Easy Hacks To Repair Cracks In Plastic Water Tank: घर की छत पर पानी की टंकी के नीचे की जगह अगर हमेशा गीली नजर आती है, तो इसे सिर्फ बारिश या पानी गिरने की वजह मानकर छोड़ देना ठीक नहीं है. कई बार टंकी से पानी बहुत धीरे-धीरे रिस रहा होता है और उसका पता तब चलता है, जब टंकी के आसपास की फर्श पर लगातार नमी बनी रहती है. कुछ मामलों में टंकी में दरार होती है, तो कभी पाइप के जोड़ या कनेक्शन से पानी बाहर निकल रहा होता है.
ऐसी स्थिति में तुरंत पूरी पानी की टंकी बदलने की जरूरत नहीं होती. सबसे पहले यह पता करना जरूरी है कि पानी आखिर निकल कहां से रहा है. लीकेज की सही जगह पहचान लेने के बाद उसी हिस्से की मरम्मत की जा सकती है.
टंकी के नीचे गीलापन किस बात का संकेत है?
लगातार गीली फर्श, टंकी के आसपास बने नमी वाले निशान, दीवार पर सीलन या पाइप के जोड़ के पास पानी जमा होना टंकी से जुड़े लीकेज के संकेत हो सकते हैं. अगर पानी का इस्तेमाल सामान्य है, लेकिन टंकी का स्तर लगातार कम हो रहा है, तो कहीं छिपा हुआ रिसाव भी हो सकता है. कई बार लीकेज इतना छोटा होता है कि पानी की धार दिखाई नहीं देती. पानी धीरे-धीरे रिसता रहता है और नीचे की सतह पर नमी जमा होती रहती है. समय के साथ यही नमी छत या टंकी के आसपास की संरचना को नुकसान पहुंचा सकती है.
सबसे पहले टंकी में दरार देखें
अगर टंकी कंक्रीट की है, तो समय के साथ उसमें छोटी दरारें आ सकती हैं. सिकुड़ने, उम्र बढ़ने, तापमान में बदलाव या लगातार पानी के दबाव के कारण भी दरारें बन सकती हैं. छत पर रखी टंकी मौसम के सीधे संपर्क में रहती है, इसलिए ऐसे नुकसान की संभावना बढ़ सकती है. प्लास्टिक की टंकी में भी समस्या हो सकती है. लंबे समय तक धूप के संपर्क में रहने, किसी चीज के टकराने या प्लास्टिक के कमजोर होने से छोटी दरार या छेद बन सकता है. इसलिए सिर्फ नीचे की गीली जगह देखने के बजाय टंकी की सतह को भी ध्यान से जांचना जरूरी है.
पाइप के जोड़ से भी निकल सकता है पानी
कई बार टंकी बिल्कुल ठीक होती है, लेकिन उसके इनलेट या आउटलेट पाइप के कनेक्शन में समस्या होती है. ढीली फिटिंग, खराब सीलिंग या पाइप के लगातार हिलने से जोड़ कमजोर हो सकता है और वहां से पानी रिसने लगता है. इसलिए अगर टंकी के नीचे गीलापन है, तो पाइप के आसपास के हिस्से को भी अच्छी तरह देखें. किसी एक जगह लगातार नमी या पानी की बूंदें दिखाई दे रही हैं, तो लीकेज का स्रोत वहीं हो सकता है.

घर पर ऐसे पता करें लीकेज कहां है
टंकी को बदलने से पहले उसका निरीक्षण करना जरूरी है. सबसे पहले टंकी के अंदर और बाहर दिखाई देने वाली दरारों, गैप और जोड़ों को देखें. इसके बाद इनलेट और आउटलेट पाइप के कनेक्शन चेक करें. कहीं ढीली फिटिंग, पानी की बूंद या लगातार नमी तो नहीं है, इसे ध्यान से देखें. टंकी के पानी का स्तर भी नोट किया जा सकता है. जब पानी का इस्तेमाल नहीं हो रहा हो, तब देखें कि स्तर कितनी तेजी से कम हो रहा है. अगर बिना इस्तेमाल के भी पानी लगातार कम हो रहा है, तो लीकेज की संभावना हो सकती है.
लीकेज वाली जगह समझने का एक और तरीका टंकी को थोड़ा-थोड़ा भरकर अलग-अलग हिस्सों पर नजर रखना है. जिस जगह से पानी रिसता दिखाई दे, उसे चिन्हित कर लें. इससे मरम्मत के दौरान पूरे टैंक पर काम करने के बजाय समस्या वाली जगह पर ध्यान दिया जा सकता है.
कंक्रीट की टंकी में क्या करें?
अगर कंक्रीट की टंकी में छोटी या मध्यम दरार है, तो उसकी मरम्मत के लिए वाटरप्रूफ मोर्टार का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह दरार और खराब प्लास्टर वाले हिस्से को भरने में मदद करता है. कंक्रीट की सतह पर वाटरप्रूफ कोटिंग भी लगाई जा सकती है, जो पानी को अंदर जाने से रोकने के लिए एक सुरक्षात्मक परत बनाती है. जोड़ों या लगातार रिसने वाली जगहों पर एपॉक्सी या पॉलीयूरेथेन सीलेंट का इस्तेमाल भी किया जाता है. ये पाइप जॉइंट, कंस्ट्रक्शन जॉइंट और गैप जैसी जगहों पर काम आ सकते हैं.
प्लास्टिक की टंकी में अलग तरीके से करें मरम्मत
प्लास्टिक की टंकी में छोटी दरार या छेद के लिए वाटरप्रूफ एडहेसिव सीलेंट इस्तेमाल किया जा सकता है. बड़े क्रैक की स्थिति में हीट वेल्डिंग एक विकल्प हो सकता है, जिसमें उसी तरह के प्लास्टिक को गर्म करके क्षतिग्रस्त हिस्से से जोड़ा जाता है. छोटी लीकेज के लिए रिपेयर टेप अस्थायी समाधान के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.
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मरम्मत से पहले ये गलती न करें
लीकेज वाली जगह पर सीधे कोई सीलेंट या कोटिंग लगाने से पहले सतह को अच्छी तरह साफ करना जरूरी है. धूल, काई, चिकनाई या ढीले कण होने पर रिपेयर सामग्री ठीक से चिपक नहीं सकती. साथ ही कंक्रीट और प्लास्टिक के लिए एक ही तरह की सामग्री इस्तेमाल करना सही नहीं है. अगर दरार बड़ी है या समस्या सिर्फ सतह तक सीमित नहीं लग रही, तो केवल ऊपर से पैच लगाने के बजाय उसकी ठीक से जांच करानी चाहिए.
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