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तेलंगाना कांग्रेस में अंदरूनी कलह! दो मंत्रियों के खिलाफ एक्शन की सिफारिश


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  • तेलंगाना कांग्रेस ने दो वरिष्ठ नेताओं पर कार्रवाई की सिफारिश की।
  • मंत्री सुरेखा को बेटी के बयानों पर पद से हटाने की सिफारिश।
  • चिन्ना रेड्डी पर भी कार्रवाई प्रस्तावित, आलाकमान करेगा फैसला।

तेलंगाना कांग्रेस में अंदरूनी कलह एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है. पार्टी की अनुशासन समिति ने पार्टी अनुशासन तोड़ने के आरोप में दो वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है. सांसद मल्लू रवि की अध्यक्षता वाली TPCC अनुशासन समिति ने अपनी रिपोर्ट में पार्टी-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण एंडोमेंट्स मंत्री कोंडा सुरेखा को कैबिनेट से हटाने और योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष जी. चिन्ना रेड्डी को उनके पद से हटाने की सिफारिश की है.

रिपोर्ट तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) के अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ और AICC तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन को भेज दी गई है और अब अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान को लेना है.

कब शुरू हुआ पूरा विवाद?

विवाद तब शुरू हुआ, जब सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल ने वारंगल जिले के परकल में अपनी मां के जन्मदिन के जश्न के दौरान मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और उनके परिवार के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की. सुष्मिता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री उन लोगों को भूल गए हैं जिन्होंने उनके राजनीतिक उदय में मदद की थी और उन पर शेल कंपनियों के जरिए राज्य को लूटने का आरोप भी लगाया.

मुख्यमंत्री पर आरोप लगाने के लिए TPCC अनुशासन समिति ने सुरेखा को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनकी बेटी की टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण मांगा. हालांकि, समिति उनके जवाब से संतुष्ट नहीं थी. सुरेखा का कहना था कि उन्हें अपनी बेटी के निजी विचारों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए और उन्होंने नोटिस वापस लेने की मांग की. 

मंत्री के स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुआ पैनल

वीडियो क्लिप और स्पष्टीकरण की जांच के बाद समिति इस नतीजे पर पहुंची कि सुरेखा की गलती यह थी कि मुख्यमंत्री की कैबिनेट में मंत्री होने के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की टिप्पणियों की निंदा नहीं की. सूत्रों के मुताबिक, पैनल का मानना था कि पार्टी की एक वरिष्ठ नेता के तौर पर उन्हें तुरंत इन आरोपों से खुद को अलग कर लेना चाहिए था और ऐसा न कर पाना अनुशासन का गंभीर उल्लंघन माना गया.

मल्लू रवि ने सवाल उठाया कि जब पार्टी, सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ टिप्पणियां की जा रही थीं, तो सुरेखा चुप क्यों रहीं. समिति ने मौजूदा विधायक के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी करने के लिए चिन्ना रेड्डी के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की और पैनल ने इसे पार्टी अनुशासन का उल्लंघन माना.

विवाद के बाद अनुशासन पालन को लेकर बहस तेज

अब उम्मीद लगाई जा रही है कि आलाकमान इन सिफारिशों पर अंतिम फैसला लेगा, जिससे तेलंगाना कांग्रेस में अनुशासन का माहौल तय हो सकता है. ऐसी अटकलें हैं कि आलाकमान सुरेखा को कैबिनेट से हटाने पर विचार कर सकता है और उनकी जगह लेने वाले संभावित नेताओं पर पहले से ही चर्चा चल रही है.

इस विवाद ने पार्टी के भीतर ‘पुराने बनाम नए’ गुटों के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है. विधायकों का एक गुट मुख्यमंत्री के समर्थन में एकजुट हो गया है और असंतुष्ट नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है. इस ताजा घटनाक्रम ने अनुशासन के एक समान पालन को लेकर भी बहस तेज कर दी है, खासकर वरिष्ठ नेताओं और नए सदस्यों के बीच. 

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