मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड की गौरवशाली परंपरा और प्राचीन शस्त्र कला ‘अखाड़ा’ को वैश्विक पहचान दिलाने वाले पद्मश्री (2026) से सम्मानित अखाड़ा गुरु श्री भगवानदास रैकवार ‘दाऊ’ जी का निधन हो गया. उन्होंने भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली. वे पिछले कई दिनों से अस्वस्थ थे और वेंटिलेटर पर जीवन की जंग लड़ रहे थे.
परिजनों के अनुसार, दाऊ जी को पहले सागर के चैतन्य हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां 17 मार्च से उनका इलाज चल रहा था. हालत में सुधार न होने पर 7 अप्रैल को उन्हें बेहतर उपचार के लिए AIIMS भोपाल रेफर किया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. उनके पुत्र राजकुमार रैकवार ने गहरे दुख के साथ उनके निधन की पुष्टि की.
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिलाई शस्त्र युद्ध कला को पहचान
83 वर्षीय भगवानदास रैकवार ‘दाऊ’ जी ने अपना पूरा जीवन बुंदेलखंड की पारंपरिक शस्त्र युद्ध कला ‘अखाड़ा’ के संरक्षण और प्रचार-प्रसार को समर्पित कर दिया. उनके अथक प्रयासों से इस प्राचीन कला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली.
भारतीय पारंपरिक मार्शल आर्ट और अखाड़ा विद्या के संरक्षण के लिए मिला था पद्मश्री स्मान
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 के लिए उन्हें ‘पद्मश्री सम्मान’ के लिए चयनित किया गया था. यह सम्मान उन्हें भारतीय पारंपरिक मार्शल आर्ट और अखाड़ा विद्या के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रशिक्षण में उनके अमूल्य योगदान के लिए प्रदान किया जा रहा था. दाऊ जी के निधन से बुंदेलखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को अपूरणीय क्षति पहुंची है. उनके जाने से अखाड़ा परंपरा का एक युग समाप्त हो गया है.
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