यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति पर काम कर रही है. पहले संगठन की लिस्ट उसके बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल और अब राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन की सूची को देखें तो इसमें बीजेपी अपने पुराने टेस्टेड फॉर्मूले से गैर जाटव दलित और गैर यादव ओबीसी को साधने के फार्मूले पर काम कर रही है. बीजेपी सूत्रों की मानें तो बीजेपी इस फार्मूले के जरिए 2024 लोकसभा में अपने छिटके हुए जनाधार को वापस पाने की कोशिश कर रही है.
बीजेपी संगठन के लिहाज से यूपी को 6 क्षेत्रों में बांटा गया है और राज्यसभा की इस लिस्ट को देखें तो इसमें चार क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व दिया गया है.
काशी क्षेत्र: विद्यासागर सोनकर और राधाकांत ओझा
अवध क्षेत्र: प्रियंका रावत
कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र: गोपी कृष्ण पांडेय और प्रकाश पाल
ब्रज क्षेत्र: रामप्रताप चौहान, धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार
बीजेपी की क्या रणनीति?
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी की रणनीति में अलग-अलग क्षेत्रों के प्रभावशाली सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने के साथ-साथ संगठन के स्तर पर भी इन वर्गों के बीच सक्रियता बढ़ाना शामिल है. बीजेपी के लिए यह रणनीति नई नहीं है. 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी ने गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति अपनाई थी.
चुनाव में मिला फायदा
पार्टी को इसका चुनावी लाभ भी मिला था और दोनों चुनावों में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में बड़ी जीत दर्ज की थी. अब आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी एक बार फिर इसी सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ती नजर आ रही है.
राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन और संगठन में विभिन्न सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने के जरिए पार्टी गैर-जाटव दलित और गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक को अपने साथ बनाए रखने और विस्तार देने की कोशिश कर रही है.
2024 के लोकसभा चुनावों की अगर बात करें तो पासी और कुर्मी वर्ग के मतदाता बीजेपी से खिसक गए थे. लोध मतदाता भी पूरी तरह पार्टी के साथ नहीं दिखे. जिसके चलते बीजेपी को यूपी से लोकसभा में जिस बम्पर सीटों की उम्मीद थी वो ध्वस्त हो गई और केंद्र में अकेले पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने से भी दूर रह गई.
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ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने की कोशिश
अब राज्यसभा की इस लिस्ट के जरिए बीजेपी जहां एक ओर इन वर्गों को साधते हुए दिख रही है. वहीं, 2 ब्राह्मणों को राज्यसभा भेजकर ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने की कोशिश भी करती दिखाई दे रही है. इस से पहले यूपी से पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को भी पार्टी राष्ट्रीय महामंत्री बना चुकी है.
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