जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों की लगातार फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई. दिल्ली पुलिस ने साफ कहा कि प्रदर्शनकारियों की कोई जासूसी या निगरानी नहीं की जा रही है। जो भी रिकॉर्डिंग होती है. वह सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए होती है.
हर प्रदर्शन की रिकॉर्डिंग होती है – दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच से कहा कि जंतर-मंतर पर लगभग हर दिन कोई न कोई प्रदर्शन होता है. ऐसे में हर प्रदर्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है. उन्होंने कहा कि वहां मौजूद लोग खुद भी बड़ी संख्या में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालते हैं. ऐसे में इसे जासूसी या निगरानी कहना गलत है. उन्होंने इस जनहित याचिका को “लग्जरी लिटिगेशन” तक करार दिया.
दिल्ली हाईकोर्ट ने पूछा- क्या कोई SOP है
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के मजदूर किसान शक्ति संगठन मामले का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या प्रदर्शन और भूख हड़ताल को लेकर कोई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर या तय दिशा-निर्देश हैं. इस सवाल के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई कल के लिए तय कर दी.
पूर्व जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष ने दाखिल की याचिका
यह याचिका जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आयशी घोष ने दाखिल की है. उनका आरोप है कि 20 जून से जंतर-मंतर पर सीजेपी के धरना और भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से प्रदर्शनकारियों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है. इसके लिए प्रदर्शन स्थल पर स्थायी निगरानी टावर लगाया गया है और लगातार फोटो-वीडियो बनाए जा रहे हैं.
‘खाना खाते, आराम करते और इलाज कराते समय भी रिकॉर्डिंग
‘
याचिका में कहा गया है कि निगरानी सिर्फ प्रदर्शन तक सीमित नहीं है. प्रदर्शनकारी जब खाना खाते हैं, आराम करते हैं या मेडिकल सहायता लेते हैं तब भी उनकी रिकॉर्डिंग की जाती है. इससे उनकी निजता का उल्लंघन हो रहा है.
याचिका में लगाए गए आरोप के मुताबिक, निगरानी केवल विरोध प्रदर्शन को रिकॉर्ड करने तक सीमित नहीं है. इसमें खाने, पीने, आराम करने, मेडिकल हेल्प लेने और रोजमर्रा जिंदगी के अन्य पहलुओं जैसी सामान्य व्यक्तिगत गतिविधियों को रिकॉर्ड की जा रही हैं. यह विरोध शिक्षामंत्री के इस्तीफे को लेकर की जा रहा है.
याचिका में दिया गया अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार का हवाला
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिसकर्मियों ने कई छात्र प्रदर्शनकारियों से कहा कि उनकी फोटो और वीडियो उनके माता-पिता और कॉलेज-स्कूल प्रशासन को भेज दी जाएंगी..इससे छात्रों में डर का माहौल बन गया और कई छात्र प्रदर्शन में शामिल होने से हिचकने लगे. याचिका के मुताबिक, यह अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार पर सीधा असर डालता है.
महिला प्रदर्शनकारियों की निजता का भी मुद्दा – याचिकाकर्ता
याचिका में यह भी कहा गया है कि भारी बारिश के दौरान जब पर्याप्त शेड नहीं होने के कारण महिला प्रदर्शनकारी भीगे कपड़ों में वहीं रुकी रहीं. तब भी उनकी फोटो और वीडियो बनाई गईं. इसे महिलाओं की गरिमा और निजता का गंभीर उल्लंघन बताया गया है.
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याचिका में क्या मांग की गई है
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की कथित सामूहिक निगरानी को असंवैधानिक घोषित किया जाए. साथ ही, जब तक सार्वजनिक व्यवस्था को कोई वास्तविक और तात्कालिक खतरा साबित न हो, तब तक प्रदर्शनकारियों की सामूहिक फोटो, वीडियो रिकॉर्डिंग और निगरानी पर रोक लगाने का अंतरिम आदेश दिया जाए.
