईरानी वार्ताकारों ने परमाणु मुद्दे पर झुकने से साफ इंकार कर दिया है. ईरान के वरिष्ठ सलाहकार महदी मोहम्मदी ने अमेरिका के 72 घंटे में जंग खत्म करने के दावे को कोरी कल्पना बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि हमला हुआ तो ईरान का पलटवार और भी भीषण होगा, जो केवल ऊर्जा ठिकानों तक सीमित न रहकर इंटरनेट के अंडरवाटर केबल्स और डेटा सेंटरों तक को प्रभावित करेगा.
इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने संसद को संबोधित करते हुए मौजूदा हालात को देश के लिए एक’सुपर-चैलेंज’ करार दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को उम्मीद नहीं थी कि भारी दबाव और जंग के बावजूद ईरान इतनी मजबूती से टिकेगा. वहीं संयुक्त राष्ट्र में ईरान के प्रतिनिधि ने आरोप लगाया है कि सैन्य हमलों के दौरान उनके देश के वैज्ञानिक, अंतरिक्ष ठिकानों और सैन्य ठिकानों की पहचान करने के लिए एलन मस्क की स्टारलिंक टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग किया गया है. 27 अक्टूबर को होने वाले इजरायली चुनावों और अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के कारण राजनीतिक समीकरण भी बदल रहे हैं, जिससे यह अनिश्चितता बनी हुई है कि ट्रंप कब और कितना बड़ा कदम उठाते हैं.
