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UP राज्यसभा चुनाव: अखिलेश यादव का सरेंडर या ब्लफ! सपा ने क्यों नहीं उतारा तीसरा कैंडिडेट?


उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव के बीच समाजवादी पार्टी का तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारना कई महीने में सियासी चाल के तौर पर देखा जा रहा है. पार्टी ने प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी के बाद तीसरे उम्मीदवार के नाम को लेकर लगातार चर्चा चल रही थी. सपा के पास दो उम्मीदवारों को जीतने के बाद बचे वोट के कारण माना जा रहा था कि पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारकर एनडीए के खेमे में सेंध लगाएगी. हालांकि अखिलेश यादव आखिर मौके कर तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला लिया. अब सवाल यह भी है कि यह सपा चीफ का सरेंडर है या बीजेपी के लिए ब्लफ गेम?

वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा ने बताया कि समाजवादी पार्टी के पास तीसरा प्रत्याशी उतारने के लिए कई कारण थे. अगर सपा तीसरा उम्मीदवार उतारती तो राज्यसभा चुनाव का पूरा गणित बदल जाता. जो उम्मीदवार आसानी से चुने जा सकते हैं फिर उनके बीच कड़ा मुकाबला हो जाता. दोनों खेमों में क्रॉस वोटिंग होती. इसका असर सिर्फ राज्यसभा चुनाव ही नहीं बल्कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिलता. 

तीसरा उम्मीदवार उतारते तो क्या होता?

योगेश मिश्रा के मुताबिक अगर सपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतरती तो सपा बीजेपी के कुछ विधायकों को अपने पाले में लाने की कोशिश करती. दूसरी तरफ बीजेपी भी सपा के विधायकों में सेंध लगाने की कोशिश करती. ऐसे में क्रॉस वोटिंग का खतरा दोनों दलों के सामने रहता. ऐसे में अखिलेश यादव ने इस स्थिति को टालना ज्यादा उचित समझा. क्योंकि अगर मुकाबला होता और सपा के विधायक टूटते तो विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए दिक्कते बढ़ सकती थी.

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वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला ने बताया कि समाजवादी पार्टी के पास जो एक्स्ट्रा (अतिरिक्त) वोट बच रहे थे, उसके आधार पर तीसरा उम्मीदवार उतारने की चर्चा थी. विधायकों के साथ इसको लेकर एक दिन पहले बैठक भी हुई थी. ऐसा माना जा रहा था कि यदि समाजवादी पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारती, तो एनडीए खेमे में और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) जैसे सहयोगियों के बीच हलचल मच सकती थी.

उन्होंने कहा कि तीसरे उम्मीदवार को न उतारने के कयास लगाने वाले लोगों और खासतौर पर एनडीए खेमे के लिए यह एक हैरान करने वाला फैसला था, क्योंकि इससे गठबंधन में सेंध लगने की बड़ी आशंकाएं थीं. समाजवादी पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारती और थोड़ी भी मशक्कत करती, तो भले ही नतीजा कुछ भी होता, लेकिन एनडीए खेमे में खासी खलबली मच जाती और एक बड़ा राजनीतिक संदेश जाता.

‘सत्ता पक्ष मजबूत स्थिति में रहती है’

वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला सुविधा ने बताया कि समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा में टिकट देने के मामले में पहला चौंकाने वाला काम धनराज नाथवानी को उम्मीदवार बना कर किया था. वही एक दम से तीसरे उम्मीदवार को न उतारकर उन्होंने वैसा ही चौंकाने वाला कदम उठाया है. अखिलेश यादव यदि तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारते, तो चुनाव का समीकरण पूरी तरह बदल जाता. चुनाव होने पर आमतौर पर सत्ता पक्ष मजबूत स्थिति में रहता है. इस स्थिति में अखिलेश यादव और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) दोनों के ही कुछ विधायक टूट सकते थे.



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