पटना हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के रिश्ते और तलाक से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि अगर पति-पत्नी के बीच बिल्कुल भी तालमेल नहीं है और दोनों साथ रहने को तैयार नहीं हैं, तो उनके व्यवहार को आपसी क्रूरता माना जा सकता है. इस आधार पर हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(i-a) के तहत तलाक दिया जा सकता है. इसके साथ ही कोर्ट ने पत्नी को 36.25 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश भी दिया.
मामले में दंपति की शादी 23 जनवरी 2013 को बिहार के पटना में हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी. 25 जनवरी 2014 को उनके यहां बेटे का जन्म हुआ. हालांकि, कुछ समय बाद दोनों के रिश्तों में खटास आ गई और पत्नी ससुराल छोड़कर अपने मायके हाजीपुर चली गईं.
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पति ने तलाक की मांग करते हुए आरोप लगाया कि पत्नी उनके और परिवार के सदस्यों के साथ ठीक व्यवहार नहीं करती थीं. उन्होंने पत्नी को वापस लाने की कोशिश भी की, लेकिन वह साथ रहने को तैयार नहीं हुईं.
वहीं, पत्नी ने इन आरोपों को गलत बताया. उनका कहना था कि पति और उनके परिवार ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया. उन्होंने अलग घर में रहने की मांग भी की थी, लेकिन पति ने इसे स्वीकार नहीं किया.
फैमिली कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में दी चुनौती
29 नवंबर 2022 को हाजीपुर फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए तलाक की अनुमति दे दी थी. फैमिली कोर्ट ने माना कि पति क्रूरता और परित्याग के आधार पर अपने आरोप साबित करने में सफल रहे हैं. इसके बाद पत्नी ने इस फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी.
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों से पूछा कि क्या वे अब भी साथ रहना चाहते हैं. दोनों ने इससे इनकार कर दिया. पत्नी ने भी माना कि उनकी शादी अब पूरी तरह टूट चुकी है. कोर्ट के सामने यह बात भी आई कि पति दूसरी शादी कर चुके हैं और उनका एक बच्चा भी है.
पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह केवल शादी के अपूरणीय रूप से टूटने के आधार पर तलाक नहीं दे सकता. हालांकि, जब पति-पत्नी के बीच बिल्कुल तालमेल न हो और दोनों साथ रहने के इच्छुक न हों, तो परिस्थितियों के आधार पर उनके व्यवहार को आपसी क्रूरता माना जा सकता है. कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(i-a) का हवाला देते हुए वैवाहिक संबंध समाप्त करने का आधार स्वीकार किया.
पत्नी को मिलेंगे 36.25 लाख रुपये
स्थायी गुजारा भत्ते पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने पति की मासिक आय करीब 85,000 रुपये मानी. सुप्रीम कोर्ट के राजनेश बनाम नेहा मामले में तय दिशा-निर्देशों के आधार पर पत्नी के गुजारा भत्ते की गणना की गई.
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इसके तहत पत्नी को 36.25 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया गया. पति को यह रकम फैसले की तारीख से तीन महीने के भीतर दो समान किस्तों में पत्नी के बचत खाते में जमा करनी होगी.
