प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से दिए गए दिमागी नक्सल वाले बयान को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है. पीएम मोदी ने जंगलों में हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि अब दिमागी नक्सल से सावधान रहने की जरूरत है. उन्होंने ऐसे तत्वों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने और युवाओं को विकसित भारत के निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने की अपील की. पीएम के इस बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया है. वहीं, राहुल गांधी के लाल किले पर आयोजित आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में नहीं पहुंचने को लेकर बीजेपी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा है.
जयराम रमेश का पलटवार- पहले अर्बन नक्सल कहा, फिर मांगें स्वीकार कीं
पीएम मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि दो-तीन साल पहले प्रधानमंत्री अपने राजनीतिक विरोधियों को अर्बन नक्सल कहते थे. उस समय संसद में सवाल पूछा गया था कि अर्बन नक्सल की परिभाषा क्या है.
जयराम रमेश ने कहा कि गृह मंत्री की ओर से जवाब दिया गया था कि अर्बन नक्सल कोई चीज नहीं है और इसकी कोई परिभाषा नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि अब प्रधानमंत्री लाल किले से अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए दिमागी नक्सल जैसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं.
जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाकर कांग्रेस ने पीएम पर साधा निशाना
जयराम रमेश ने कहा कि जिन मुद्दों को प्रधानमंत्री की सोच में अर्बन नक्सल से जोड़ा जाता था, बाद में सरकार ने उन्हीं मांगों को स्वीकार किया. उन्होंने जातिगत जनगणना का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले जातिगत जनगणना की मांग को अर्बन नक्सल सोच बताया गया, लेकिन करीब एक साल पहले सरकार ने जाति आधारित जनगणना की घोषणा की.
उन्होंने कहा, “पहले आप गाली दें, अर्बन नक्सल कहें, दिमागी नक्सल कहें, लेकिन बाद में जो आपके राजनीतिक विरोधी कह रहे हैं, उनकी मांगों को मानें.” जयराम रमेश ने यह भी कहा कि 12 साल बाद भी प्रधानमंत्री के राजनीतिक भाषण में कोई नई बात नहीं थी.
वंदे मातरम् पर भी जयराम रमेश ने रखी कांग्रेस की बात
जयराम रमेश ने वंदे मातरम् को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि 1937 में कलकत्ता में 28 अक्टूबर को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक हुई थी. उनके मुताबिक गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने सलाह दी थी कि कांग्रेस की बैठकों में वंदे मातरम् की शुरुआती कुछ पंक्तियों का गायन किया जाए.
राहुल गांधी के लाल किले नहीं पहुंचने पर BJP का हमला
पीएम मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान के बीच राहुल गांधी के स्वतंत्रता दिवस के आधिकारिक समारोह में शामिल नहीं होने को लेकर भी सियासत तेज हो गई है. लाल किले पर आयोजित समारोह में सभी प्रमुख केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे. इनमें गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल रहे. इसके अलावा भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा तथा शक्तिकांत दास भी कार्यक्रम में मौजूद रहे.
BJP ने कहा- राहुल गांधी का नजरिया दिमागी नक्सल इकोसिस्टम जैसा
राहुल गांधी के समारोह में नहीं पहुंचने पर बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने तीखा हमला बोला. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि राहुल गांधी लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोई देशभक्त नेता प्रतिपक्ष या सार्वजनिक पद पर बैठा व्यक्ति इस तरह स्वेच्छा से आधिकारिक समारोह से अनुपस्थित रह सकता है?
प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का समारोह से दूर रहना वंदे मातरम् के प्रति उनकी कथित नफरत को दर्शाता है. उन्होंने राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए अयोग्य बताते हुए कहा कि उनका नजरिया दिमागी नक्सल इकोसिस्टम जैसा है. बीजेपी ने दावा किया कि यह लगातार दूसरा साल है, जब राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे लाल किले पर आयोजित आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए.
गिरिराज सिंह बोले- NEET प्रदर्शन में भी कई अर्बन नक्सल थे
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी दिमागी नक्सल और अर्बन नक्सल को लेकर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि NEET के दौरान हुए प्रदर्शन में भी कई अर्बन नक्सल मौजूद थे. उन्होंने दावा किया कि यही लोग नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के दौरान भी सक्रिय थे. गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि ऐसे लोग देश के विकास के सबसे बड़े विरोधी हैं.
‘दिमागी नक्सल’ से सावधान रहने की जरूरत’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि जंगलों में हथियारबंद नक्सलवाद को खत्म करने में सफलता मिली है, लेकिन अब दिमागी नक्सल से सावधान रहना होगा. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करना जरूरी है. पीएम मोदी ने कहा कि नक्सलवाद और माओवाद ने लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया. इस हिंसा ने अनेक माताओं से उनके बेटे छीन लिए और कई परिवारों के सपनों को चूर-चूर कर दिया.
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद ने चार दशक तक देश के बड़े हिस्से को अपनी गिरफ्त में रखा और संविधान की धज्जियां उड़ाईं. प्रधानमंत्री के मुताबिक इस संघर्ष में 3,500 से अधिक सुरक्षाकर्मी शहीद हुए, जबकि युद्ध में भी इतने सैनिकों की मौत नहीं होती.
2014 में संकल्प लिया, आज नक्सलवाद आखिरी सांस ले रहा है
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2014 में जब उनकी सरकार को देश की सेवा करने का अवसर मिला, तब नक्सलवाद से देश को मुक्त कराने का संकल्प लिया गया. उन्होंने कहा, “आज खुशी है कि नक्सलवाद के पास आखिरी सांस लेने की भी ताकत नहीं रही.” पीएम ने कहा कि जिन इलाकों में कभी नक्सलवादियों की गोलियां चलती थीं, वहां आज नक्सलवाद से मुक्ति के बाद विकास, विश्वास और प्रयास का तिरंगा लहरा रहा है. हालांकि, उन्होंने इस चुनौती को कमतर नहीं आंकने की चेतावनी देते हुए सतर्क रहने की जरूरत बताई.
पीएम बोले- दिमागी नक्सल मौके की तलाश में
प्रधानमंत्री ने कहा कि माओवादी सोच वाले लोग कभी सत्ता के गलियारों में बैठे थे और सरकारी समितियों में सलाहकार के रूप में रहकर नीतियों को प्रभावित करते थे. उन्होंने कहा कि जंगलों में हथियारी नक्सल के खिलाफ सफलता मिली है, लेकिन अब दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं. पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि ऐसे तत्व हिंसा और अराजकता के रास्ते तलाश रहे हैं और समाज को गलत दिशा में ले जाने के लिए तरह-तरह के दांव चल रहे हैं. उन्होंने कहा कि दिमागी नक्सल की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करना होगा और युवाओं को विकसित भारत के निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना होगा.
