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पंजाब में ‘फर्जी एनकाउंटर’ विवाद: NHRC ने गृह सचिव को लताड़ा, 4 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट


पंजाब में कथित फर्जी एनकाउंटर को लेकर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया. इसके बाद याचिकाकर्ता ने निखिल सराफ़ ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को भी लिखित शिकायत भेजी है. उन्होंने NHRC से पंजाब के DGP की फर्जी एनकाउंटर के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए शिकायत की है. NHRC ने पंजाब के चीफ सेक्रेटरी को चार हफ्ते में जांच रिपोर्ट देने को कहा है. वकील निखिल सराफ के अनुसार DGP गौरव यादव जिले के सीनियर पुलिस अफसरों से मीटिंग के दौरान गैर कानूनी काउंटर्स को उनकी कार्यकुशलता का पैमाना बता रहे हैं. 

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 2 नवंबर 2026 को पंजाब के मुख्य सचिव और गृह सचिव को एक आधिकारिक नोटिस जारी किया है. यह नोटिस पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट निखिल सराफ द्वारा 12 जुलाई 2025 को भेजी गई एक शिकायत के आधार पर जारी किया गया है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पंजाब पुलिस के महानिदेशक (DGP) गौरव यादव पुलिस अधिकारियों को अपना काम आंकने के पैमाने के रूप में फर्जी एनकाउंटर करने के निर्देश दे रहे हैं. शिकायतकर्ता ने इसके समर्थन में एक पत्रकार के 1 जून 2025 के सोशल मीडिया पोस्ट और एक व्हाट्सएप मैसेज के स्क्रीनशॉट का हवाला दिया है, जिसमें पंजाब के अलग-अलग जिलों में कथित फर्जी एनकाउंटर और पुलिस हिरासत में दी जाने वाली यातनाओं के मामलों का जिक्र है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 24 नवंबर 2025 को इन आरोपों को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए पंजाब सरकार के गृह विभाग के सचिव से 15 दिनों में जांच रिपोर्ट मांगी थी. पंजाब के गृह विभाग के उप-सचिव ने 23 सितंबर 2026 को आयोग में अपना जवाब दाखिल किया, जिसमें खुद DGP कार्यालय की ही रिपोर्ट संलग्न कर दी गई थी. NHRC ने इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस DGP पर खुद आरोप लगे हैं, उन्हीं के दफ्तर से भेजी गई रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया जा सकता. आयोग ने गृह सचिव के इस रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि गृह सचिव ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया.

अब NHRC ने पंजाब के मुख्य सचिव और गृह सचिव को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे केवल रिपोर्ट फॉरवर्ड करने के बजाय इन गंभीर आरोपों की खुद निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराएं. NHRC ने स्पष्ट किया है कि 4 हफ्ते के भीतर स्वतंत्र जांच रिपोर्ट हर हाल में आयोग को भेजी जाए. यदि पंजाब सरकार ऐसा नहीं किया गया, तो मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 13 के तहत आयोग अपनी बाध्यकारी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आगे की कार्रवाई करेगा.



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