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ऑपरेशन सिंदूर की हार नहीं पचा पा रहे मुनीर, कहा- ‘पाकिस्तानी सेना भारत को…’


पाकिस्तान में इस वक्त कई मोर्चों पर हिंसक घटनाएं देखने को मिल रही हैं. एक मोर्चे पर सीमा पार अफगानिस्तान के साथ तनाव, दूसरे मोर्चे पर पीओके (PoK) और तीसरे मोर्चे पर बलूचिस्तान में बलूच लोगों के साथ पाकिस्तानी सेना के टकराव की स्थिति बनी हुई है. खैबर पख्तूनख्वा (KPK) प्रांत में वर्तमान स्थिति काफी तनावपूर्ण और अस्थिर बनी हुई है, जिसे लेकर पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने भड़काऊ बयान दिया है. वह अपने ही लोगों का आतंकवादी बताने लगे और आरोप लगाया कि भारत उन लोगों का समर्थन करता है.

इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने बयान जारी कर कहा सीडीएफ आसिम मुनीर ने पेशावर में आर्मी कोर मुख्यालय का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने अलग-अलग क्षेत्र में बढ़ रही अशांति, सीमा से जुड़े मुद्दे और खासकर खैबर पख्तूनख्वा में सेना की टुकड़ियों की तैनाती के बारे में बताया. ISPR को अनुसार मुनीर ने कहा कि पाकिस्तानी सेना आतंकवादियों को कड़ी सजा देगी. इसमें कहा गया कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अधिकारियों को सतर्कता बनाए रखने और खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने का निर्देश दिया.

आर्मी मुख्यालय में मनीर के बिगड़े बोल

आसिम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान निश्चित रूप से आतंकवादियों और उनकी विचारधारा को पूरी तरह से पराजित करेगा. एक दिन पहले सीडीएफ मुनीर ने गवर्नर हाउस में आयोजित खैबर पख्तूनख्वा की उच्च समिति की बैठक में हिस्सा लिया था, जहां प्रांत की पूरी सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई. बैठक की अध्यक्षता कर रहे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि सरकार खैबर पख्तूनख्वा की तरक्की को फिर से पटरी पर लाने की पूरी कोशिश करेगी.

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बीते कुछ दिनों में भीषण हिंसा और आगजनी देखने को मिल रही है. पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई में स्थानीय लोगों की मौत भी हुई है. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हाल की अशांति ने एक बार फिर इस्लामाबाद के साथ इस इलाके के खराब संबंध को सबके सामने ला दिया है.

पीओके में सेना के खिलाफ स्थानीय लोग

पीओके में बीते कई हफ्तों से चल रहे प्रदर्शनों, गिरफ्तारियों और पाबंदियों का नतीजा प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक टकराव के रूप में सामने आया है.सरकार की तरफ से बार-बार कम्युनिकेशन नेटवर्क को अलग किया गया, प्रदर्शन करने वाले लोगों पर लाठी-डंडे बरसाए गए, उन्हें विरोध प्रदर्शन करने से रोका गया और बड़े स्तर पर सेना ने बल का प्रयोग किया.

हालांकि, इन पूरे हालात में यह बात स्पष्ट है कि यह टकराव और गुस्सा किसी एक कारण से नहीं है.इस आंदोलन के केंद्र में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) है. यह व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और सिविल सोसाइटी समूहों का एक गठबंधन है जो बिजली टैरिफ, खाद्य पदार्थों की कीमतों से लेकर सरकारी सुविधाओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक की मांगों को लेकर एकजुट हुआ है.



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