बांग्लादेश के विपक्षी नेता नाहिद इस्लाम ने अपने देश से होकर भारतीय ट्रांजिट कॉरिडोर बनाने के किसी भी कदम के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने दिसंबर में गंगा संधि के खत्म होने से पहले नई दिल्ली के साथ पानी के बंटवारे को लेकर एक निष्पक्ष समझौता करने की मांग की है. ढाका में रैली के दौरान नेशनल सिटीजन पार्टी के नेता ने रहमान सरकार पर कॉरिडोर को बनाने में मदद करने की कोशिश का आरोप लगाया.
बांग्लादेशी अखबार ‘प्रोथोम आलो’ और समाचार वेबसाइट ‘बीडीन्यूज24’ के हवाले से बताया कि नाहिद ने चेतावनी दी है कि अगर गंगा जल-बंटवारा समझौता ऐसी शर्तों के साथ रिन्यू नहीं किया गया, जिससे नदी के पानी में बांग्लादेश का हिस्सा सुरक्षित रहे, तो वे नए सिरे से विरोध-प्रदर्शन करेंगे.
नाहिद इस्लाम ने दी चेतावनी
उन्होंने कहा कि जापान एक बार फिर बांग्लादेश के रास्ते एक कॉरिडोर बनाने की कोशिश कर रहा है. सरकार इस अवैध कॉरिडोर को भारत को सौंपने की कोशिश कर रही है. बीडीन्यूज24 के मुताबिक नाहिद ने कहा, “प्रधानमंत्री तारिक रहमान, हम साफ तौर पर कहना चाहते हैं कि बांग्लादेश की जनता ऐसे किसी भी अवैध कॉरिडोर को स्वीकार नहीं करेगी.”
जापान कब गए थे तारिक रहमान
बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान ने 26 से 29 अक्टूबर तक जापान का दौरा किया था. इस दौरान दोनों देश अपने ‘बे ऑफ बंगाल इंडस्ट्रियल ग्रोथ बेल्ट’ (बंगाल की खाड़ी औद्योगिक विकास क्षेत्र) पहल को एक नई रणनीतिक सहयोग पहल में बदलने पर सहमत हुए. इसका मुख्य फोकस कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने, प्राकृतिक आपदाओं और भू-राजनीतिक जोखिमों के लिए तैयारी करने, आर्थिक विकास के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देने और शांति व स्थिरता के लिए मिलकर काम करने पर होगा.
दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि वे बांग्लादेश को हब मानते हुए बंगाल की खाड़ी क्षेत्र को ‘साझा समृद्धि’ वाले इलाके के रूप में विकसित करने की दिशा में काम करेंगे. इसके अलावा जापान अपनी विकास एजेंसी JICA के जरिए फंड देकर दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश में ‘मातारबारी डीप-सी पोर्ट’ (गहरे समुद्र वाले बंदरगाह) के विकास में भी मदद कर रहा है.
हुमायूं कबीर ने क्या कहा
बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने शुक्रवार को कहा कि रहमान की जापान यात्रा के दौरान किसी तीसरे देश से जुड़े मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई. ‘ढाका ट्रिब्यून’ के अनुसार उन्होंने पत्रकारों से कहा, “हमने बिल्कुल स्पष्ट कर दिया था. किसी तीसरे देश का कोई जिक्र नहीं हुआ. हम वहां बंगाल की खाड़ी पर चर्चा करने नहीं गए थे, क्योंकि बंगाल की खाड़ी सिर्फ हमारी नहीं है.” कबीर ने बताया कि बातचीत मुख्य रूप से बांग्लादेश और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी पर केंद्रित थी.
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