Headlines

अंबोली डबल मर्डर केस: जितेंद्र राणा की उम्रकैद 20 साल में बदली, 2 बरी


बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई में साल 2011 में हुए कीनन सैंटोस और रूबेन फर्नांडीस हत्याकांड में मुख्य आरोपी जितेंद्र राणा की हत्या के अपराध में दोषसिद्धि बरकरार रखी है. हालांकि कोर्ट ने उसकी उम्र को ध्यान में रखते हुए उम्रकैद की सजा घटाकर बिना किसी छूट के 20 साल की कैद कर दी है.

न्यायमूर्ति एम. एस. कार्णिक और न्यायमूर्ति संदेश पाटिल की खंडपीठ ने गुरुवार को वर्ष 2016 में विशेष अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले के खिलाफ दाखिल अपीलों पर यह निर्णय दिया. वहीं इस मामले में आरोपी सुनील बोध और दीपक तिवाल को ठोस सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है. जबकि अपील लंबित रहने के दौरान पिछले साल चौथे आरोपी सतीश दुल्हाज की मौत हो गई थी.

तीन दोषियों की अपीलों को कोर्ट ने किया मंजूर

मुंबई के बहुचर्चित अंबोली दोहरे हत्याकांड में बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों की अपीलों को आंशिक रूप से मंजूर कर लिया. अक्टूबर 2011 में हुए इस हत्याकांड में कीनन सैंटोस (24) और रूबेन फर्नांडिस (29) की हत्या कर दी गई थी. दोनों ने अपनी महिला मित्रों के साथ छेड़छाड़ का विरोध किया था.

20 अक्टूबर 2011 को कीनन, रूबेन और उनकी तीन महिला मित्र अंधेरी पश्चिम के अंबोली इलाके में एक रेस्टोरेंट गए थे. वहां कुछ लोगों ने महिलाओं के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी. इसका विरोध करने पर विवाद हुआ और पान की दुकान के पास कीनन और रूबेन पर चाकुओं से हमला किया गया. घटना के कुछ समय बाद 20 अक्टूबर को कीनन की मौत हो गई, जबकि रूबेन ने 30 अक्टूबर 2011 को अस्पताल में दम तोड़ दिया.

जस्टिस मकरंद कर्णिक और जस्टिस संदीप पाटिल की खंडपीठ ने 6 मई 2016 को ट्रायल कोर्ट द्वारा जितेंद्र राणा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखा. हालांकि, उसकी उम्र को ध्यान में रखते हुए आजीवन कारावास की सजा घटाकर बिना किसी वैधानिक छूट के 20 साल के सश्रम कारावास में बदल दी.

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

वहीं, सुनील भोट और दीपक तिवाल को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया. हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 302 के तहत उनकी सजा बरकरार रखने के लिए उनके खिलाफ कोई ठोस सामग्री उपलब्ध नहीं है. हालांकि, उनकी अन्य सजाएं बरकरार रखी गई हैं.

दोषियों की ओर से पेश वकील सुदीप पासबोला और युग चौधरी ने दलील दी कि कथित छेड़छाड़ की घटना हुई ही नहीं थी और अभियोजन पक्ष हमले के पीछे की वजह और मकसद साबित करने में विफल रहा है.

बचाव पक्ष ने कोर्ट में दी ये दलील

बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि यह गंभीर और अचानक उकसावे के बाद हुआ आपसी संघर्ष था, इसलिए इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 300 के अपवाद के तहत माना जाना चाहिए, न कि हत्या का मामला. वहीं, विशेष सरकारी वकील आबाद पोंडा ने अभियोजन पक्ष की ओर से दलील देते हुए कहा कि गवाहों के बयान, फॉरेंसिक साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही से साबित होता है कि हमला पूर्व नियोजित था.

उन्होंने बचाव पक्ष की दलील को खारिज करते हुए कहा कि आरोपियों में से एक को थप्पड़ मारे जाने के बाद वह जान से मारने की धमकी देकर मौके से चला गया था और बाद में चाकू, क्रिकेट स्टंप और बांस का बड़ा डंडा लेकर वापस लौटा था.

पोंडा ने अदालत को बताया कि कीनन के शरीर पर धारदार हथियार से किए गए गहरे घाव थे और चाकू से हुए हमले के कारण अत्यधिक रक्तस्राव होने से उसकी मौत हुई थी. इस मामले में चार दोषियों ने उम्रकैद की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी. अपील लंबित रहने के दौरान चौथे आरोपी सतीश दुल्हाज की पिछले साल मौत हो गई थी.

धीरेंद्र शास्त्री पर भड़के कांग्रेस नेता, ‘उसको तो चौराहे पर लाकर ठोकना चाहिए’



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *