नेता जेल से बाहर हैं. अब CJP के सामने सवाल बड़ा है, रिहाई से मिली चर्चा को क्या वह फिर आंदोलन की ताकत बना पाएगी? सौरव दास, आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके के बाहर आने से संगठन को राहत मिली है. लेकिन SIR के मुद्दे पर दबाव बनाना और अपनी मांगें मनवाना अभी बाकी है. नवंबर की ग्रहस्थितियां इसी कोशिश के साथ नेतृत्व और साख की परीक्षा के संकेत देती हैं.
कानूनी मुश्किलें भी खत्म नहीं हुई हैं. दास और रांका की रिहाई के बाद जांच जारी है. उन्हें सुनवाई में उपस्थित होने और शांति बनाए रखने की शर्तें माननी हैं. जंतर-मंतर दोबारा अधिकृत प्रदर्शन स्थल बनने तक वहां प्रदर्शन नहीं बुलाने का लिखित भरोसा भी दिया गया है. ऐसे में अगला अभियान तय करते समय संगठन को इन शर्तों का ध्यान रखना होगा.
16 मई 2026 नई दिल्ली की कुंडली में CJP का मकर लग्न और वृषभ का चंद्रमा है. कुंडली में पूरे नवंबर सूर्य-गुरु-शनि का समय है. कुंडली में प्रयास जारी रखने का आधार मिलता है, लेकिन आसान राजनीतिक सफलता का संकेत कमजोर है.
लग्नेश शनि तीसरे भाव में है. यह संपर्क, अभियान और लगातार मेहनत से जुड़ा भाव है. अपनी राशि में बैठा मंगल संगठन को चुनौती देने की क्षमता देता है. इसलिए नेताओं के पीछे हटकर पूरी तरह शांत हो जाने की व्याख्या नहीं बनती. कार्यकर्ताओं को जोड़ने और नए तरीके से मुद्दा उठाने की कोशिश हो सकती है.
दबाव का पक्ष भी मौजूद है. सूर्य आठवें भाव का स्वामी है. गुरु प्रयास के साथ खर्च से जुड़े भाव का भी स्वामी है. इनका प्रभाव नेतृत्व को फैसले बदलने, संसाधन संभालने और कानूनी तैयारी पर ध्यान देने की जरूरत दिखाता है. केवल आक्रामक बयान संगठन को आगे नहीं पहुंचाएंगे.
1 से 12 नवंबर के बीच पुराने मुद्दे और दस्तावेज फिर केंद्र में आ सकते हैं!
बुध वक्री रहेगा. इसे केवल नुकसान का संकेत समझना अधूरा होगा. जन्मचंद्रमा से छठे भाव में उसकी स्थिति पुराने तर्कों की समीक्षा और जवाब तैयार करने का अवसर भी देती है. हालांकि अलग-अलग नेताओं के विरोधाभासी बयान संदेश कमजोर कर सकते हैं.
12 से 16 नवंबर के बीच महत्वपूर्ण बदलाव होंगे
मंगल 12 नवंबर को सिंह में प्रवेश करेगा. गणना में बुध 13 नवंबर और शुक्र 14 नवंबर को मार्गी होते हैं. इससे रुकी बातचीत या अभियान की तैयारी आगे बढ़ने की संभावना बनती है. लेकिन मंगल और गुरु लग्न से आठवें भाव में होंगे. नई सक्रियता के साथ अचानक अड़चन या विवाद का जोखिम भी रहेगा.
16 नवंबर को सूर्य वृश्चिक में जाकर लग्न से ग्यारहवें भाव में पहुंचेगा. संपर्क और सार्वजनिक पहचान के लिहाज से यह अवसर देता है. लेकिन जन्मचंद्रमा से सूर्य सातवें भाव में होगा. फलदीपिका के गोचर सिद्धांत चंद्रमा से स्थिति भी देखने को कहते हैं. इसलिए इस बदलाव को बड़ी जनलहर का प्रमाण नहीं माना जा सकता.
22 नवंबर के बाद शुक्र अपनी तुला राशि में लौटेगा
लग्न से दसवें भाव की यह स्थिति अभियान की प्रस्तुति और सार्वजनिक मौजूदगी के पक्ष में है. दूसरी ओर चंद्रमा से शुक्र छठे भाव में रहेगा. लिहाजा अवसर के साथ विरोध और मेहनत का पक्ष बना रहेगा.
नवांश में अपनी राशि का शुक्र और दशमांश के दसवें भाव का शुक्र पहचान बनाए रखने के सहायक संकेत हैं. वहीं दशमांश में कमजोर शनि तथा आठवें भाव के मंगल-राहु जल्दबाजी से नुकसान की आशंका जोड़ते हैं.
नवंबर में CJP फिर सक्रिय हो सकती है. महीने के मध्य के बाद नए अभियान की संभावना बढ़ती है. मगर उसकी असली परीक्षा होगी, नेताओं की रिहाई से आगे बढ़कर SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर समर्थकों को कितनी देर जोड़े रख पाती है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
