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‘कर्मचारियों को बिंदी, तिलक, पगड़ी पहनने की अनुमति’, Lenskart का ऐलान! जारी की नई इन-स्टोर स्टाइल गाइड


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  • लेंसकार्ट ने पिछले संवादों से आहत होने वालों से खेद जताया।

प्रीमियम आई-वियर कंपनी लेंसकार्ट ने शनिवार (18 अप्रैल, 2026) को एक बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने कहा कि अब से उसके सभी स्टोर्स में काम करने वाले कर्मचारी बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, पगड़ी और हिजाब समेत किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक पहचान के साथ काम कर सकते हैं. इस ऐलान के साथ लेंसकार्ट ने अपने कर्मचारियों के लिए नई ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ भी जारी की है.

कंपनी ने कहा कि यह कोई छूट या अपवाद नहीं है, बल्कि कंपनी की पहचान का हिस्सा है. अगर किसी पुराने कम्युनिकेशन से किसी कर्मचारी को ऐसा लगा कि उनकी आस्था की यहां जगह नहीं है, तो कंपनी इसके लिए माफी मांगती है. लेंसकार्ट ने यह भी कहा कि अब आगे हर पॉलिसी और ट्रेनिंग मटेरियल इन्हीं मूल्यों को दर्शाएगा.

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लेंसकार्ट ने X पोस्ट कर की बड़ी घोषणा

प्रीमियम आई-वियर कंपनी लेंसकार्ट ने शनिवार (18 अप्रैल, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया. पोस्ट में कंपनी ने कहा, ‘हमने आपकी बात सुनी है, साफ तौर पर और खुले दिल से. पिछले कुछ दिनों में हमारे समुदाय और ग्राहकों ने अपनी बातें रखी हैं और हमने उसे पूरे ध्यान से सुना है. आज हम अपनी ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ के स्टैंडर्ड को और बढ़ा रहे हैं और उसे सार्वजनिक और पारदर्शी रूप से शेयर भी कर रहे हैं.’

कंपनी ने कहा, ‘इन दिशा-निर्देशों में स्पष्ट और बिना किसी भ्रम के हमारे टीम सदस्यों की आस्था और संस्कृति के हर निशान का स्वागत किया गया है, चाहे वह बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब, पगड़ी हो या अन्य कुछ. इन्हें हमने अपवाद के रूप में नहीं, बल्कि हमारी पहचान के तौर पर स्वीकार किया है.’

भारत में, भारतीयों द्वारा और भारतीयों के लिए बना लेंसकार्ट- Lenskart

कंपनी ने एक्स पोस्ट में आगे कहा, ‘लेंसकार्ट भारत में, भारतीयों द्वारा और भारतीयों के लिए बना है. हमारे 2,400 से ज्यादा स्टोर ऐसे लोगों की ओर से संचालित होते है, जो हर दिन अपने विश्वास, परंपराएं और पहचान अपने साथ काम पर लाते हैं. यह कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसे हम कभी किसी से दरवाजे पर छोड़ने के लिए कहेंगे. अगर हमारे काम की जगह पर किसी भी संवाद के कारण किसी को ठेस पहुंची हो या हमारे किसी टीम सदस्य को ऐसा लगा हो कि उनकी आस्था का यहां स्वागत नहीं है, तो हमें इसका गहरा खेद है. यह लेंसकार्ट की पहचान नहीं है और न ही कभी होगी.’

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