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इमरान खान की रिहाई को लेकर PAK की सड़कों पर जनसैलाब, हजारों समर्थक मार्च में शामिल


पाकिस्तान के जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थकों ने सरकार के साथ बातचीत नाकाम होने के बाद रविवार, 4 अक्टूबर को विरोध मार्च शुरू कर दिया. पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI की ओर से आयोजित इस मार्च में खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मरवत इलाके में हजारों लोग शामिल हुए. रिपोर्टों के मुताबिक शुरुआत में 5,000 से ज्यादा लोगों के मार्च में शामिल होने की बात सामने आई है.

यह मार्च पहले 27 सितंबर को निकाला जाना था, लेकिन सरकार और PTI नेतृत्व के बीच बातचीत के लिए इसे 4 अक्टूबर तक टाल दिया गया था. हालांकि, बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी. इसके बाद PTI ने मार्च शुरू करने का फैसला किया. पार्टी का मुख्य दबाव इमरान खान की रिहाई और जेल में उनसे डॉक्टर तथा परिवार की मुलाकात से जुड़ी मांगों पर है.

खैबर पख्तूनख्वा से इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहा मार्च

PTI के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी वीडियो में खैबर पख्तूनख्वा के अलग-अलग इलाकों से समर्थकों को काफिलों के साथ आगे बढ़ते दिखाया गया. खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने भी मार्च जारी रखने की बात कही है. अफरीदी के अनुसार मार्च गुरुवार तक खैराबाद पहुंचने की योजना है. खैराबाद इस्लामाबाद से करीब 80 किलोमीटर पश्चिम में है. वहां पहुंचने के बाद मार्च के अगले चरण की जानकारी दी जाएगी.

इस्लामाबाद में कंटेनर लगाकर रास्ते बंद

PTI के मार्च को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है. राजधानी में जाने वाले प्रमुख रास्तों और एंट्री प्वाइंट पर बड़े शिपिंग कंटेनर लगाए गए हैं. इससे सामान्य यातायात और सामान की आवाजाही भी प्रभावित हुई है. रॉयटर्स के मुताबिक, सरकार ने राजधानी और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए हैं. सितंबर से ही कई इलाकों में PTI कार्यकर्ताओं और नेताओं की गिरफ्तारियां भी हुई हैं.

गृह मंत्री ने दी कार्रवाई की चेतावनी

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा है कि सरकार PTI को अशांति फैलाने की अनुमति नहीं देगी. उन्होंने बातचीत के नाकाम होने के लिए खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को जिम्मेदार ठहराया है. सरकार का कहना है कि राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को इस्लामाबाद की सार्वजनिक सड़कों, हाईवे, इंटरचेंज, टोल प्लाजा और सरकारी इमारतों पर कब्जा करने का अधिकार नहीं है. अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आदेशों का उल्लंघन होने पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में

73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं. उन पर भ्रष्टाचार से लेकर देशद्रोह और हिंसा भड़काने तक कई आरोपों में मामले चल चुके हैं. खान और उनकी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते रहे हैं. उनकी पार्टी का कहना है कि खान के खिलाफ कई मामलों में सजा पर रोक लगी है या अपील की प्रक्रिया चल रही है. इसलिए PTI लगातार उनकी रिहाई की मांग कर रही है.

खान की सेहत को लेकर भी उनकी पार्टी और परिवार चिंता जताते रहे हैं. खासकर उनकी दाहिनी आंख की रोशनी को लेकर इलाज और डॉक्टरों से मिलने की मांग सामने आई है. AFP के मुताबिक, अगस्त में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने खान को इलाज के लिए सिविलियन अस्पताल ले जाने का आदेश दिया था, लेकिन थोड़े समय बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया.

खान की बहनों की गिरफ्तारी से भी बढ़ा तनाव

PTI ने इमरान खान की तीन बहनों की रिहाई की मांग भी की है. उनकी बहनों की पिछले महीने गिरफ्तारी के बाद पार्टी और सरकार के बीच तनाव और बढ़ गया था. PTI का कहना है कि खान के परिवार और समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई बंद होनी चाहिए.

सरकार क्यों रोकना चाहती है मार्च?

नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के फेलो जेम्स डोर्सी के मुताबिक इमरान खान के पास एक बड़ा जनसमर्थन वाला राजनीतिक आंदोलन है. AFP से बातचीत में उन्होंने कहा कि यही वजह है कि सरकार प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद पहुंचने से रोकने की कोशिश कर रही है. जियोपॉलिटिक्स एक्सपर्ट्स टिम विलासी-विल्सी ने कहा कि पाकिस्तान में महंगाई, फ्यूल की कीमत और आर्थिक दबाव भी मौजूदा असंतोष की वजहों में शामिल हैं. उनके मुताबिक इमरान खान सरकार के खिलाफ विपक्षी असंतोष का एक प्रमुख चेहरा बने हुए हैं.



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