गाजा में इजरायल के हमले जारी है. ताजा हमलों में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई है. इसमें 4 साल का मासूम भी शामिल है. वहीं, सात अन्य लोग घायल हुए हैं. यह जानकारी फिलिस्तीन के हेल्थ डिपार्टमेंट के अफसर ने दी है.
अलजजीरा के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने बताया कि हमलों में से एक हमला इलाके के बीच में जवायदा शहर की इमारत पर हुआ है. इससे पहले इजरायली सेना ने लोगों से अपनी संपत्ति और इलाका छोड़कर जाने की चेतावनी दी थी. हेल्थ वर्कर्स ने कहा है कि दर्जनों मीटर दूर तक फैले मलबे और छर्रों से कम से कम 6 लोग घायल हो गए हैं. इनमें 4 साल का मोहम्म अब्देल सलाम ताहा भी शामिल था. इसे बाद में अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया.
विस्थापित फिलिस्तीनी अबू अहमद का कहना है कि सीजफायर जैसा कुछ भी नहीं है. हम समाधान चाहते हैं. हम शांति से रहना चाहते हैं. इसके अलावा हेल्थ अधिकारियों ने बताया कि दूसरा हवाई हमला नुसेइरात शरणार्थी शिविर में हुआ है.
युद्धविराम के बीच इजरायल ने किया यह हमला
युद्ध विराम के बाद इजरायल ने यह हमला किया है. अक्टूबर में अमेरिका समर्थित युद्धविराम ने तबाह इलाके में बड़ी लड़ाई को रोक दिया था. यह इजरायली सेना के हमलों को खत्म करने में विफल रहा था. सेना का कहना था कि इन हमलों का मकसद हमास और गाजा के अन्य उग्रवादियों के हमलों को रोकना था.
इजरायल सेना का दावा- उग्रवादी नेता को मार गिराया
सेना ने शनिवार देर रात एक बयान देते हुए कहा कि उसने देर अल-बलाह शहर में हमास के एक सीनियर उग्रवादी शरीफ अल हसनत को मार गिराया है. वह हमास के भूमिगत बुनियादी ढांचे को बहाल करने की कोशिशों को लीड कर रहा था. हमास का आरोप है कि इजरायल युद्धविराम का उल्लंघन कर रहा है. गाजा संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापक योजना को लागू करने की कोशिशों को कमजोर कर रहा है. इस योजना में इजरायल की वापसी और हमास का निरस्त्रीकरण भी शामिल है. गाजा के अधिकारियों ने बतााय कि पिछले साल अक्टूबर में युद्धविराम लागू होने के बाद से गाजा में 1280 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं. इजरायल का कहना है कि चार इजरायली सैनिक मारे गए हैं.
वेस्ट बैंक में रहते हैं, 30 लाख फिलिस्तीनी और 5 लाख सेटलर्स
वेस्ट बैंक जहां अबतक 30 लाख फिलिस्तीनी और लगभग 5 लाख सेटलर्स रहते हैं. वहां हिंसा और जमीन के संसाधनों को कब्जे में लेने को लेकर बढ़ोतरी देखी गई है. संयुक्त राष्ट्र की संस्थाएं और ज्यादातर देश सैन्य कब्जे से जुड़े इंटरनेशनल लॉ के तहत इन बस्तियों को गैर कानूनी मानते हैं. इजरायल इस बात को नहीं मानता है. वह इस जमीन से अपने बाइबिल और ऐतिहासिक रिश्तों का हवाला देता रहा है.
