3 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी संसद के लिए मध्यावधि चुनाव शुरू हो गए हैं. इन चुनावों में हाउस ऑफ रिप्रेजेनटेटिव की 435 और सीनेट की 100 में से 37 सीटों पर मतदान जारी है. इन चुनावों को डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता के जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा है. हालिया ईरान युद्ध के बाद अमेरिका में यह पहला चुनाव है.
इन चुनावों से यह तय होगा कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी, अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के दोनों सदनों हाउस ऑफ रिप्रेजेनटेटिव और सीनेट पर अपना नियंत्रण बनाए रख पाएगी या फिर ‘ओपिनियन पोल’ के अनुमानों के मुताबिक डेमोक्रेटिक पार्टी कम से कम ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेनटेटिव’ पर अपना नियंत्रण हासिल कर लेगी.
महंगाई से परेशान अमेरिकी जनता
इस चुनाव में अमेरिका की जनता के लिए कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं. जिनमें महंगाई, ईरान युद्ध और ट्रैड वॉर जैसे मुद्दों ने हालिया समय में अमेरिका की राजनीति को गरमाया हुआ है. इसके अलावा रहन-सहन का खर्च, चुनाव की निष्पक्षता, घरेलू आर्थिक स्थिति, खेलों में ट्रांसजेंडर, डेटा सेंटर, बड़े दानदाता (मेगा डोनर्स) और राजनीतिक विकल्प आदि भी प्रमुख मुद्दे हैं.
रॉयटर्स/इप्सोस के एक सर्वे के अनुसार लगभग 48% वोटर्स का कहना है कि इन चुनावों में ‘रहन-सहन का खर्च’ (cost of living) सबसे बड़ा मुद्दा है. 26% लोगों ने लोकतांत्रिक मूल्यों और 13% लोगों ने अवैध प्रवास पर वोट देने का मन बनाया है. साथ ही 48% लोगों का मानना था कि उनका वोट असल में ट्रम्प के खिलाफ है. इसके उलट, 25% लोगों ने कहा कि वे ट्रम्प के समर्थन में वोट दे रहे हैं.
कई भारतीय भी चुनावी मैदान में
भारतीयों के लिए भी यह चुनाव महत्वपूर्ण बन गए हैं. कई भारतीय मूल के अमेरिकी उम्मीदवार गवर्नर से लेकर नगर परिषद सदस्य तक के पदों के लिए चुनाव मैदान में हैं. ओहायो में भारतीय-अमेरिकी विवेक रामास्वामी का मुकाबला डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन से है और दोनों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है. केरल में जन्मी डेमोक्रेटिक पार्टी की नित्या रमन का अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े शहर लॉस एंजिलिस के मेयर पद के लिए अपनी पूर्व बॉस करेन बास से कड़ा मुकाबला है.
भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना, एमी बेरा, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेनटेटिव के लिए फिर से चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी की पीया दांडिया और अमीष शाह भी चुनावी मैदान में हैं, जो पहली बार कांग्रेस सदस्य (सांसद) बनने के लिए कड़े मुकाबले में हैं.
ट्रंप बन रहे रिपब्लिकन पार्टी के लिए बोझ
ट्रंप ने इन चुनावों से पहले अपनी आखिरी रैली के लिए ‘लिंकन मेमोरियल रिफ्लेक्टिंग पूल’ को चुना. जिसमें उन्होंने करों में कटौती, आयात शुल्क तथा सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों के बजाय अमेरिकी राजधानी में सुंदरता के कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया. ये मुद्दे उनकी चुनावी रैलियों में प्रमुखता से उठाए जाते रहे हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ के अनुसार पिछले 32 दिन में ट्रंप ने 20 राज्यों का दौरा किया, जिनमें से अधिकतर रिपब्लिकन पार्टी के गढ़ माने जाते हैं. उन्होंने वहां 30 रैलियां कीं. विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप की लोकप्रियता का स्तर अब तक के सबसे निचले स्तर पर है और वह रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवारों के लिए राजनीतिक बोझ बन गए हैं.
