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इस एक वजह के लिए अपनी 50% सैलरी किराए में दे रही ये महिला, वीडियो वायरल


गुरुग्राम जैसे शहर में नौकरी करने वालों के लिए घर और ऑफिस के बीच की दूरी रोज की जिंदगी का बड़ा हिस्सा तय करती है. आमतौर पर लोग कम किराए वाला घर खोजते हैं, भले ही वहां से ऑफिस पहुंचने में एक-दो घंटे क्यों न लग जाएं. लेकिन गुरुग्राम में रहने वाली एक महिला ने इस सोच से बिल्कुल अलग फैसला लिया. उन्होंने ऐसा घर चुना जो उनके स्कूल से महज चार मिनट की पैदल दूरी पर है. इसकी कीमत उन्हें अपनी सैलरी का आधे से ज्यादा हिस्सा किराए के तौर पर चुकाकर करनी पड़ती है. इसके बावजूद उनका कहना है कि रोज का समय, सफर की थकान और अपनी सुविधा खोकर पैसे बचाने से बेहतर है कि वह अपने लिए सुकून वाली जिंदगी चुनें.

स्कूल से सिर्फ चार मिनट दूर है घर

इंस्टाग्राम यूजर शक्ति धरनी पांडे ने अपने वीडियो में अपनी रोजमर्रा की जिंदगी की झलक दिखाई है. वह जिस स्कूल में काम करती हैं, उनका घर वहां से इतना करीब है कि वह महज चार मिनट पैदल चलकर पहुंच सकती हैं. शक्ति के मुताबिक, उनके पास इससे दूर और काफी सस्ता घर लेने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने जानबूझकर महंगा घर चुना.

उनके इस फैसले की वजह सिर्फ ऑफिस के करीब रहना नहीं है. घर पास होने से उनके पूरे दिन का टाइम मैनेजमेंट बदल गया है. उन्हें सुबह जल्दी उठकर लंबा सफर तय करने की चिंता नहीं रहती और काम खत्म होने के बाद घर पहुंचने में भी ज्यादा वक्त नहीं लगता.

लंच ब्रेक में घर जाकर खा लेती हैं खाना

शक्ति ने बताया कि घर और स्कूल के बीच कम दूरी का सबसे बड़ा फायदा उन्हें अपने लंच ब्रेक में मिलता है. वह चाहें तो स्कूल से पैदल घर पहुंच सकती हैं, गर्म खाना खा सकती हैं और घर के कुछ जरूरी काम भी निपटा सकती हैं. इसके बाद वह वापस अपने काम पर लौट जाती हैं.

वीडियो में उन्होंने खाना बनाने, सफाई करने और घर से जुड़े दूसरे कामों की भी झलक दिखाई है. उनके मुताबिक, अगर घर काफी दूर होता तो आने-जाने में ही इतना समय निकल जाता कि इन छोटी-छोटी चीजों के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता.

आधी से ज्यादा सैलरी सिर्फ किराए में जा रही

शक्ति ने अपने वीडियो में साफ कहा कि उनकी सैलरी का 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा किराए में चला जाता है. आमतौर पर इतनी बड़ी रकम किराए में खर्च करने को लोग आर्थिक तौर पर सही फैसला नहीं मानेंगे. खुद शक्ति भी मानती हैं कि बाहर से देखने पर उनका फैसला पैसे बचाने के नजरिए से ठीक नहीं लग सकता.

लेकिन उनका कहना है कि वह इस खर्च को सिर्फ किराए के तौर पर नहीं देखतीं. उनके लिए यह पैसा रोज मिलने वाले अतिरिक्त समय और सुविधा की कीमत है. उन्हें ट्रैफिक में फंसने, लंबी दूरी तय करने और रोज के सफर की थकान से राहत मिलती है.

सस्ता घर लेकर रोज का सफर नहीं करना चाहतीं

शक्ति ने बताया कि वह पैसे बचाने के लिए ऐसा घर नहीं लेना चाहतीं जहां से उन्हें रोज लंबा सफर करना पड़े. उनके मुताबिक, सस्ता किराया देने के बाद अगर रोज कई घंटे आने-जाने में चले जाएं तो उस बचत का फायदा भी उतना महसूस नहीं होता.

उनका कहना है कि उन्होंने अपनी प्राथमिकता तय की है और फिलहाल वह पैसों की बचत से ज्यादा अपने समय और सुविधा को महत्व दे रही हैं. उनके लिए ऑफिस के पास रहना रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाता है.

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कुछ यूजर्स ने SIP और निवेश को लेकर उठाए सवाल

वहीं, कुछ लोगों ने शक्ति के फैसले पर आर्थिक नजरिए से सवाल भी उठाए. उनका तर्क था कि ज्यादा किराया देने के बजाय अगर उस रकम का कुछ हिस्सा निवेश में लगाया जाए तो लंबे समय में उसका फायदा मिल सकता है. कुछ यूजर्स ने SIP जैसी बचत योजनाओं का भी जिक्र किया.

यानी सोशल मीडिया पर बहस सिर्फ महंगे किराए की नहीं, बल्कि इस बात की शुरू हो गई कि जिंदगी में पैसे और समय के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए. शक्ति का फैसला हर किसी के लिए सही हो, यह जरूरी नहीं, लेकिन उनकी कहानी ने एक दिलचस्प सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या ज्यादा बचत के लिए रोज का समय और सुकून गंवाना सही है, या फिर कम सफर वाली जिंदगी के लिए ज्यादा किराया देना भी एक तरह का निवेश माना जा सकता है?

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