पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से करीब पांच महीने पहले सामने आए एक ओपिनियन पोल ने राज्य के राजनीतिक दलों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इसमें आम आमदी पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और वारिस पंजाब दे भी शामिल हैं.
ओपिनियन पोल करने वाली एजेंसी SCORE की पहली रिपोर्ट के अनुसार AAP राज्य की सत्ता में लौट सकती है. SCORE Punjab Round 1 के मुताबिक, अगर 15 अक्टूबर 2026 को पंजाब में विधानसभा चुनाव होते, तो आम आदमी पार्टी को 117 सदस्यीय विधानसभा में 69 से 82 सीटें मिल सकती थीं. राज्य में बहुमत का आंकड़ा 59 सीटों का है. ऐसे में सर्वे के अनुमान के मुताबिक AAP बहुमत से आगे निकलते हुए सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर सकती है.
हालांकि, सर्वे के आंकड़े यह भी संकेत देते हैं कि 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले आम आदमी पार्टी की स्थिति कमजोर हुई है. पार्टी को इस बार करीब 38 % वोट शेयर मिलने का अनुमान है, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में उसे करीब 42 % वोट मिले थे. इस तरह पार्टी के वोट शेयर में लगभग चार प्रतिशत अंक की कमी का अनुमान है. इसके बावजूद AAP फिलहाल अपने प्रतिद्वंद्वी दलों से पर्याप्त अंतर बनाए हुए दिखाई दे रही है.
SCORE ने यह सर्वे पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों में 13 सितंबर से 13 अक्टूबर 2026 के बीच 28,347 मतदाताओं से बातचीत के आधार पर किया है. संगठन के मुताबिक, यह पंजाब में उसका पहला राउंड है. SCORE हर महीने की 15 तारीख को पंजाब का ट्रैकर पोल जारी करेगा. इसके अलावा नवंबर से उत्तर प्रदेश का मासिक ट्रैकर पोल भी शुरू किया जाएगा.
AAP को 38 % वोट, कांग्रेस को 24 % का अनुमान
SCORE के अनुमान के मुताबिक, आम आदमी पार्टी को 38 % वोट शेयर के साथ 69 से 82 सीटें मिल सकती हैं. कांग्रेस को 24 % वोट शेयर और 17 से 34 सीटें मिलने का अनुमान है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 14 % वोट शेयर के साथ 4 से 12 सीटें मिल सकती हैं, जबकि शिरोमणि अकाली दल (शिअद) को 12.5 % वोट शेयर और 2 से 6 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है.
अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाले अकाली दल (वारिस पंजाब दे) को 8.5 % वोट शेयर और 2 से 6 सीटें मिलने का अनुमान है.
सर्वे में आम आदमी पार्टी की बढ़त के पीछे दो प्रमुख कारण सामने आए हैं. पहला, महिलाओं के बीच पार्टी का मजबूत समर्थन और दूसरा, विपक्षी वोटों का अलग-अलग दलों में बंटा होना. इन दोनों कारकों के चलते AAP को चुनावी मुकाबले में बढ़त मिलती दिखाई दे रही है.
2022 के मुकाबले AAP का वोट शेयर घटा
पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में आम आदमी पार्टी ने 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. उस चुनाव में पार्टी को करीब 42 % वोट मिले थे. इसके मुकाबले SCORE के मौजूदा अनुमान में AAP का वोट शेयर 38 % और सीटों की संख्या 69 से 82 के बीच रहने की संभावना जताई गई है.
इसका मतलब है कि अगर सर्वे का यह अनुमान चुनाव तक कायम रहता है, तो आम आदमी पार्टी के पास दोबारा सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें हो सकती हैं, लेकिन 2022 की तरह एकतरफा प्रदर्शन करने की संभावना कम दिखाई देती है. पार्टी की सीटें पिछली बार के 92 के मुकाबले कम रह सकती हैं.
दूसरी तरफ कांग्रेस 24 % वोट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर है. हालांकि, उसके लिए सीटों का अनुमान 17 से 34 के बीच है. सीटों की इस विस्तृत रेंज से संकेत मिलता है कि कांग्रेस का अंतिम प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि उसका वोट अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में किस तरह केंद्रित होता है और कितनी सीटों पर वह अपने प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी चुनौती दे पाती है.
AAP के लिए सबसे बड़ा फायदा क्या?
पंजाब में आम आदमी पार्टी की बढ़त को समझने के लिए विपक्षी दलों के अनुमानित वोट शेयर पर भी नजर डालना जरूरी है. सर्वे में कांग्रेस को 24 %, बीजेपी को 14 %, शिरोमणि अकाली दल को 12.5 % और अकाली दल (वारिस पंजाब दे) को 8.5 % वोट मिलने का अनुमान है.
इन आंकड़ों के मुताबिक, विपक्षी वोट अलग-अलग राजनीतिक दलों में बंटे हुए हैं. इसका फायदा आम आदमी पार्टी को मिल सकता है. खास तौर पर अकाली दल (वारिस पंजाब दे) की मौजूदगी शिरोमणि अकाली दल के लिए चुनौती बन सकती है.
SCORE का आकलन है कि नए दल की वजह से शिअद के पारंपरिक वोट बैंक में विभाजन हो रहा है. युवा पुरुष मतदाताओं के बीच वारिस पंजाब दे का समर्थन उल्लेखनीय बताया गया है. 35 वर्ष से कम उम्र के पुरुष मतदाताओं में इस दल को करीब 17 से 19 % समर्थन मिलने का अनुमान है.
ऐसे में वारिस पंजाब दे का प्रभाव बढ़ने पर शिरोमणि अकाली दल के चुनावी प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है. पंजाब की राजनीति में अकाली दल के पारंपरिक आधार के लिहाज से यह समीकरण महत्वपूर्ण हो सकता है.
माझा, दोआब और मालवा, तीनों क्षेत्रों में AAP को बढ़त
पंजाब के तीन प्रमुख क्षेत्रों माझा, दोआब और मालवा में भी आम आदमी पार्टी को बढ़त मिलती दिखाई गई है. SCORE के अनुमान के मुताबिक, दोआब AAP का सबसे मजबूत क्षेत्र है, जहां पार्टी को 43.9 % वोट शेयर मिल सकता है. माझा में उसका अनुमानित वोट शेयर 40.8 % और मालवा में 35.2 % है.
हालांकि, चुनावी दृष्टि से मालवा सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है. पंजाब की कुल 117 विधानसभा सीटों में से 69 सीटें मालवा क्षेत्र में आती हैं. इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी दल का प्रदर्शन राज्य में उसकी कुल सीटों की संख्या पर बड़ा असर डाल सकता है.
SCORE ने कुल 16 ऐसी विधानसभा सीटों की पहचान की है, जहां मुकाबला करीबी है. इनमें से 14 सीटें मालवा क्षेत्र में हैं. यही वजह है कि आम आदमी पार्टी की अंतिम सीट संख्या 69 के करीब रहती है या 82 के आसपास पहुंचती है, इसमें मालवा की भूमिका निर्णायक हो सकती है.
महिलाओं का समर्थन AAP की सबसे बड़ी ताकत!
SCORE के सर्वे में आम आदमी पार्टी की बढ़त का सबसे बड़ा संकेत महिला मतदाताओं के आंकड़ों से मिलता है. सर्वे के मुताबिक, महिला मतदाताओं में AAP को 51.2 % समर्थन मिलने का अनुमान है, जबकि कांग्रेस को केवल 20.8 % समर्थन मिल सकता है.
इसके उलट पुरुष मतदाताओं के बीच दोनों दलों का मुकाबला बेहद करीबी है. पुरुषों में आम आदमी पार्टी को 27.4 % और कांग्रेस को 26.6 % समर्थन मिलने का अनुमान लगाया गया है. इस तरह पुरुष मतदाताओं के बीच दोनों दल लगभग बराबरी पर दिखाई देते हैं, जबकि महिलाओं के बीच AAP की बढ़त काफी बड़ी है.
सर्वे में आम आदमी पार्टी को महिलाओं के हर आयु वर्ग में आगे बताया गया है. 61 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाओं में पार्टी को सबसे ज्यादा 57.8 % समर्थन मिलने का अनुमान है. यह आंकड़ा बताता है कि AAP का महिला मतदाताओं के बीच समर्थन केवल युवा महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि अधिक उम्र की महिला मतदाताओं में भी पार्टी की मजबूत पकड़ दिखाई दे रही है.
महिलाओं के बीच यह बढ़त राज्यभर में आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन को मजबूत करने वाला प्रमुख कारक बन सकती है.
पुरुष कांग्रेस और वारिस पंजाब दे के साथ?
पुरुष मतदाताओं के आंकड़ों में तस्वीर महिलाओं से अलग दिखाई देती है. सर्वे के मुताबिक, 18 से 25 वर्ष और 60 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष मतदाताओं में कांग्रेस आम आदमी पार्टी से आगे बताई गई है.
AAP का सबसे अच्छा प्रदर्शन 51 से 60 वर्ष की उम्र के पुरुष मतदाताओं में बताया गया है. वहीं, युवा पुरुष मतदाताओं के बीच अकाली दल (वारिस पंजाब दे) की मौजूदगी चुनावी समीकरण को और जटिल बना रही है.
35 वर्ष से कम उम्र के पुरुषों में वारिस पंजाब दे को 17 से 19 % समर्थन मिलने का अनुमान है. यह समर्थन शिरोमणि अकाली दल के पारंपरिक वोट आधार पर संभावित असर का संकेत देता है. इस तरह पुरुष मतदाताओं के बीच कांग्रेस और वारिस पंजाब दे का प्रभाव आम आदमी पार्टी के लिए अलग-अलग स्तर पर चुनौती पेश कर सकता है.
मुख्यमंत्री पद की पसंद में भगवंत मान सबसे आगे
SCORE के सर्वे में मुख्यमंत्री भगवंत मान आम आदमी पार्टी के सबसे बड़े नेतृत्व चेहरे के रूप में सामने आए हैं. मुख्यमंत्री पद के लिए पसंद पूछे जाने पर भगवंत मान को 46.3 % लोगों का समर्थन मिला. कांग्रेस नेता चरनजीत सिंह चन्नी 18.3 % के साथ दूसरे स्थान पर हैं.
शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल को 12.3 % और अमृतपाल सिंह को 8 % लोगों ने मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी पसंद बताया.
इन आंकड़ों में भगवंत मान अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से काफी आगे दिखाई देते हैं. सर्वे के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद की पसंद के मामले में उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता अन्य नेताओं के मुकाबले मजबूत है.
हालांकि, सर्वे का एक अन्य महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि भगवंत मान की व्यक्तिगत लोकप्रियता उनकी सरकार की लोकप्रियता से अधिक है. भगवंत मान की व्यक्तिगत रेटिंग 63.9 % बताई गई है, जबकि आम आदमी पार्टी की सरकार की रेटिंग 57.7 % है.
इस अंतर से संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री के स्तर पर समर्थन सरकार के समग्र प्रदर्शन के मुकाबले अधिक है.
मुख्यमंत्री लोकप्रिय, लेकिन…
मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की रेटिंग के मुकाबले स्थानीय विधायकों की स्थिति कमजोर दिखाई देती है. SCORE के मुताबिक, केवल 48.1 % लोगों ने कहा कि वे अपने स्थानीय विधायक के काम से संतुष्ट हैं.
वहीं, सिर्फ 42.4 % लोग अपने मौजूदा विधायक को दोबारा चुनने के पक्ष में हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की लोकप्रियता और स्थानीय स्तर पर विधायकों के प्रति मतदाताओं की संतुष्टि के बीच अंतर है.
अगर पंजाब में आम आदमी पार्टी के खिलाफ सत्ता विरोधी रुझान बन रहा है, तो सर्वे के मुताबिक उसका असर फिलहाल मुख्यमंत्री के स्तर से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों और विधायकों के स्तर पर दिखाई देता है.
यह AAP के लिए चिंता का विषय हो सकता है. विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री की लोकप्रियता पार्टी को फायदा पहुंचा सकती है, लेकिन स्थानीय उम्मीदवारों के प्रदर्शन और उनके प्रति मतदाताओं की नाराजगी से कई सीटों के नतीजे प्रभावित हो सकते हैं.
नशा पंजाब की सबसे बड़ी चिंता
SCORE के सर्वे में नशे को पंजाब की जनता की सबसे बड़ी स्थानीय समस्या बताया गया है. करीब 39.3 % लोगों ने ड्रग्स यानी नशे को अपनी सबसे बड़ी स्थानीय समस्या माना है. इसका मतलब है कि सर्वे में शामिल लगभग हर दस में से चार लोगों के लिए नशा सबसे बड़ा स्थानीय मुद्दा है.
नशा केवल जनता की प्रमुख चिंता ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार के प्रदर्शन को लेकर भी बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है. सर्वे के मुताबिक, 22.2 % लोगों ने नशे को राज्य सरकार की सबसे बड़ी नाकामी बताया.
माझा क्षेत्र में स्थिति और गंभीर दिखाई गई है. यहां 49 % लोगों ने ड्रग्स को अपनी सबसे बड़ी स्थानीय समस्या माना है. इस तरह नशे का मुद्दा पंजाब में सरकार के सामने प्रमुख चुनौतियों में शामिल है और चुनाव के दौरान यह मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकता है.
सड़कों की समस्या भी बड़ा मुद्दा
नशे के बाद सड़कें पंजाब में दूसरी बड़ी स्थानीय समस्या के रूप में सामने आई हैं. राज्यभर में 13.2 % लोगों ने सड़कों को अपनी सबसे बड़ी स्थानीय समस्या बताया है.
दोआब क्षेत्र में सड़कें विशेष रूप से प्रमुख मुद्दा बताई गई हैं. इसके अलावा नहरें, शौचालय, पानी, बेरोजगारी और महंगाई भी जनता की समस्याओं में शामिल हैं.
सर्वे के निष्कर्ष के मुताबिक, कुछ क्षेत्रों में कानून और व्यवस्था महत्वपूर्ण मुद्दा है, लेकिन राज्यस्तर पर लोगों की सबसे बड़ी चिंता नशा और विकास से जुड़ी समस्याएं हैं. इससे संकेत मिलता है कि चुनावी मुकाबले में सरकार के कामकाज, स्थानीय सुविधाओं और बुनियादी समस्याओं का समाधान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
कल्याणकारी योजनाएं AAP के लिए बड़ा चुनावी सहारा
आम आदमी पार्टी की सरकार के लिए सबसे सकारात्मक संकेत कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच से मिलता है. SCORE के मुताबिक, 79.7 % परिवारों ने बताया कि उन्हें राज्य सरकार की कम से कम एक योजना का लाभ मिल रहा है.
महिलाओं के लिए मावां धीयां सत्कार योजना का लाभ 58.1 % परिवारों ने मिलने की बात कही. वहीं, 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ 49.9 % घरों को और घर-घर राशन योजना का लाभ 40.6 % घरों को मिलने की बात सर्वे में सामने आई.
रिपोर्ट में मुफ्त बिजली को सरकार की सबसे बड़ी सफलता बताया गया है. इसके अलावा महिलाओं में 70 % ने कैश ट्रांसफर का लाभ मिलने की बात कही है.
ये आंकड़े आम आदमी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि सर्वे में महिला मतदाताओं के बीच पार्टी को पहले ही 51.2 % समर्थन मिलने का अनुमान है. ऐसे में कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच और महिला मतदाताओं के बीच समर्थन का संबंध चुनावी दृष्टि से पार्टी के लिए अहम हो सकता है.
करीबी मुकाबले वाली सीटें तय कर सकती हैं अंतिम तस्वीर
SCORE ने 22 ऐसी विधानसभा सीटों की पहचान की है, जहां मुकाबला बेहद करीबी है और मामूली वोटों का अंतर अंतिम परिणाम को प्रभावित कर सकता है.
इनमें छह सीटों को बराबरी के मुकाबले के रूप में चिह्नित किया गया है. ये सीटें खेम करण, पट्टी, फिल्लौर, बलाचौर, खरड़ और फाजिल्का हैं.
बाकी करीबी मुकाबलों में अलग-अलग विधानसभा सीटों पर आम आदमी पार्टी को कांग्रेस, बीजेपी, शिरोमणि अकाली दल या अकाली दल (वारिस पंजाब दे) से चुनौती मिलने का अनुमान है.
इन 22 सीटों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि सर्वे में AAP की अनुमानित सीट संख्या 69 से 82 के बीच रखी गई है. ऐसे में इन सीटों के परिणाम पार्टी को इस दायरे के निचले या ऊपरी हिस्से तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
करीबी मुकाबलों वाली सीटों पर उम्मीदवारों की स्थिति, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं का अंतिम फैसला राज्य में सत्ता के समीकरण को प्रभावित कर सकता है.
22.5 % मतदाताओं ने अभी नहीं किया फैसला
SCORE सर्वे का एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि 22.5 % मतदाताओं ने अभी तक अपना अंतिम चुनावी फैसला नहीं किया है. इतने बड़े हिस्से के मतदाताओं का अनिर्णीत होना बताता है कि चुनाव से पहले पंजाब की राजनीतिक तस्वीर में बदलाव की गुंजाइश बनी हुई है.
अगले कुछ महीनों में राजनीतिक मुद्दों, उम्मीदवारों, गठबंधनों और प्रचार अभियान का इन मतदाताओं पर असर पड़ सकता है. ऐसे में अभी सामने आए अनुमान को चुनाव की अंतिम तस्वीर नहीं माना जा सकता.
अनिर्णीत मतदाताओं का रुख आने वाले समय में किसी भी राजनीतिक दल की सीटों और वोट शेयर को प्रभावित कर सकता है. इसलिए AAP की मौजूदा बढ़त के बावजूद चुनाव तक मुकाबले में बदलाव की संभावना बनी हुई है.
कांग्रेस के सामने चुनौती, लेकिन वापसी की गुंजाइश
SCORE के अनुमान में कांग्रेस 24 % वोट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर है. पार्टी को 17 से 34 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है. हालांकि, सीटों का यह अनुमान काफी विस्तृत है, जिससे संकेत मिलता है कि कुछ क्षेत्रों में कांग्रेस के पास मुकाबला मजबूत करने और अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने की गुंजाइश हो सकती है.
मौजूदा राजनीतिक माहौल में कांग्रेस भी पंजाब की सत्ता में वापसी को लेकर आक्रामक है. कांग्रेस के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने 15 अक्टूबर को कहा कि पार्टी अगली सरकार बनाएगी. उन्होंने संगठन को एक टीम के रूप में चुनाव लड़ने की बात भी कही.
ऐसे में SCORE के सर्वे में आम आदमी पार्टी को बढ़त मिलने के बावजूद कांग्रेस की चुनौती को खत्म नहीं माना जा सकता. पार्टी का अंतिम प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह किन क्षेत्रों में अपने वोट को मजबूत करती है और कितनी सीटों पर सीधे मुकाबले की स्थिति में आती है.
बीजेपी के लिए अभी लंबी दूरी
SCORE के अनुमान में भारतीय जनता पार्टी को 14 % वोट शेयर के साथ 4 से 12 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है. फिलहाल पार्टी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस से पीछे दिखाई दे रही है.
हालांकि, पंजाब की राजनीति में शहरी सीटों और कुछ खास क्षेत्रों में बीजेपी का प्रदर्शन उसकी कुल सीटों की संख्या को प्रभावित कर सकता है.
इसी बीच, सितंबर में पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की लगातार दूसरी जीत के बाद राज्य में युवा मतदाताओं को लेकर बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक चर्चा तेज हुई थी. हालांकि, छात्रसंघ चुनाव और विधानसभा चुनाव के नतीजों के बीच सीधे संबंध की संभावना नहीं मानी जा सकती.
शिअद और वारिस पंजाब दे के बीच वोटों का बंटवारा!
शिरोमणि अकाली दल को 12.5 % और अकाली दल (वारिस पंजाब दे) को 8.5 % वोट शेयर मिलने का अनुमान है. पंजाब की पारंपरिक अकाली राजनीति के आधार के लिहाज से दोनों दलों के बीच वोटों का बंटवारा महत्वपूर्ण हो सकता है.
अगर वारिस पंजाब दे युवा और ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपना प्रभाव बढ़ाता है, तो इसका सीधा असर शिरोमणि अकाली दल की सीट जीतने की क्षमता पर पड़ सकता है.
शिअद के सामने एक और चुनौती यह है कि सर्वे में उसका अनुमानित वोट शेयर बीजेपी के 14 % वोट शेयर से भी कम है. ऐसे में अकाली दल और वारिस पंजाब दे के बीच चुनावी प्रतिस्पर्धा पंजाब में विपक्षी वोटों के बंटवारे को और महत्वपूर्ण बना सकती है.
फिलहाल AAP आगे, लेकिन 2022 जैसी बढ़त नहीं
SCORE Punjab Round 1 की पूरी तस्वीर देखें तो पंजाब में फिलहाल आम आदमी पार्टी के पक्ष में कई कारक एक साथ काम करते दिखाई दे रहे हैं. महिलाओं के बीच मजबूत समर्थन, मुख्यमंत्री भगवंत मान की व्यक्तिगत लोकप्रियता, सरकारी योजनाओं का लाभ और विपक्षी दलों के बीच वोटों का बंटवारा पार्टी को बढ़त दे रहे हैं.
दूसरी तरफ नशे का मुद्दा, सड़क और विकास से जुड़ी समस्याएं, स्थानीय विधायकों के प्रति कम संतुष्टि और मालवा क्षेत्र में करीबी मुकाबलों वाली सीटों की बड़ी संख्या आम आदमी पार्टी के सामने चुनौती पेश कर रही है.
सर्वे के मुताबिक, मुख्यमंत्री भगवंत मान की व्यक्तिगत रेटिंग 63.9 % है, जबकि सरकार की रेटिंग 57.7 % है. वहीं, स्थानीय विधायकों के काम से केवल 48.1 % लोग संतुष्ट हैं और 42.4 % लोग अपने मौजूदा विधायक को दोबारा चुनने के पक्ष में हैं. ये आंकड़े राज्य सरकार, मुख्यमंत्री और स्थानीय विधायकों के प्रति मतदाताओं की अलग-अलग राय को सामने रखते हैं.
इसके अलावा 22.5 % मतदाताओं का अभी तक अपना अंतिम फैसला नहीं करना भी चुनावी तस्वीर को अनिश्चित बनाता है. अगले कुछ महीनों में राजनीतिक दलों के अभियान, उम्मीदवारों के चयन, गठबंधनों और स्थानीय मुद्दों के आधार पर मतदाताओं का रुख बदल सकता है.
फिलहाल अक्टूबर 2026 के SCORE सर्वे के मुताबिक, आम आदमी पार्टी पंजाब में सत्ता बरकरार रखने की मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है. हालांकि, 2022 के चुनाव के मुकाबले उसका वोट शेयर और संभावित सीटें कम होने का अनुमान है. यानी पार्टी को दोबारा सरकार बनाने की स्थिति में दिखाया गया है, लेकिन साल 2022 एकतरफा राजनीतिक बढ़त उसके पास फिलहाल नहीं है.
