Headlines

बढ़ रहे नींबू के दाम, गमले से शुरू करें इसकी खेती


अपने घर पर नींबू का पौधा लगाना उतना मुश्किल नहीं है जितना लोग सोचते हैं. इसके लिए आपको किसी बड़े खेत की जरूरत बिल्कुल नहीं है. बस आपके घर में धूप वाली जगह होनी चाहिए. जैसे कि कोई खिड़की, बालकनी या फिर छत का खुला हिस्सा. आजकल नर्सरी में नींबू के ऐसे बौने यानी ड्वार्फ प्लांट्स आसानी से मिल जाते हैं जो गमलों में भी बंपर फल देते हैं.

गमले में नींबू उगाने के लिए सबसे पहला और जरूरी कदम सही पॉट का चुनाव करना होता है. आपको हमेशा कम से कम 12 से 18 इंच या उससे बड़े साइज का गमला चुनना चाहिए. जिससे पौधे की जड़ों को फैलने के लिए सही जगह मिल सके. प्लास्टिक, मिट्टी या सीमेंट, आप अपनी पसंद का कोई भी गमला ले सकते हैं. लेकिन इस बात का खास ध्यान रखें कि गमले की तली में पानी निकलने के लिए एक या दो होल जरूर होने चाहिए.

गमले में नींबू उगाने के लिए सबसे पहला और जरूरी कदम सही पॉट का चुनाव करना होता है. आपको हमेशा कम से कम 12 से 18 इंच या उससे बड़े साइज का गमला चुनना चाहिए. जिससे पौधे की जड़ों को फैलने के लिए सही जगह मिल सके. प्लास्टिक, मिट्टी या सीमेंट, आप अपनी पसंद का कोई भी गमला ले सकते हैं. लेकिन इस बात का खास ध्यान रखें कि गमले की तली में पानी निकलने के लिए एक या दो होल जरूर होने चाहिए.

गमले की मिट्टी तैयार करते वक्त थोड़ी समझदारी दिखाने की जरूरत होती है. नींबू के पौधे को ऐसी मिट्टी पसंद है जो भुरभुरी हो और जिसमें पानी बिल्कुल न रुके. इसके लिए आप आधी सामान्य गार्डन की मिट्टी, तीस प्रतिशत पुरानी सड़ी हुई गोबर की खाद और बीस प्रतिशत रेत या कोकोपीट को आपस में अच्छे से मिला लें. यह मिश्रण इतना उपजाऊ और हल्का होता है कि इसमें नींबू की जड़ें बहुत तेजी से ग्रो करती हैं.

गमले की मिट्टी तैयार करते वक्त थोड़ी समझदारी दिखाने की जरूरत होती है. नींबू के पौधे को ऐसी मिट्टी पसंद है जो भुरभुरी हो और जिसमें पानी बिल्कुल न रुके. इसके लिए आप आधी सामान्य गार्डन की मिट्टी, तीस प्रतिशत पुरानी सड़ी हुई गोबर की खाद और बीस प्रतिशत रेत या कोकोपीट को आपस में अच्छे से मिला लें. यह मिश्रण इतना उपजाऊ और हल्का होता है कि इसमें नींबू की जड़ें बहुत तेजी से ग्रो करती हैं.

पौधे की खरीदारी करते समय हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि बीज से उगाए गए नींबू के पौधे की बजाय ग्राफ्टेड यानी कलम वाला पौधा ही खरीदें. ग्राफ्टेड पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि यह बहुत जल्दी फल देना शुरू कर देता है. जबकि बीज वाले पौधे को बड़े होकर फल देने में कई साल लग जाते हैं. नर्सरी जाते वक्त कागजी नींबू या बारहमासी नींबू की वैरायटी मांगें. क्योंकि ये गमलों में आसानी से ढल जाती हैं और सालभर रुक-रुक कर फल देती रहती हैं.

पौधे की खरीदारी करते समय हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि बीज से उगाए गए नींबू के पौधे की बजाय ग्राफ्टेड यानी कलम वाला पौधा ही खरीदें. ग्राफ्टेड पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि यह बहुत जल्दी फल देना शुरू कर देता है. जबकि बीज वाले पौधे को बड़े होकर फल देने में कई साल लग जाते हैं. नर्सरी जाते वक्त कागजी नींबू या बारहमासी नींबू की वैरायटी मांगें. क्योंकि ये गमलों में आसानी से ढल जाती हैं और सालभर रुक-रुक कर फल देती रहती हैं.

नींबू के पौधे को अपनी ग्रोथ और फल देने के लिए रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप की सख्त जरूरत होती है. इसलिए अपने गमले को घर की ऐसी जगह पर रखें जहां सूरज की रोशनी खुलकर आती हो. अगर इसे छांव में रखेंगे तो इसकी पत्तियां पीली पड़ने लगेंगी और फूल झड़ जाएंगे, जिससे एक भी नींबू नहीं लगेगा. धूप मिलने से पौधा अंदर से मजबूत होता है और उस पर तेजी से नई शाखाएं फूटती हैं. जो आगे चलकर ढेरों नींबू के गुच्छों में बदल जाती हैं.

नींबू के पौधे को अपनी ग्रोथ और फल देने के लिए रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप की सख्त जरूरत होती है. इसलिए अपने गमले को घर की ऐसी जगह पर रखें जहां सूरज की रोशनी खुलकर आती हो. अगर इसे छांव में रखेंगे तो इसकी पत्तियां पीली पड़ने लगेंगी और फूल झड़ जाएंगे, जिससे एक भी नींबू नहीं लगेगा. धूप मिलने से पौधा अंदर से मजबूत होता है और उस पर तेजी से नई शाखाएं फूटती हैं. जो आगे चलकर ढेरों नींबू के गुच्छों में बदल जाती हैं.

सिंचाई के मामले में नींबू के पौधे के साथ थोड़ा हिसाब रखना पड़ता है. इसे न तो बहुत ज्यादा पानी पसंद है और न ही इसकी मिट्टी एकदम सूखी होनी चाहिए. जब आपको लगे कि गमले की ऊपर की दो इंच मिट्टी सूख चुकी है, तभी उसमें ढंग से पानी डालें. गर्मियों के दिनों में रोज पानी की जरूरत पड़ सकती है जबकि सर्दियों में दो-तीन दिन में एक बार पानी देना काफी रहता है. हमेशा याद रखें कि गमले में कभी भी पानी जमा न हो वरना पौधा दम तोड़ने लगेगा.

सिंचाई के मामले में नींबू के पौधे के साथ थोड़ा हिसाब रखना पड़ता है. इसे न तो बहुत ज्यादा पानी पसंद है और न ही इसकी मिट्टी एकदम सूखी होनी चाहिए. जब आपको लगे कि गमले की ऊपर की दो इंच मिट्टी सूख चुकी है, तभी उसमें ढंग से पानी डालें. गर्मियों के दिनों में रोज पानी की जरूरत पड़ सकती है जबकि सर्दियों में दो-तीन दिन में एक बार पानी देना काफी रहता है. हमेशा याद रखें कि गमले में कभी भी पानी जमा न हो वरना पौधा दम तोड़ने लगेगा.

समय-समय पर पौधे की सही खाद-पानी और सही देखभाल से ही पौधा फल देगा. हर दो-तीन महीने में गमले की मिट्टी की हल्की गुड़ाई करके उसमें नीमखली मिलाते रहें. इसके अलावा जब पौधे पर नई शाखाएं आएं तो सूखी या बीमार टहनियों को काट कर छांट दें जिसे प्रूनिंग कहते हैं. अगर कभी पत्तियों पर कीड़े या माहू नजर आएं तो नीम के तेल का स्प्रे कर दें.

समय-समय पर पौधे की सही खाद-पानी और सही देखभाल से ही पौधा फल देगा. हर दो-तीन महीने में गमले की मिट्टी की हल्की गुड़ाई करके उसमें नीमखली मिलाते रहें. इसके अलावा जब पौधे पर नई शाखाएं आएं तो सूखी या बीमार टहनियों को काट कर छांट दें जिसे प्रूनिंग कहते हैं. अगर कभी पत्तियों पर कीड़े या माहू नजर आएं तो नीम के तेल का स्प्रे कर दें.

इस तरह से घर में गमले में उगे ताजे नींबू न सिर्फ आपके किचन का खर्च बचाएंगे बल्कि आपको बागवानी का गजब का सुकून भी देंगे. बढ़ते दामों की इस टेंशन को अब बाय-बाय कहिए और आज ही अपने घर के लिए एक बढ़िया सा नींबू का पौधा ले आइए.

इस तरह से घर में गमले में उगे ताजे नींबू न सिर्फ आपके किचन का खर्च बचाएंगे बल्कि आपको बागवानी का गजब का सुकून भी देंगे. बढ़ते दामों की इस टेंशन को अब बाय-बाय कहिए और आज ही अपने घर के लिए एक बढ़िया सा नींबू का पौधा ले आइए.

Published at : 19 Sep 2026 03:09 PM (IST)

एग्रीकल्चर फोटो गैलरी



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *