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पुलिस की बस, अंदर प्रदर्शनकारी और सामने फौलादी हौसलों के साथ खड़ी लड़की…, कौन है चर्चा में आयी ये ग्रे हुडी गर्ल


जगह मुंबई, माहौल छात्रों का प्रदर्शन, बारिश, मुंबई पुलिस और उसकी बस, बस के अंदर अरेस्ट किए गए प्रदर्शनकारी छात्र और ठीक उसी बस के सामने ग्रे रंग की हुडी पहनी एक लड़की. जो अपने ही यूनीक अंदाज में पुलिस की बस के सामने हाथ फैलाकर खड़ी हुई थी. यह तमाशा लगभग 40 मिनट तक जारी रहा और पूरा शहर उस लड़की को एक टक देखता रहा.

यह सारा नजारा देखने के बाद सिर्फ और सिर्फ मजाज लखनवी ( पूरा नाम- असरार-उल-हक ‘मजाज’ लखनवी) की एक गजल का हिस्सा याद आता है, जिसमें वो महिलाओं को अपनी आवाज उठाने की बात कहते हैं- मजाज कहते हैं, ‘तिरे माथे पे ये आंचल बहुत ही खूब है लेकिन, तू इस आंचल से इक परचम बना लेती तो अच्छा था.’

मजाज की यही पंक्तियों को चरितार्थ करती विद्रोही लड़की की चर्चा सोशल मीडिया से लेकर इंटरनेशनल मीडिया तक सुर्खियां बन गईं. लड़की का नाम रिया अहीर (Riya Ahir) है. 

40 मिनट तक पुलिस बस के सामने खड़ी रहीं रिया
पिछले बुधवार 22 जुलाई 2026 को मुंबई में कथित पेपर लीक और दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया बर्बर कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन था. रिया 40 मिनट तक पुलिस बस के सामने खड़ी रही. अहिर ने कहा, वह विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से पहले अपने दोस्तों का इंतजार कर रही थी. तभी उसने प्रदर्शनकारियों को लेकर जा रही पुलिस की गाड़ी देखी. उसने अधिकारियों से पूछा कि क्या उनके पास अंदर मौजूद लोगों को हिरासत में लेने का जरूरी कागज हैं. जब किसी तरह का ठोस जवाब नहीं मिला तो रिया बस के साथ तेजी से चलने लगी, और फिर एक दम से बस के सामने आ गई.

रिया कहती हैं, कि ड्राइवर ने इंजन को जोर से घुमाया. उसे लगा कि अरेस्ट किया जा सकता है, चोट लग सकती है, लेकिन वह तब तक नहीं हटी, जब तक प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं कर दिया गया. रिया ने कहा कि वो जानती थीं कि उन्होंने इसे शुरू किया है, और उन्हें ही इसे खत्म करना होगा. 

कौन हैं रिया अहीर? 
रिया मुंबई की एक मॉडल हैं. उनका पूरा नाम रिया अहीर है. उन्हें रिया एकोसिया भी कहा जाता है. वह एक पेशेवर मॉडल, एक्ट्रेस, होस्ट और बिजनेस वुमेन हैं. उन्होंने कई म्यूजिक वीडियो जिनमें फरवरी 2025 में रिलीज हुआ दिलबारा और शॉर्ट फिल्मों में काम किया है. वह रियासत नाम से एक क्लोदिंग गारमेंट ब्रांड भी चलाती हैं. 

रिया के पिता किसान हैं, बोलीं- शिक्षामंत्री प्रदर्शनकारियों से क्यों नहीं मिले? 
रिया कहती हैं कि वो कोई स्टूडेंट नहीं हैं. उनके पिता किसान हैं. दलित या ओबीसी कैटेगिरी से भी नहीं हूं. लेकिन दिल्ली में जो स्टूडेंट के साथ हुआ, वह गलत है. उन्हें अपनी हरकतों की जिम्मेदारी लेना होगी. इसके अलावा रिया ने सरकार से भी पूछा कि अगर स्टूडेंट्स को संसद मार्च की इजाजत नहीं थी, तो केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान उनसे विरोध स्थल पर क्यों नहीं मिले? 

साथ ही रिया ने सिस्टम के प्रति अपने घोर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हम अपनी आवाज उठाने से डरते नहीं हैं. हमें ये सब बदलना होगा. रिया ने कहा है कि वह जानना चाहती हैं, क्या डर के आगे जीत है. 

प्रदर्शनकारियों पर क्रिमिनलों जैसा सलूक नहीं देख सकती थीं
27 साल की रिया ने कहा कि वह विरोध प्रदर्शनकारियों को अपराधियों की तरह सलूक होते नहीं देख सकती थीं. उन्होंने स्पीड बढ़ाकर मुझे डराने की कोशिश की, लेकिन मैं पीछे नहीं हटी. अगर ऐसा नहीं करती तो पछतावा होता. रिया ने पुलिसकर्मियों के तरीकों पर भी सवाल उठाए. साथ ही कहा कि अगर कोई उनकी जिम्मेदारी नहीं ले रहा है तो हम अपने नागरिकों की जिम्मेदारी लेंगे. 



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