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बिहार-बंगाल में वोट चोरी से बनी सरकार, बैलेट पेपर से दोबारा हो चुनाव- तेजस्वी यादव


राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने INDIA ब्लॉक की बैठक के बाद चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने बुधवार (30 सितंबर, 2026) को एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत में दावा किया कि पश्चिम बंगाल और बिहार में ‘वोट चोरी’ के जरिए सरकार बनाई गई और मांग की कि दोनों राज्यों में दोबारा चुनाव बैलेट पेपर से कराया जाए. उन्होंने देशभर में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की भी मांग की.

आगे कहा कि विपक्षी दल अब चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर जमीन पर उतरेंगे. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की. साथ ही बताया कि INDIA ब्लॉक की बैठक में भी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग और SIR को लेकर संयुक्त आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की गई है.

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‘चिराग भी मलाई खा रहे हैं’

चिराग पासवान पर पहले चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे थे. अब वह बोल रहे हैं कि जो चुनाव आयोग ने कहा है उस पर वह संतुष्ट हैं. इस सवाल पर तेजस्वी ने कहा कि उन्हें शर्मिंदगी है लेकिन वह कुर्सी नहीं छोड़ेंगे. चिराग की पार्टी को तोड़ दिया गया. उनके पिता की मूर्ति तोड़ दी गई. चिराग पासवान भी मलाई खा रहे हैं. जमुई कांड को लेकर चिराग ने सरकार पर सवाल उठाए थे. इस पर तेजस्वी ने कि वह फिर भी सरकार के साथ हैं. 

‘दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति नहीं सुनी गई’

तेजस्वी ने दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद ज्ञानेश कुमार ने फैसले लिए. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें संरक्षण देने के लिए कानून में बदलाव किए गए. चुनाव आयोग ने दूसरी ओर आंतरिक मतभेदों को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और अपने कामकाज का बचाव किया है. 

CEC चयन प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

तेजस्वी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि पहले चयन पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते थे, जिन्हें हटाकर केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया. दरअसल, 2023 के कानून के तहत चयन समिति में CJI की जगह केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को रखा गया है.

‘रिकॉर्ड रखने की अवधि 45 दिन क्यों?’

तेजस्वी ने चुनाव से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि पहले रिकॉर्ड एक साल तक रखा जाता था तो इसकी अवधि 45 दिन क्यों की गई. उन्होंने इसे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता से जोड़ते हुए सवाल उठाए. वहीं, विपक्ष की ओर से SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार संयुक्त अभियान की बात कही जा रही है.

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