हाल ही में नीट पीजी 2026 का रिजल्ट जारी किया गया था. वहीं रिजल्ट जारी होने के बाद एक बार फिर क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल को लेकर बाहर शुरू हो गई है. दरअसल NBEMS की ओर से जारी रिजल्ट में इस बार 2,63,535 उम्मीदवार क्वालीफाई हुए. वहीं परीक्षा देने वाले 258 उम्मीदवारों के अंक जीरो या उससे भी कम रहे. वहीं सबसे कम स्कोर वाले उम्मीदवारों का अंक -59 बताया गया है और पर्सेंटाइल जीरो रहा है. ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या पिछले कुछ वर्षों की तरह इस बार भी 0 पर्सेंटाइल या नेगेटिव स्कोर वाले उम्मीदवारों को काउंसलिंग में शामिल होने का मौका मिल सकता है.
नीट पीजी के क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल को पहली बार 2023 में कोविड-19 के बाद घटाकर 0 किया गया. इसके चलते बहुत कम और नेगेटिव स्कोर वाले उम्मीदवार भी काउंसलिंग प्रक्रिया में आने की योग्य हो गए थे. बाद में 2025 में भी कटऑफ में बड़ी कटौती की गई. जनरल और ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल 50 से घटाकर 7 किया गया, जबकि एससी-एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए इसे 40 से घटाकर 0 कर दिया गया. वहीं जनरल, पीडब्ल्यूबीडी उम्मीदवारों के लिए यह 45 से घटाकर 5 पर्सेंटाइल किया गया. इसी बदलाव के बाद -40 अंक हासिल करने वाले रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवार भी तीसरे राउंड में काउंसलिंग में शामिल हो सके. इस कटौती के पीछे बड़ी वजह पीजी सीटों का खाली रहना था. NBEMS ने अदालत में कहा था कि देशभर में 18 हजार से ज्यादा पीजी मेडिकल सीटें खाली थी और उन्हें भरने के लिए क्वालीफाइंग मानदंड में बदलाव किया गया.
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल घटाने के फैसले पर मेडिकल क्षेत्र के एक हिस्से ने सवाल उठाए. फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें सरकार और NBEMS से जवाब मांगा. याचिकाकर्ताओं ने कट ऑफ कम करने को संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 से जोड़ते हुए आपत्ति जताई. UDFA ने भी 0 पर्सेंटाइल के फैसले का विरोध किया था. संगठन का तर्क था कि बहुत कम या नेगेटिव स्कोर वाले उम्मीदवारों को पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल ट्रेनिंग में एडमिशन देने से मेडिकल एजुकेशन के स्तर और आगे चलकर मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं.
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दिल्ली हाईकोर्ट भी कर चुका है दखल से इनकार
0 पर्सेंटाइल के खिलाफ जनवरी 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट में भी मामला पहुंचा था. कोर्ट ने क्वालीफाइंग क्राइटेरिया कम करने के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया था. अदालत के सामने पब्लिक हेल्थ रिस्क और मेडिकल स्टैंडर्ड में गिरावट से जुड़े तर्क भी रखे गए थे, लेकिन कोर्ट ने फैसले की प्रक्रिया में ऐसी गड़बड़ी नहीं मानी. इसके आधार पर चल रही काउंसलिंग में हस्तक्षेप किया जाए. एनएमसी की ओर से यह भी कहा गया था कि काउंसलिंग में ज्यादा रैंक वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिलती है.
इस बार कितनी है पीजी की सीटें?
एनएमसी की ओर से जारी सीट मैट्रिक्स के अनुसार इस साल देश में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल की कुल 58,000 सीटें हैं, जो पिछले साल 52,173 थी. वहीं इस बार 2,73,096 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था और 2,65,980 में परीक्षा दी. सीटों के व्यापक आंकड़ों में 33,088 सरकारी, 21,892 प्राइवेट और 8,197 यूनिवर्सिटी की सीटें भी शामिल है.
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