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नेपाल में जलप्रलय के बाद एक्शन में चीन, शी जिपनिंग ने दिए ये आदेश


चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेपाल में आए भीषण भूस्खलन के बाद दक्षिण-पश्चिम चीन के शिजांग (तिब्बत) स्वायत्त क्षेत्र में ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट पर बड़ा राहत अभियान चलाने का आदेश दिया है. 26 अगस्त को सुबह लगभग 10:30 बजे नेपाल की तरफ हुए इस भूस्खलन से कई लोग हताहत और लापता हो गए. राष्ट्रपति शी ने लापता लोगों की तलाश, घायलों के तुरंत इलाज और प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर जोर दिया है.

इसके साथ ही, राष्ट्रपति ने बचाव दल को बेहद सावधानी और सही तकनीकों के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं ताकि दोबारा कोई हादसा न हो. चूंकि इस समय चीन में बाढ़ और तूफानों का खतरा बना रहता है, इसलिए उन्होंने स्थानीय प्रशासन को सबसे खराब स्थितियों के लिए पहले से तैयार रहने और जनता के जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है.

चीनी पीएम ने दिए सख्त निर्देश

इस आपदा पर चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी सख्त निर्देश दिए हैं. उन्होंने लापता लोगों की सटीक संख्या का पता लगाने और विदेश मंत्रालय को पड़ोसी देश के साथ लगातार संपर्क बनाकर जानकारी साझा करने का आदेश दिया है. वहीं, राहत और बचाव कार्यों का जायजा सीधे मौके पर जाकर लेने के लिए उप प्रधानमंत्री झांग गुओकिंग खुद उच्च अधिकारियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे हैं.

फिलहाल, तिब्बत की स्थानीय सरकार और राहत एजेंसियां पूरी ताकत के साथ मौके पर लापता लोगों की तलाश और घायलों की मदद करने में जुटी हुई हैं.

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नेपाप में आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक 95 लोगों के शव बरामद हो चुके है, जबकि 500 से ज्यादा लापता हैं. इसमें 105 भारतीय भी शामिल हैं. इस भीषण आपदा में भारत ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया है. भारतीय वायुसेना का एक C-130J विमान 10 टन जरूरी राहत सामग्री और दवाइयां लेकर नेपाल रवाना हुआ. बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आने वाले समय में C-17 और C-130 विमानों के जरिए और भी राहत सामग्री भेजी जाएगी. साथ ही लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और बचाने के काम के लिए हेलिकॉप्टरों को भी तैयार रखा गया है.

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