नदियों को चीरेगा, ड्रोन-AI से होगा लैस, लद्दाख की ऊंचाइयों पर ड्रैगन को पटखनी देगा भारत का ‘जोरावर’, जानें क्या-क्या खासियत


अपने गृह प्रदेश गुजरात के दो दिवसीय दौरे पर सूरत गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले एलएंडटी के प्लांट पहुंचकर भारतीय सेना के सबसे नए टैंक जोरावर के निर्माण कार्य का जायजा लिया. डीआरडीओ की मदद से बने इन बेहद लाइट टैंक को अगले साल यानी 2027 तक कंपनी को बनाकर सेना को सौंपना है और चीन सीमा पर तैनात किया जाना है.

बड़ी प्राइवेट डिफेंस कंपनी L&T का प्लांट सूरत के करीब हजीरा में है. ये वही प्लांट है, जहां भारतीय सेना के लिए दक्षिण कोरिया की मदद से K-9 तोपों का निर्माण हुआ है और एलओसी से लेकर एलएसी तक पर तैनात हो चुकी हैं. वर्ष 2019 में पीएम मोदी ने इसी प्लांट में के-9 तोप की राइड भी की थी. अब इसी प्लांट में डीआरडीओ यानी डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन की मदद से तैयार किए गए बेहद हल्के टैंक जोरावर का निर्माण चल रहा है. इन टैंकों को बेहद उंचाई वाले इलाकों में तैनात करने के लिए सेना के लिए तैयार किया जा रहा है. खास तौर से पूर्वी लद्दाख में तैनात करने के लिए इन जोरावर टैंक को तैयार किया जा रहा है. 

पहाड़ों पर आसानी से चढ़ जाएगा ‘जोरावर’

वर्ष 2020 में गलवान घाटी की झड़प के दौरान, सेना को चीन के K-15 लाइट टैंक का काउंटर करने के लिए कोई हल्का टैंक नहीं था. ऐसे में सेना ने पुराने टी-90 और टी-72 टैंकों को पूर्वी लद्दाख में तैनात किया था. लेकिन इन टैंक्स को 14-16 हजार किलोमीटर की उंचाई पर तैनात करने के लिए सेना को भारतीय वायुसेना की मदद से बेहद मुश्किल का सामना करना पड़ा था. ऐसे में सेना को किसी लाइट टैंक की जरूरत थी.

वर्ष 2024 में डीआरडीओ ने इस जोरावर टैंक का प्रोटो वर्जन भी दुनिया के सामने प्रदर्शित किया था. जानकारी के मुताबिक, जोरावर के फिलहाल, राजस्थान के रेगिस्तान से लेकर लद्दाख के बेहद ठंडे इलाकों में ट्रायल चल रहे हैं. डीआरडीओ के मुताबिक, अगले साल यानी 2027 तक भारतीय सेना को पूर्वी लद्दाख में तैनात करने ले लिए ये टैंक मिल जाएगा. ऐसे में सूरत के करीब हजीरा में इसका प्रोडक्शन तेजी से चल रहा है. यही वजह है कि पीएम मोदी ने हजीरा पहुंचकर इस टैंक के निर्माण-कार्यों की समीक्षा की. इसके लिए एलएंडटी द्वारा तैयार किए जा रहे FICV यानी Furitistic Infantry Combat Vehicles के बारे में भी पीएम मोदी ने कंपनियों के अधिकारियों से खास बात की.

एआई और एंटी एयरक्राफ्ट गन से लैस होगा ‘जोरावर’

दूसरे मेन बैंटल टैंक के मुकाबले जोरावर काफी हल्का टैंक है. डीआरडीओ के मुताबिक, जोरावर टैंक मात्र 25 टन का है, जो भारत के मौजूदा टैंक यानी टी-90 इत्यादि से मात्र आधा है. इन टैंक का वजन करीब 50 टन होता है. जोरावर टैंक में एंटी एयरक्राफ्ट गन के साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तकनीक सहित ड्रोन टेक्नोलॉजी से भी लैस होगा. टैंक में ATGM- एंटी टैंक गाईडेड मिसाइल, 7.62 एमएम गन और एक 12.7 रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम भी है.

जोरावर, एक ‘एम्फीबियस’ प्लेटफॉर्म है जो नदी-नालों को आसानी से पार कर सकेगा. दो-तीन साल पहले एक एक्सरसाइज के दौरान, भारतीय सेना का एक टैंक पूर्वी लद्दाख की एक नदी को पार करते समय डूब गया था, जिसके कारण पांच सैनिकों की जान चली गई थी. लेकिन जोरावर टैंक को नदी की बेहद तेज धारा को पार करने के लिए तैयार किया जा रहा है. फील्ड ट्रायल के दौरान सेना ने जो अपनी जरूरतों की मांग की है, उसे भी इस टैंक में शामिल किया जा रहा है.

किसके नाम पर रखा गया टैंक का नाम?

भारतीय सेना ने लाइट टैंक का नाम 19वीं सदी के डोगरा मिलिट्री जनरल जोरावर सिंह के नाम पर दिया है, जिन्होंने तिब्बत में जाकर चीनी सेना को पटखनी दी थी. डीआरडीओ के मुताबिक, जोरावर के ट्रायल पूरा होन के बाद रक्षा मंत्रालय और थलसेना अधिग्रहण यानी खरीदने की प्रक्रिया शुरू करेगी.

शुरुआत में भारतीय सेना ने 59 लाइट टैंक का ऑर्डर देने का प्लान तैयार किया है. हालांकि, सेना को कुल 354 ऐसे लाइट टैंक की जरूरत है. साफ है कि भले चीन के साथ भारत के संबंध सुधर रहे हैं, लेकिन भारतीय सेना ने चीन से सटी एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर अपनी तैयारियों को मजबूत करने में जुटी है. यही वजह है पीएम मोदी ने हजीरा पहुंचकर जोरावर टैंक के प्रोडक्शन की जानकारी खुद कंपनी के अधिकारियों से हासिल की.

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