चारधाम यात्रा शुरू होते ही केदारनाथ धाम में एक बार फिर VIP दर्शन का मुद्दा गर्मा गया है. इस बार विवाद तब भड़क गया जब उद्योगपति गौतम अडानी अपनी पत्नी के साथ दर्शन के लिए पहुंचे और जलाभिषेक किया. इसके बाद तीर्थपुरोहितों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया और मामला सीधे सड़कों तक पहुंच गया.
तीर्थपुरोहितों ने किया जोरदार विरोध
मंदिर परिसर में तीर्थपुरोहितों ने एकजुट होकर बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. मुर्दाबाद के नारों के साथ उन्होंने साफ कहा कि VIP गेट तुरंत बंद किया जाए. उनका कहना है कि जब आम श्रद्धालु घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, तो कुछ खास लोगों को सीधे अंदर भेजना गलत है.
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तीर्थपुरोहितों का गुस्सा सिर्फ व्यवस्था पर नहीं, बल्कि उस सोच पर भी है जिसमें भगवान के दरबार में भी भेदभाव दिखाई देता है. उनका कहना है कि आस्था के इस केंद्र में सब बराबर होने चाहिए.
इस पूरे विरोध का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में साफ दिख रहा है कि मंदिर परिसर में नारेबाजी हो रही है और तीर्थपुरोहित काफी नाराज नजर आ रहे हैं. कई श्रद्धालुओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की है. लोगों का कहना है कि अगर VIP दर्शन बंद करने की बात कही गई थी, तो फिर जमीन पर यह व्यवस्था क्यों दिख रही है.
सरकार के दावे पर उठे सवाल
राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से बार-बार कहा गया था कि इस बार चारधाम यात्रा में VIP कल्चर खत्म कर दिया गया है. खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दावा किया था कि आम श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन हो रहे हैं और व्यवस्था पहले से बेहतर है.
लेकिन अब सामने आ रही तस्वीरें और विरोध प्रदर्शन इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि अगर VIP एंट्री बंद है, तो फिर यह व्यवस्था कैसे चल रही है.
इस पूरे विवाद पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने सफाई दी है. उन्होंने कहा कि किसी तरह का VIP दर्शन नहीं हो रहा है और सभी भक्तों को बराबर दर्शन मिल रहे हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग इस मुद्दे को जानबूझकर राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं ताकि चारधाम यात्रा प्रभावित हो.
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कांग्रेस का पलटवार
वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भाजपा के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अगर कोई BKTC अध्यक्ष का विरोध करता है, तो उसे यात्रा विरोध कैसे कहा जा सकता है.
उनका कहना है कि यह विरोध किसी धर्म या यात्रा के खिलाफ नहीं, बल्कि गलत व्यवस्था के खिलाफ है. उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हर आवाज को राजनीति से जोड़ देना सही नहीं है.
VIP दर्शन का मुद्दा हर साल उठता है और कुछ दिनों बाद शांत हो जाता है. लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग दिख रहा है क्योंकि विरोध खुलकर सामने आया है.
