उत्तर प्रदेश में चीनी के बढ़ते दाम के बीच चीनी की कमी और इथेनॉल बनाने के लिए चीनी का इस्तेमाल किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इस पर उत्तर प्रदेश शुगर मिल्स एसोसिएशन (UPSMA) ने सफाई दी है. एसोसिएशन ने चीनी की कमी के दावों को गलत बताया है. उसका कहना है कि प्रदेश की चीनी मिलों में पर्याप्त चीनी का स्टॉक है और बाजार में सप्लाई की कोई कमी नहीं है.
UPSMA के महासचिव दीपक गुप्तारा ने कहा कि इथेनॉल मिले पेट्रोल (EBP) योजना के लिए चीनी का इस्तेमाल होने पर देश में चीनी की कमी या हाल में बढ़े दाम की वजह बताना सही नहीं है. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी की मात्रा कम हुई है. उत्तर प्रदेश देश में इथेनॉल की सप्लाई करने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल है.
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मिलों में पर्याप्त चीनी का स्टॉक
एसोसिएशन के मुताबिक प्रदेश की सभी चीनी मिलों में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. त्योहारों के समय और घरों में रोजाना इस्तेमाल के लिए भी चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है. एसोसिएशन ने कहा कि बाजार में चीनी की कमी नहीं है. UPSMA ने चीनी की कमी को लेकर फैल रही खबरों पर चिंता जताई और कहा कि ऐसी खबरों से लोगों में बेवजह डर पैदा हो सकता है. एसोसिएशन ने जमाखोरी की आशंका भी जताई है.
यूपी में 121 चीनी मिलें
UPSMA के मुताबिक उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य है. प्रदेश में कुल 121 चीनी मिलें हैं, जिनमें 95 निजी क्षेत्र की हैं. इन मिलों से घरेलू बाजार में चीनी की बड़ी मात्रा में सप्लाई होती है. चीनी मिलों को केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की ओर से हर महीने तय किए गए कोटे के हिसाब से बाजार में चीनी भेजनी होती है. एसोसिएशन ने कहा कि वह केंद्र और प्रदेश सरकार के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है और सरकार के निर्देशों के अनुसार काम कर रहा है. एसोसिएशन के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में सरकार चीनी के दाम और बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है.
