Dairy Business Tips: खेती के साथ-साथ आज के समय में किसान डेयरी बिजनेस में भी हाथ आजमा रहे हैं. डेयरी बिजनेस शुरू करने वालों के सामने सबसे पहला सवाल यही रहता है कि आखिर कौन सी भैंस खरीदें, जिससे दूध भी अच्छा मिले और खर्च निकालने के बाद कमाई भी ठीक-ठाक रहे. यहां सिर्फ ज्यादा दूध देने वाली भैंस चुनना काफी नहीं है. पशु की नस्ल, दूध में फैट, खानपान, बीमारी से बचाव, मौसम के साथ एडजस्ट होने की क्षमता और देखभाल का खर्च भी बहुत मायने रखता है.
भारत में भैंस की कई नस्लें हैं, लेकिन डेयरी के लिए मुर्रा का नाम सबसे ज्यादा लिया जाता है. इसके अलावा मेहसाना, जाफराबादी और निली रावी भी अच्छे ऑप्शन हो सकते हैं. बता दें कि किसानों के लिए कोई एक ही नस्ल बेस्ट ऐसा नहीं है. आपके इलाके का मौसम, चारे की उपलब्धता और बजट भी फैसला बदल सकते हैं. इसलिए भैंस खरीदने से पहले सिर्फ उसका शरीर या कीमत न देखें. उसकी पिछली दूध देने की हिस्ट्री और सेहत की जांच करना भी उतना ही जरूरी है.
मुर्रा भैंस है डेयरी के लिए सबसे बढ़िया
डेयरी फार्मिंग की बात आते ही मुर्रा भैंस का नाम सबसे पहले आता है. इसकी वजह इसकी अच्छी दूध देने की कैपेसिटी और दूध में अच्छा फैट माना जाता है. मुर्रा नस्ल की भैंसें हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में मिलती है. लेकिन अब देश के कई राज्यों में इनका पालन किया जा रहा है. आमतौर पर इनका रंग काला होता है और सींग छोटे, मोटे और घुमावदार दिखाई देते हैं.
आपको बता दें कि हर मुर्रा भैंस एक जैसा दूध नहीं देती. दूध की क्वांटिटी उसकी डाइट, उम्र, हेल्थ और देखभाल पर काफी निर्भर करती है. इसलिए सिर्फ मुर्रा नाम देखकर भैंस खरीदना सही नहीं होगा. खरीदते समय भैंस को दूध निकालते हुए देखना बेहतर है. पिछली ब्यात में कितना दूध दिया था, बच्चा कब हुआ था और अभी रोज कितना दूध दे रही है यह भी पता कर लेना काफी जरूरी है.
मेहसाना और जाफराबादी भी दे सकती हैं अच्छा रिटर्न
मुर्रा के अलावा मेहसाना और जाफराबादी जैसी नस्लें भी डेयरी बिजनेस के लिए काम की हो सकती हैं. मेहसाना नस्ल ज्यादातर गुजरात में पाई जाती है और इसे दूध उत्पादन के लिए काफी अच्छा माना जाता है. अगर आपके इलाके में इसका चारा और देखभाल आसानी से हो जाती है तो यह भी एक अच्छा ऑप्शन बन सकती है. जाफराबादी भी गुजरात के सौराष्ट्र इलाके की प्रमुख भैंस नस्लों में शामिल है.
इसका शरीर बड़ा और मजबूत होता है इसलिए इसे रखने के लिए ठीक-ठाक जगह और अच्छी डाइट चाहिए. नीली रावी भी दूध के लिए जानी जाती है और देश के कुछ हिस्सों में इसका पालन किया जाता है. आपको बता दें डेयरी बिजनेस में नस्ल चुनने का कोई एक तय फॉर्मूला नहीं है. जिस नस्ल की भैंस आपके इलाके के मौसम में आसानी से रह सके, चारा आसानी से मिल सके और उसकी देखभाल का खर्च आपके बजट में हो वही आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकती है.
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भैंस खरीदने से पहले इन चीजों को जरूर चेक करें
अगर डेयरी का काम शुरू करने जा रहे हैं तो पशु खरीदने में जल्दबाजी बिल्कुल न करें. सबसे पहले भैंस की सेहत देखें. उसकी आंखें, चाल, शरीर और स्किन नार्मल दिखनी चाहिए. थन में सूजन, चोट या किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए. दूध निकालते समय भी उसकी हालत देखें. भैंस की उम्र और उसने अब तक कितनी बार बच्चा दिया है इसकी जानकारी लें. अगर पिछली ब्यात और दूध उत्पादन की जानकारी मिल जाए तो फैसला लेना आसान हो जाता है.
इसके अलावा आपको यह भी देखना चाहिए कि आपके पास सही मात्रा में चारा, साफ पानी और पशु रखने की सही जगह है या नहीं. गर्मी और बारिश के मौसम में पशुओं को अच्छे शेड और साफ-सफाई की जरूरत पड़ती है. पहली बार डेयरी खोल रहे हैं तो कम पशुओं के साथ शुरूआत करें. इससे ज्यादा खर्चा नहीं होगा इसके बाद में जब काम सही चलने लगे तो आप भैंसों की संख्या बढ़ा सकते हैं.

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