AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. नेहा बोरा ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) द्वारा जारी उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 10,000 रुपये का बॉन्ड भरने और ‘शांति बनाए रखने’ का निर्देश दिया गया था.
याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा था कि नेहा बोरा की याचिका मेंटेनेबल नहीं है. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि उन्होंने मजिस्ट्रेट के लिए कुछ निर्देश जारी किए हैं.
कोर्ट ने सुरक्षित रखा था फैसला
कोर्ट ने 22 अक्टूबर को बोरा की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि नेहा बोरा की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति से जांच पूरी होने तक अच्छे व्यवहार का बॉन्ड भरवाना एक तरह से उसे जांच पूरी होने तक निलंबित रखने जैसा है.
शर्मा ने नेहा बोरा के उस तर्क को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि बीएनएसएस की धारा 163 केवल मंडी हाउस क्षेत्र में लागू थी, कनॉट प्लेस में नहीं और जिस समय घटना हुई उस समय यह धारा लागू नहीं थी. उन्होंने कहा कि यह दलील तथ्यात्मक रूप से गलत है. धारा 163 प्रभावी थी, पुलिस बल सीमित था और नेहा बोरा पुलिस को चकमा देकर कनॉट प्लेस की ओर बढ़ती रहीं.
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की मुख्य चिंता यह है कि उन्हें पहले ही गलत आचरण वाला व्यक्ति मान लिया गया है और अब उनसे अच्छे व्यवहार का आश्वासन मांगा जा रहा है. अदालत ने कहा कि जब कोई व्यक्ति कोर्ट में आकर यह वादा करता है कि वह भविष्य में सही व्यवहार करेगा तो इसका मतलब यह निकलता है कि वह अब तक सही व्यवहार नहीं कर रहा था.
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सुनवाई के आखिरी में हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि जब धारा 126 और 130 को साथ जोड़कर धारा 130 के तहत नोटिस या आदेश जारी किया जाता है तो क्या इससे यह संकेत नहीं मिलता कि मजिस्ट्रेट ने पहले से ही अपना मन बना लिया था. मामले में अब सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाया है.
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