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दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर डालें अपने पुराने कपड़े, रीसाइकिल कर रहा DMRC


अगर आपके घर में भी ऐसे कपड़े रखे हैं जिन्हें अब कोई इस्तेमाल नहीं करता, तो उन्हें फेंकने के बजाय दिल्ली मेट्रो के अरपन सेन्ट्रों तक पहुंचाया जा सकता है. दिल्ली मेट्रो की इस पहल के तहत पुराने कपड़ों को दोबारा इस्तेमाल करने के साथ-साथ उन्हें नए उपयोगी सामान में बदला जा रहा है. अब तक करीब 4 हजार लोग इस अभियान से जुड़ चुके हैं. 

दिल्ली मेट्रो के 10 अरपन  सेन्ट्रों  पर 31 अगस्त तक 41,181 किलो से अधिक पुराने कपड़े जमा किए जा चुके थे. यह कपड़े करीब 3,940 लोगों ने दिए हैं. इन कपड़ों को उनकी स्थिति के अनुसार अलग किया जाता है और फिर उन्हें तुरंत इस्तेमाल, अपसाइक्लिंग या रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है.

पुराने कपड़ों से बन रहे बैग और गलीचे

जमा किए गए कपड़ों का एक हिस्सा सीधे कचरे में भेजने के बजाय नए सामान बनाने में इस्तेमाल हो रहा है. करीब 4,266 किलो सामग्री को री-यूज या अपसाइक्लिंग के लिए रखा गया है. स्वयं सहायता समूह इन कपड़ों से बैग, पाउच, गलीचे, फोल्डर, की-रिंग और तोरण जैसे सामान तैयार कर रहे हैं.

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पुराने कपड़ों से हुई 27 हजार रुपयों से ज्यादा की बिक्री

यह पहल सिर्फ कपड़े जमा करने तक सीमित नहीं है. उनसे तैयार किए गए उत्पादों को अरपन केंद्रों पर प्रदर्शित करने के साथ बेचा भी जा रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इन उत्पादों की बिक्री से अब तक 27,036 रुपये की राशि प्राप्त हुई है. वहीं करीब 29,424 किलो कपड़े रीसाइक्लिंग के लिए भेजे जा चुके हैं.

इन केंद्रों पर सबसे ज्यादा कपड़े पहुंचे

10 सेनट्रों में डॉ.बाबा साहेब आंबेडकर अस्पताल मेट्रो स्टेशन पर सबसे अधिक 9,861 किलो से ज्यादा कपड़े जमा हुए. इसके बाद शालीमार बाग सेंटर पर करीब 9,761 किलो कपड़े पहुंचे. पंजाबी बाग वेस्ट और शाहदरा सेंटर पर भी बड़ी मात्रा में पुराने कपड़े जमा करने वाले सेंटर में शामिल रहे. 

2027 में 10 और केंद्र खोलने की तैयारी

दिल्ली में पुराने कपड़ों के इस कलेक्शन नेटवर्क को आगे बढ़ाने की भी योजना बनाई जा रही है. जनवरी 2027 में 10 और अरपन केंद्र शुरू किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है. इनमें INA,राजेंद्र प्लेस,जनकपुरी वेस्ट, राजौरी गार्डन,ग्रेटर कैलाश,मॉडल टाउन और द्वारका सेक्टर-10 के साथ अन्य मेट्रो स्टेशन शामिल हैं.

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