- 3-4 साल में फल, 2-4 लाख प्रति हेक्टेयर मुनाफा.
भारत में खाना बनाने के लिए बड़े लेवल पर तेल का इस्तेमाल होता है. देश में जरूरत के हिसाब से ऑयल का प्रोडक्शन नहीं हो पाता. इसलिए पाम ऑयल दूसरे देशों से मंगाना पड़ता है. अब भारत में भी इसकी खेती बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है. ऑयल पाम एक बार लगाने के बाद कई साल तक फल देता है. ऐसे में किसान इससे लंबे समय तक कमाई कर सकते हैं.
हालांकि इसकी खेती हर जगह नहीं की जा सकती. ऑयल पाम को गर्म मौसम, अच्छी नमी और भरपूर पानी चाहिए. खेत के पास प्रोसेसिंग यूनिट होना भी जरूरी है. क्योंकि कटाई के बाद फलों को ज्यादा समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता. जान लीजिए कैसे की जा इसकी खेती और इससे कितना मुनाफा कमाया जा सकता है.
इस तरह शुरू करें खेती
ऑयल पाम के लिए गहरी और उपजाऊ मिट्टी सही रहती है. खेत में पानी निकलने की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए. बारिश और सिंचाई का पानी लंबे समय तक जमा रहने से पौधों की जड़ें खराब हो सकती हैं. पौधे लगाने से पहले मिट्टी की जांच करा लें. इससे पता चलेगा कि खेत में किस खाद और न्यूट्रिशन की जरूरत है.
इस फसल को पूरे साल पानी चाहिए. कम बारिश वाले इलाकों में ड्रिप इरिगेशन लगाना बेहतर रहेगा. खेती शुरू करने से पहले अपने जिले के कृषि या बागवानी विभाग से संपर्क करें. वहां से पता चल जाएगा कि आपका इलाका ऑयल पाम के लिए सही है या नहीं. पौधे हमेशा विभाग से जुड़ी नर्सरी और फिर अधिकृत एजेंसी से ही खरीदें.
पौधों के बीच रखें सही दूरी
खेत की गहरी जुताई करके पौधे लगाने के लिए गड्ढे तैयार करें. ऑयल पाम के पौधे करीब 9 मीटर की दूरी पर लगाए जाते हैं. इन्हें तिकोने पैटर्न में लगाने से एक हेक्टेयर में लगभग 143 पौधे लगाए जा सकते हैं. पौधों के बीच कम दूरी रखने पर कुछ साल बाद उनकी पत्तियां आपस में टकराने लगेंगी. इससे उन्हें सही धूप और हवा नहीं मिलेगी.
पौधे लगाने के तुरंत बाद पानी दें. शुरुआती महीनों में मिट्टी सूखने न दें. पौधों के आसपास उगने वाले खरपतवार को समय पर हटाते रहें. खाद की मात्रा पौधे की उम्र और मिट्टी की जांच के हिसाब से रखें. शुरुआती तीन साल तक पौधों के बीच काफी जगह खाली रहती है. इस जगह में मूंगफली, दाल और सब्जियों की खेती की जा सकती है.
तीन से चार साल बाद शुरू होगी कमाई
ऑयल पाम में आमतौर पर पौधे लगाने के तीन से चार साल बाद फल आने शुरू होते हैं. पौधों की उम्र बढ़ने के साथ उत्पादन भी बढ़ सकता है. सही देखभाल मिलने पर एक हेक्टेयर से सालाना करीब 20 से 25 टन फलों के गुच्छे मिल सकते हैं. हालांकि शुरुआती सालों में उत्पादन इससे कम रह सकता है.
फलों की कटाई सही समय पर करना बेहद जरूरी है. गुच्छे पकने के बाद कुछ फल नीचे गिरने लगते हैं. इसे कटाई शुरू करने का संकेत माना जा सकता है. कच्चे गुच्छे काटने से उनमें तेल की मात्रा कम मिल सकती है. वहीं ज्यादा देर करने पर फल खराब होने लगते हैं.
इससे उनकी क्वालिटी और कीमत दोनों प्रभावित हो सकती हैं. कटाई के बाद फलों को जल्द प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचाएं. किसान पौधे तैयार होने तक उनके बीच खाली जगह में दलहन, मूंगफली और सब्जियां उगाकर कुछ एक्स्ट्रा कमाई भी कर सकते हैं.
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इतना मिल सकता है मुनाफा
ऑयल पाम के फलों का भाव अलग अलग राज्यों और समय के हिसाब से बदल सकता है. अगर एक टन फलों का रेट करीब 21500 रुपये से 24000 रुपये रहता है. तो 20 से 25 टन उत्पादन बेचकर किसान लगभग 4.30 लाख रुपये से 6 लाख रुपये तक की सालाना ग्रॉस बिक्री कर सकता है.
इसमें खाद, सिंचाई, मजदूरी, कटाई और ट्रांसपोर्ट पर होने वाला खर्च घटाने के बाद एक हेक्टेयर से करीब 2 लाख रुपये से 4 लाख रुपये तक का नेट मुनाफा बच सकता है. लेकिन आपके राज्य के भाव, मजदूरी और प्रोसेसिंग यूनिट की दूरी भी मुनाफा प्रभावित कर सकती है. प्रोसेसिंग यूनिट पास होने से ट्रांसपोर्ट का खर्च कम रह सकता है. जिससे मुनाफा अपने आप बढ़ जाएगा.
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