Women Reservation Bill: अखिलेश यादव के बदले सुर से बढ़ीं मोदी सरकार की उम्मीदें! क्या इस बार पास होगा महिला आरक्षण बिल?


20 जुलाई से संसद के मानसून सत्र की शुरुआत होने वाली है. इस सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल लाने पर सरकार फिर से विचार कर रही है. बिल को पास कराने के लिए सरकार कई दलों के सम्पर्क में है.

अब सवाल ये है कि सत्र से पहले महिला आरक्षण और परिसीमन पर क्या विपक्ष के कुछ दल अपना रुख बदल रहे हैं? बदलते राजनीतिक समीकरण, विपक्ष में हाल की टूट और कुछ दलों के बदले सुरों के बीच सरकार को भरोसा है कि इस बार संसद में संख्या का गणित उसके पक्ष में बैठ सकता है. इसी बीच अखिलेश यादव के एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी राजनीतिक हलकों को चर्चा शुरू हुई है.

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बदला संसदीय गणित

20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है. लेकिन इस बार सिर्फ़ एजेंडा ही नहीं, संसद का अंकगणित भी बदला हुआ दिखाई देगा. हाल के महीनों में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना में हुई टूट के बाद एनडीए के समर्थन का दायरा बढ़ा है. ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि पिछले सत्र में संख्या के अभाव में अटके विधेयकों को अब आगे बढ़ाया जा सकता है.

अखिलेश की मांग

सरकार की नजर सिर्फ अपने सहयोगियों पर नहीं, बल्कि कुछ विपक्षी दलों के बदले रुख पर भी है. इसी बीच समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की सोशल मीडिया पोस्ट ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है. अखिलेश यादव ने कुछ महिलाओं के साथ सोशल मीडिया पर पोस्ट करके लिखा कि इनकी मांग है, परिसीमन के साथ राज्यसभा में भी सीटें बढ़ाई जाएं. इसके साथ साथ महिला आरक्षण में PDA के तहत पिछड़े वर्ग और मुस्लिम महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिले और उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से ही महिला आरक्षण लागू किया जाए.

बजट सत्र की तस्वीर

अखिलेश यादव ने समर्थन के साथ अपनी राजनीतिक शर्तें भी जोड़ दी हैं, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे सरकार के लिए सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. गौरतलब है कि बजट सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान के दौरान विपक्षी एकजुटता में दरार दिखाई दी थी. महिला आरक्षण के समर्थन के बावजूद कई विपक्षी दल परिसीमन और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे. यही वजह रही कि विधेयक को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका.

बदले राजनीतिक समीकरण

अब हाल के महीनों में शिवसेना, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद बीजेपी को भरोसा है कि इस बार सदन का अंकगणित उसके पक्ष में हो सकता है. इस मानसून सत्र में सिर्फ़ महिला आरक्षण और परिसीमन ही नहीं, बल्कि विपक्ष की एकजुटता भी बड़ी परीक्षा से गुजरेगी. सरकार को बदले समीकरणों पर भरोसा है, जबकि विपक्ष का अंतिम रुख संसद में ही साफ़ होगा.

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