खुरहा-मुंहपका बीमारी के लक्षण पहचानें: यह एक वायरल बीमारी है, जिसमें मवेशियों के मुंह और खुरों में छाले व घाव हो जाते हैं. इससे पशुओं को चारा खाने और चलने में परेशानी हो सकती है.

बीमार पशु को तुरंत अलग करें: एफएमडी तेजी से दूसरे मवेशियों में फैल सकती है. इसलिए संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें और उनके बीच संपर्क न होने दें.

मुंह में छाले होने पर बरतें सावधानी: मुंह में घाव होने से पशु चारा खाने में परेशानी महसूस कर सकता है. मुंह की सफाई और किसी भी उपचार के लिए पशु चिकित्सक की सलाह लें.

खुरों में घाव होने पर डॉक्टर को दिखाएं: इस बीमारी में पशु के पैरों और खुरों पर भी घाव हो सकते हैं. घरेलू नुस्खों के भरोसे न रहें, बल्कि पशु चिकित्सक से जांच कराकर सही इलाज करवाएं.

स्वस्थ पशुओं का समय पर टीकाकरण कराएं: एफएमडी से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी है. पशुपालक अपने मवेशियों को तय कार्यक्रम के अनुसार टीका लगवाएं. संक्रमित पशु को टीका लगाने के बजाय उसके इलाज पर ध्यान दिया जाता है.

साफ-सफाई रखें और लक्षण दिखते ही संपर्क करें: पशुओं के रहने की जगह साफ रखें. मुंह में छाले, खुरों में घाव या चलने-खाने में परेशानी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें. समय पर देखभाल से बीमारी के फैलाव और दूध उत्पादन में होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है.
Published at : 15 Oct 2026 06:49 PM (IST)
