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आप न धोखा खाइएगा! फर्जी पेमेंट स्क्रीनशॉट से ऐसे चूना लगा रहे ठग


दिल्ली पुलिस की साइबर नॉर्थ थाना पुलिस ने दुकानदारों को फर्जी Paytm/UPI पेमेंट स्क्रीनशॉट दिखाकर ठगी करने वाले एक गिरोह का खुलासा किया है. आरोपी पहले दुकान से सामान खरीदता था और भुगतान के नाम पर मोबाइल में फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर दुकानदार को भरोसा दिलाता था कि पैसे भेज दिए गए है. जब दुकानदार खाते में रकम नहीं आने की बात कहता था तो आरोपी मोबाइल चेक करने के बहाने फोन अपने हाथ में लेने की कोशिश करता था. मौका मिलने पर मोबाइल लेकर बैंक और UPI ऐप के जरिए खाते से पैसे निकाल लेता था.

पुलिस के मुताबिक अब तक सामने आए मामलों में 30 लाख 81 हजार 700 रुपये से ज्यादा की ठगी का पता चला है. मामले की जांच अभी जारी है और ठगी की रकम तथा अन्य पीड़ितों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है.

29 मार्च को सामने आया मामला

डीसीपी नार्थ निहारिका भट्ट ने बताया कि मामला 29 मार्च 2026 को सामने आया. जब सदर बाजार स्थित कपड़े की दुकान के मालिक विष्णु कुमार गोयल ने साइबर नॉर्थ थाने में शिकायत दी. उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति ग्राहक बनकर उनकी दुकान पर आया और कपड़े खरीदे. भुगतान के समय उसने Paytm का ऐसा स्क्रीनशॉट दिखाया. जिसमें पेमेंट सफल बताया गया था, लेकिन बैंक खाता चेक करने पर दुकानदार को कोई रकम जमा नहीं मिली.

आरोपी ने इसके बाद पेमेंट की समस्या ठीक करने के बहाने दुकानदार का मोबाइल लेने की कोशिश की. पुलिस के मुताबिक मोबाइल तक पहुंच मिलने के बाद आरोपी ने दुकानदार के बैंक खाते से एक लाख रुपये का ट्रांजेक्शन कर दिया. शिकायत के आधार पर साइबर नॉर्थ थाने में ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई.

पुलिस ने खंगाले रिकॉर्ड

जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों, UPI ट्रांजेक्शन और मोबाइल से जुड़े तकनीकी रिकॉर्ड खंगाले. पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम पहले शाहिना नाम की महिला के बैंक खाते में पहुंची थी. इसके बाद रकम कई खातों में ट्रांसफर की गई, ताकि पैसों का असली स्रोत छिपाया जा सके.

पुलिस ने शाहिना को हिरासत में लेकर पूछताछ की. उसके बाद उसकी निशानदेही पर तरुण तक पहुंच बनाई गई. पूछताछ में तरुण ने बताया कि उसने रकम नकद में निखिल यादव उर्फ नाडा उर्फ नाला को दी थी. तकनीकी जांच और गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने निखिल यादव को 20 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर लिया.

कैसे करते ठगी?

पुलिस के मुताबिक निखिल छोटे दुकानदारों को निशाना बनाता था. वो कम कीमत का सामान खरीदता. फिर भुगतान के नाम पर फर्जी या डिजिटल रूप से बदला हुआ Paytm/UPI स्क्रीनशॉट दिखा देता था.

जब दुकानदार कहता कि खाते में पैसे नहीं आए हैं, तो आरोपी मदद करने का नाटक करता. वो मोबाइल चेक करने के बहाने फोन लेने की कोशिश करता था. यदि दुकानदार मोबाइल देने से मना करता, तो आरोपी कथित तौर पर मोबाइल या UPI से जुड़ी जरूरी जानकारी देखने या याद करने की कोशिश करता था. इसके बाद मौका मिलने पर मोबाइल चोरी या झपटने के बाद बैंकिंग और UPI ऐप के जरिए पैसे निकालता था.

अलग-अलग खातों में भेजते ठगी का पैसा

ठगी की रकम अलग-अलग फेक बैंक खातों में भेजी जाती थी. बाद में कई ट्रांजेक्शन और ATM से निकासी के जरिए पैसों का ट्रेल छिपाने की कोशिश की जाती थी.पुलिस के मुताबिक कुछ मामलों में आरोपी चोरी किया गया मोबाइल आगे की वारदात में भी इस्तेमाल करता था.

पूछताछ और तकनीकी जांच के बाद पुलिस ने आरोपी को दिल्ली और मुंबई में दर्ज कई मामलों से जोड़ा है. इनमें साइबर नॉर्थ वेस्ट, मॉडल टाउन, सराय रोहिल्ला, सब्जी मंडी और रूप नगर के मामले शामिल है. इसके अलावा मुंबई के शिवडी और तारदेव थानों में दर्ज दो मामलों में भी उसकी भूमिका सामने आई है.

पुलिस के मुताबिक निखिल यादव 12वीं तक पढ़ा है और पहले भी दिल्ली व मुंबई के अलग-अलग थानों में चोरी और ठगी के 8 मामलों में शामिल रहा है. शाहिना 27 साल की गृहिणी है, जबकि 25 साल का तरुण 12वीं तक पढ़ा है और दिल्ली की एक निजी कंपनी में काम करता है.  पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, फेक बैंक खातों और ठगी के बाकी मामलों की जांच कर रही है. साथ ही ये भी पता लगाया जा रहा है कि इस तरीके से कितने अन्य दुकानदारों को निशाना बनाया गया.

 

 

 



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