ट्रेन में सफर के दौरान भीड़ का सामना तो अक्सर यात्रियों को करना पड़ता है, लेकिन यही भीड़ कई बार हादसे की वजह भी बन जाती है. ऐसे ही एक मामले में चलती ट्रेन से गिरकर यात्री की मौत हो गई थी. अब कलकत्ता हाई कोर्ट ने मृतक के परिवार के हक में फैसला सुनाते हुए रेलवे को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है.
मामला 9 अप्रैल 2019 का है. बप्तु पाल अपने भाई पिंटु पाल और दोस्त समरेश पाल के साथ दासनगर से आंदुल जा रहे थे. परिवार के अनुसार, ट्रेन में काफी भीड़ थी. इसी दौरान ट्रेन में झटका लगा और बप्तु पाल नीचे गिर गए. इस हादसे में उनकी मौत हो गई.
हादसे के बाद परिवार ने मुआवजे के लिए रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल में दावा किया. लेकिन, 11 अप्रैल 2025 को ट्रिब्यूनल ने इसे खारिज कर दिया था. ट्रिब्यूनल का कहना था कि परिवार यह साबित नहीं कर पाया कि बप्तु पाल के पास वैलिड टिकट था और उनकी मौत ट्रेन से गिरने की वजह से हुई थी.
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हाई कोर्ट में परिवार ने की चैलेंज
ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ परिवार ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया. सुनवाई में बताया गया कि बप्तु पाल ने घटना वाले दिन शाम करीब 5:47 बजे टिकट खरीदा था. पुलिस रिकॉर्ड में भी एक टिकट जब्त किए जाने का जिक्र था.
हाई कोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड और उपलब्ध जानकारी को देखते हुए ट्रिब्यूनल के फैसले को सही नहीं माना. हाई कोर्ट ने कहा कि हादसे के बाद यात्री के पास टिकट नहीं मिलने का मतलब ये नहीं है कि वो बिना टिकट यात्रा कर रहा था. कोर्ट ने ये भी माना कि परिवार से ऐसे चश्मदीद गवाह को पेश करने की उम्मीद नहीं की जा सकती, जिसने यात्री को ट्रेन से गिरते हुए देखा हो.
रेलवे को देना होगा 8 लाख रुपये
कोर्ट ने बप्तु पाल की मौत को रेलवे एक्ट की धारा 123(c) के तहत अनटुवर्ड इंसीडेंट माना. इसके साथ ही रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल का फैसला रद्द कर दिया गया. रेलवे को परिवार को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है. रेलवे को 8 लाख रुपये के साथ 6% साल का ब्याज भी देना होगा. यह ब्याज दावा दायर करने की तारीख से 19 अगस्त 2026 तक की समय के लिए होगा. कोर्ट ने रेलवे को मुआवजे की पूरी रकम ब्याज के साथ 8 हफ्ते के अंदर जमा करने का निर्देश दिया है.
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