Headlines

Explained: जौहर यूनिवर्सिटी विवाद में कूदे सपा नेता! मोहिबुल्लाह से लेकर अखिलेश तक, कैसे बनाया राजनीतिक मुद्दा?


15 जुलाई 2026 को रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को अवैध घोषित कर ध्वस्त करने का आदेश दे दिया. प्राधिकरण का कहना है कि ये 38 इमारतें बिल्डिंग परमिशन के बिना पास कराए बनाई गईं. यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट को 15 दिन का समय दिया गया है. अगर वे खुद इमारतें नहीं गिराते, तो प्रशासन बुलडोजर चलाएगा. इसके खिलाफ समाजवादी पार्टी (SP) ने पूरा मोर्चा खोल दिया है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से लेकर सांसद मोहिबुल्लाह नदवी तक ने इसे ‘राजनीतिक बदला’ करार दिया है. आखिर जौहर यूनिवर्सिटी कैसे बन गई राजनीति हथियार और कौन से नेता चमका रहे राजनीति…

आखिर जौहर कौन थे जिनके नाम की यूनिवर्सिटी पर बवाल मचा है?

मोहम्मद अली जौहर भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, पत्रकार, शिक्षाविद और कवि थे. 10 दिसंबर 1878 को रामपुर रियासत (उत्तर प्रदेश) में जन्मे जौहर ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी की. 1906 में वे मुस्लिम लीग के सदस्य बने और 1917 में मुस्लिम लीग के अध्यक्ष चुने गए. 1923 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे.

1930 में लंदन में पहली गोलमेज कॉन्फ्रेंस में मौलाना जौहर ने अंग्रेजों से कहा था, ‘मैं एक विदेशी देश में मरना पसंद करूंगा, बशर्ते वह आजाद देश हो. अगर तुम हमें भारत में आजादी नहीं दोगे, तो तुम्हें मुझे यहां (लंदन में) एक कब्र देनी होगी.’

जौहर ने ‘द कॉमरेड’ (अंग्रेजी) और ‘हमदर्द’ (उर्दू) अखबार निकाले, जो ब्रिटिश सरकार की आंखों में कांटे की तरह थे. वे जामिया मिलिया इस्लामिया के संस्थापकों में से एक थे. 4 जनवरी 1931 को यरुशलम में उनका निधन हुआ और उन्हें अल-अक्सा मस्जिद के पास दफनाया गया.

अब समझिए कि जौहर यूनिवर्सिटी पर पूरा विवाद क्या है?

यूनिवर्सिटी की स्थापना 2006 में उत्तर प्रदेश विधानमंडल के एक अधिनियम के तहत हुई. आजम खान इसके चांसलर और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के आजीवन अध्यक्ष थे. इसे आजम खान का ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ कहा जाता था.

RDA ने पाया कि यूनिवर्सिटी परिसर में कुल 40 इमारतें हैं, जिनमें से 38 इमारतों का निर्माण बिना स्वीकृत नक्शा पास कराए किया गया. RDA ने इससे पहले नोटिस जारी किया था और 15 दिन का समय दिया था. 15 जुलाई 2026 को सुनवाई के बाद आदेश पारित किया गया.

इसके अलावा लोक निर्माण विभाग (PWD) ने यूनिवर्सिटी परिसर से गुजरने वाली करीब 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क को सार्वजनिक मार्ग घोषित कर दिया.

कौन से सपा नेता इस मामले में राजनीति चमका रहे?

  • मोहिबुल्लाह नदवी (सपा सांसद): 18 जुलाई 2026 को रामपुर के सपा सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर पहुंचे. वह अखिलेश यादव का संदेश लेकर आए थे, लेकिन नदवी को यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर ही रोक दिया गया. करीब 30 मिनट तक कार में इंतजार करने के बाद भी अंदर जाने की इजाजत नहीं मिली. नदवी ने कहा, ‘हम नहीं चाहेंगे कि यूनिवर्सिटी का प्लास्टर तक गिरे.’
  • अखिलेश यादव (सपा अध्यक्ष): अखिलेश यादव ने सबसे पहले 19 जुलाई 2026 को छात्रों और अभिभावकों के नाम एक खुला खत जारी किया. अखिलेश ने लिखा, ‘प्रिय छात्रों और अभिभावकगण, जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने की युवाओं और उनके अभिभावकों की मुहिम में हम सब पूरी तरह से आपके साथ हैं. बदले की भावना में जल रही बीजेपी सरकार जौहर यूनिवर्सिटी को अपनी राजनीति का शिकार बनाने की कोशिश न करे.’
  • तजीन फातिमा (आजम खान की पत्नी): आदेश जारी होने के बाद आजम खान की पत्नी और पूर्व विधायक डॉ. तजीन फातिमा यूनिवर्सिटी पहुंचीं. उन्होंने परिसर के अंदर तैनात पुलिसकर्मियों को बाहर जाने का आदेश दिया. तजीन ने कहा, ‘हमें पंद्रह दिन का समय दिया गया है. अभी हम और कुछ नहीं कहना चाहते.’
  • आसिम रजा (सपा नगर अध्यक्ष): आजम खान के करीबी और सपा नगर अध्यक्ष आसिम रजा ने पिछले दिनों प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया कि ‘सभी नक्शे पास हैं, कोई नियमों की अनदेखी नहीं है.’ रजा ने कहा, ‘हमारी बातें सुनी गईं, लेकिन उन्हें खारिज करते हुए 10 मिनट के अंदर ही फैसला सुना दिया गया और तुरंत प्रेस रिलीज जारी कर दी गई. इससे पता चलता है कि नतीजा पहले ही तय हो चुका था.’
  • मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी (ऑल इंडिया मुस्लिम जमात): राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कहा, ‘आजम खान की गलती की सजा यूनिवर्सिटी को नहीं दी जानी चाहिए.’

सपा नेताओं ने क्या-क्या मांगें उठाईं? 

सपा नेताओं के सभी बयानों से चार बड़ी बातें सामने आती हैं:

  • इस्तीफे की नहीं, बचाव की बात: सपा नेताओं ने किसी मंत्री के इस्तीफे की मांग नहीं की, बल्कि यूनिवर्सिटी को बचाने की बात की.
  • कागजी खामियों का समाधान: अखिलेश यादव ने कहा कि अगर कागजी कमियां हैं, तो उन्हें पूरा किया जाना चाहिए , न कि पूरी यूनिवर्सिटी को ध्वस्त किया जाए.
  • गरीब छात्रों का भविष्य: सपा नेताओं ने यूनिवर्सिटी को ‘गरीब छात्रों की आखिरी उम्मीद’ बताया.
  • कानूनी लड़ाई: आजम खान का परिवार इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है.

जौहर यूनिवर्सिटी विवाद के कानूनी पहलू क्या हैं?

पूर्व सूचना आयुक्त एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सैयद हैदर अब्बास रिजवी के मुताबिक:

  • लिमिटेशन एक्ट 1963 के तहत अवैध निर्माण पर तीन साल की समय-सीमा है.
  • कुछ परिस्थितियों में 12 साल तक की कानूनी सीमा का जिक्र मिलता है.
  • अगर निर्माण को हुए तीन और 12 साल दोनों से ज्यादा हो गए हैं, तो यह बड़ा कानूनी सवाल है कि प्राधिकरण ने इतने सालों तक कार्रवाई क्यों नहीं की.
  • RDA को कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि ज्यादातर इमारतें सालों पहले बन चुकी हैं.

फिलहाल 15 दिन की समय सीमा के बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन कानूनी रास्ता अपना सकता है. RDA ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल कर दिया है. यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में कोर्ट क्या फैसला सुनाती है, क्योंकि हजारों छात्रों का भविष्य इसी पर टिका है.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *