यूरोप जंगल की आग के सबसे विनाशकारी दौर से गुजर रहा है. फ्रांस, स्पेन और ग्रीस में लगी भीषण आग की वजह से बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ रहा है और पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है.

3.3 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं. इनमें फ्रांस में लगभग 2.2 लाख और स्पेन में 1.1 लाख से ज्यादा लोग शामिल हैं. यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप में लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने का सबसे बड़ा अभियान है.

वैज्ञानिकों का ऐसा कहना है कि 42 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान और महीनों के भीषण सूखे ने जंगलों को सुखा दिया है. इससे एक छोटी सी चिंगारी भी तेजी से फैलने वाली और बेकाबू आग भड़का सकती है.

आग वाली कुछ जगहों पर पायरोक्यूम्यलोनिम्बस नाम के शक्तिशाली फायर क्लाउड बने हैं. इनसे तेज हवाएं और बिजली कड़कने जैसी स्थितियां पैदा होती हैं. इससे आग काफी कम समय में नए इलाकों में फैल जाती है.

हालांकि आग अक्सर बिजली गिरने, बिजली की लाइनों में खराबी या फिर मशीनों से निकलने वाली चिंगारी की वजह से लगती है लेकिन खराब मौसम की वजह से यह घटना तेजी से बड़ी आपदा में बदल जाती है.

फ्रांस का गिरोंडे इलाका, स्पेन में मैड्रिड के आसपास के इलाके और ग्रीस का क्रेते द्वीप सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. यहां जंगलों को काफी ज्यादा भारी नुकसान पहुंचा है और लोगों को आपातकालीन स्थिति में सुरक्षित जगहों पर ले जाना पड़ा है.

तेजी से फैल रही आग पर काबू पाने के लिए यूरोपीय संघ ने बड़े पैमाने पर आपातकालीन कदम उठाए हैं. आग बुझाने वाले विमान, हेलीकॉप्टर, सेना की मदद और अंतरराष्ट्रीय बचाव दल को तैनात किया गया है.

आग बुझाने वाले कर्मचारी अब सीधे आग से लड़ने के बजाय लोगों को बचाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. तेज गर्मी, तेज हवा और आग के अनिश्चित व्यवहार की वजह से कई प्रभावित इलाकों में जाना काफी ज्यादा खतरनाक हो गया है.
Published at : 02 Aug 2026 07:24 PM (IST)
