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पाली में कमजोर मानसून से किसान परेशान, ‘फसलें जल गईं, बच्चों की फीस के पैसे नहीं’


राजस्थान के पाली जिले में इस साल कमजोर मानसून ने किसानों की कमर तोड़ दी है. जिले के पेयजल और सिंचाई के मुख्य स्रोत जवाई बांध में 20 प्रतिशत से भी कम पानी बचा है, जबकि जिले के 16 छोटे-बड़े बांध पूरी तरह सूख चुके हैं. किसानों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि फसल अच्छी होगी लेकिन फसलें बरबाद होने के तारण अब तो बच्चों के स्कूल तक की फीस के पैसे नहीं हैं. 

जवाई सहित 14 बांधों में जलस्तर 20 प्रतिशत से नीचे है. हालात ऐसे हैं कि अगले मानसून तक पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है. आशंका जताई जा रही है कि जोधपुर से ट्रेन से पानी मंगवाना पड़ेगा. 

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‘अब दीपावली भी फीकी मनानी पड़ेगी’

ABP न्यूज की टीम ने पाली के खेतों का दौरा किया तो किसानों ने अपना दर्द साझा किया. किसान तेजाराम प्रजापत और पेमाराम ने बताया कि पूरा परिवार खेती पर निर्भर है. 5 बीघा में सब्जियां बोई थीं, लेकिन बरसात नहीं होने से सब बर्बाद हो गई. अच्छी बरसात होती तो 5 लाख की आमदनी होती, जिससे घर खर्च और तारबंदी का काम होता. अब दीपावली भी फीकी मनानी पड़ेगी. 

नेनाराम चौधरी व महिला कृषक बसन्ती प्रजापत ने बताया कि चारा खराब हो गया है, घर में 7-8 गाय-भैंस हैं, उन्हें क्या खिलाएं. चारे के दाम भी बढ़ गए हैं. बची हुई फसल को नीलगाय और जंगली सूअर से बचाने के लिए रात में खेत में सोना पड़ता है.

‘ज्वार-मक्की-मूंग की फसल बर्बाद’

रोहट के ढाबर गांव के बाबू सिंह ने 300 बीघा में मूंग बोया था, पूरी फसल खराब हो गई. रानी के हीरालाल सोलंकी ने ब्याज पर रुपए लेकर 50 बीघा में मूंग बोया था, सब जल गया. बाली के खेताराम सीरवी की 15 बीघा ज्वार-मक्की-मूंग की फसल बर्बाद हो गई, कुओं में भी पानी नहीं बचा. 

खरीफ बर्बाद होने से रबी पर भी संकट है. कृषि विभाग ने 2026-27 के लिए रबी का रकबा घटाकर 1 लाख 39 हजार 500 हेक्टेयर कर दिया है, जो पिछले साल 3 लाख 16 हजार 100 हेक्टेयर था. यानि 1 लाख 76 हजार 600 हेक्टेयर, करीब 56 प्रतिशत की कमी. 

80 से 100 प्रतिशत फसल

किसान नेता तेजाराम प्रजापत ने बताया कि जिले में 80 से 100 प्रतिशत फसल खराब हो गई हैं.  तिल, बाजरी, ज्वार, मूंग, मक्का जल गए. प्रशासन को तुरंत पाली को अकाल घोषित कर मुआवजा देना चाहिए.  कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक प्रदीप छाजेड़ ने माना कि कमजोर मानसून से खरीफ खराब हुई है और रबी पर भी असर पड़ेगा.  शहर में पेयजल संकट गहरा गया है. संतोष कंवर ने बताया कि अब 72 घंटे में एक बार पानी आता है, पहले 24 घंटे में आता था.  फरवरी-मार्च तक हालात और बिगड़ सकते हैं. 

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Input By : प्रहलाद सिंह



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