पड़ोसी देश पाकिस्तान में 27 सितंबर को इमरान ख़ान की रिहाई के लिए प्रस्तावित राजधानी इस्लामाबाद तक मार्च से पहले पूरे इस्लामाबाद को सैन्य छावनी बनाया जा रहा है. जगह जगह शहर के अंदर और बाहर कंटेनर रखे जा रहे हैं, साथ ही एबीपी न्यूज़ के पास आई नई वीडियो में पाकिस्तानी सेना के ट्रक और 7 आर्टिलरी भी इस्लामाबाद शहर के बाहरी हिस्से में खड़ी हुई दिख रही हैं.
पीटीआई का लॉन्ग मार्च
चूंकि हाल फ़िलहाल दिनों में ना ही कोई पाकिस्तानी सेना की एक्सरसाइज हुई है और ना ही होनी है ऐसे में राजधानी में आर्टिलरी खड़ी होना सामान्य घटना नहीं है. इस्लामाबाद में आर्टिलरी यूनिट खड़ी करने के अलावा राजधानी में 12 हज़ार अतिरिक्त सैनिको की भी तैनाती की गई है, साथ ही 12 सितंबर को पाकिस्तान की सरकार ने इस्लामाबाद में सिंध पुलिस, पंजाब पुलिस और बलूचिस्तान पुलिस के 23 हज़ार 500 पुलिसकर्मियों की भी अगले आदेश तक तैनाती कर दी है.
ख़ैबरपख्तूनख़्वाह के मुख्यमंत्री सोहेल अफ़रीदी ने पिछले महीने ऐलान किया था कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की रिहाई के लिए 27 सितंबर को पूरे पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन किया जायेगा और इस्लामाबाद तक मार्च किया जाएगा.
27 सितंबर की मार्च के लिये सोहेल अफ़रीदी लगातार अलग अलग प्रांतों में जाकर रैली और रोडशो कर रहे हैं और लोगो से इमरान ख़ान के लिए 27 सितंबर को इकट्ठा की अपील कर रहे है. इसी कड़ी में सोमवार को सोहेल अफ़रीदी का लाहौर पुलिस के साथ टकराव भी हुआ था जिसमें पहले सोहेल अफ़रीदी को लाहौर पुलिस ने उठा कर अपनी पुलिस वैन में बैठा दिया था और फिर लक्ष्मी चौक पर छोड़ दिया था.ॉ
सुप्रीम कोर्ट ने मांगा रिकॉर्ड
दूसरी तरफ, पाकिस्तान की संघीय संवैधानिक अदालत (एफसीसी) ने मंगलवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित किए जाने से जुड़े मामलों का रिकॉर्ड उच्चतम न्यायालय से मांगा. अदालत ने देश भर के उच्च न्यायालयों में इसी तरह के किसी भी मामले से जुड़े रिकॉर्ड भी मांगे. ये घटनाक्रम तब हुआ जब एफसीसी के मुख्य न्यायाधीश अमीनउद्दीन खान की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय पीठ ने अदियाला जेल के तीन कैदियों की अपील पर सुनवाई की; इन कैदियों ने खान को उपलब्ध इलाज और सुविधाओं की जानकारी मांगी थी.
पीठ में न्यायमूर्ति अली बाकर नजफी और न्यायमूर्ति आमिर फारूक भी शामिल हैं. उन्होंने उच्च न्यायालय के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें पिछले महीने अधिकारियों को खान को निजी शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाने का निर्देश दिया गया था. उच्चतम न्यायालय के आदेश पर, अधिकारियों ने सुरक्षा का हवाला देते हुए खान को निजी शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल के बजाय पाकिस्तान आयुर्विज्ञान संस्थान (पीआईएमएस) पहुंचाया.
एफसीसी ने उच्च न्यायालय में उठाए गए किसी भी ऐसे मामले का रिकॉर्ड मांगने के लिए संविधान के अनुच्छेद 175-ई का हवाला दिया. ये अनुच्छेद 27वें संविधान संशोधन के जरिए संविधान में जोड़ा गया था और यह एफसीसी को किसी भी मामले का रिकॉर्ड मंगाने और संवैधानिक कानून से जुड़े अहम सवालों वाले मामलों पर फैसला लेने का अधिकार देता है.
तीन कैदियों – मुहम्मद इलियास खान, मोहम्मद इस्माइल हुसैन और ओवैस अल्ताफ – ने शुरू में उच्चतम न्यायालय के 18 अगस्त के आदेश के बाद राहत पाने के लिए इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) का रुख किया था. याचिकाएं 31 अगस्त को खारिज कर दी गईं, जब आईएचसी ने फैसला सुनाया कि किसी कैदी को अपनी पसंद के निजी अस्पताल में भर्ती होने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है और कैदियों के इलाज की मुख्य जिम्मेदारी राज्य के प्रशासनिक ढांचे और सरकारी अस्पतालों की है.
इसके बाद, कैदियों ने पिछले हफ्ते आईएचसी के आदेश को चुनौती देने के लिए एफसीसी से संपर्क किया. खान पांच अगस्त, 2023 से जेल में बंद हैं और उनके समर्थकों का आरोप है कि उचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई है. हालांकि, जेल अधिकारियों ने इस आरोप को खारिज कर दिया है.
