उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में आल्हा ऊदल का गांव दिसरापुर इस समय भारी जलभराव और तबाही से जूझ रहा है. रात भर हुई मुसलाधार बारिश के बाद कीरत सागर और कल्याण सागर से आए पानी के तेज बहाव में गांव को हाइवे और मुख्यालय से जोड़ने वाली मुख्य सड़क और पुलिया ताश के पत्तों की तरह बह गई.
ग्रामीणों का आरोप है कि PWD विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण 6 महीने पहले बनी पुलिया पानी का दबाव नहीं झेल सकी. 100 मीटर सड़क बह जाने से पूरा गांव जलमग्न है, मुख्यालय से संपर्क टूटने कर लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं.
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आल्हा-उदल की जन्मभूमि के रूप में विख्यात
महोबा का ऐतिहासिक गांव दिसरापुर, जिसे महान वीर योद्धा आल्हा और ऊदल की पावन भूमि माना जाता है. आज प्रशासनिक अनदेखी और कुदरत की मार के कारण आंसुओं के समंदर में डूबा हुआ है. पूरी रात हुई झमाझम बारिश ने न केवल इस ऐतिहासिक नगरी का संपर्क जिला मुख्यालय से काट दिया, बल्कि सैकड़ों ग्रामीणों की जिंदगी को भी रोक दिया है.
गांव की एकमात्र सड़क बही
महोबा के कीरत सागर और कल्याण सागर तालाबों का ओवरफ्लो पानी जब दिसरापुर के तालाब की तरफ बढ़ा, तो पानी का बहाव इतना तेज था कि गांव की एकमात्र मुख्य सड़क को अपने साथ बहा ले गया. लगभग 100 मीटर सड़क और उस पर बनी पुलिया पानी के प्रचंड वेग में ताश के पत्तों की तरह बह गई. नतीजतन, गांव का संपर्क मुख्यालय से टूट गया है.
ग्रामीणों में पीडब्ल्यूडी विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है. उनका आरोप है कि महज 6 महीने पहले ही इस पुलिया का निर्माण कराया गया था. ग्रामीणों ने उस समय भी बड़े पुल की मांग की थी, लेकिन विभाग ने घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल करते हुए एक छोटी पुलिया बना दी. नतीजतन, तेज बारिश में भ्रष्टाचार की पोल खुल गई और पुलिया पानी के साथ बह गई.
हालात बेहद चिंताजनक
सड़क कटने से गांव के हालात बेहद चिंताजनक है. घरों में पानी घुसने से अनाज, राशन और गृहस्थी का सारा सामान बर्बाद हो गया है. गांव से बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता न होने के कारण मरीज अस्पताल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. बच्चे स्कूल जाने से वंचित हो गए हैं और मजदूर काम पर नहीं जा पा रहे है. रास्ता बंद होने के कारण राहत व निर्माण सामग्री गांव तक नहीं पहुंच पा रही है. वहीं मरीजों को गोद में उठाकर एक ओर से दूसरी तरफ ले जाया जा रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने ही गांव में कैद होकर रह गए हैं. खेतों से लेकर गलियों तक सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है. आल्हा-ऊदल की इस पावन नगरी के निवासियों ने अब जिला प्रशासन और डीएम से गुहार लगाई है कि पीडब्ल्यूडी विभाग की लापरवाही पर कड़ा संज्ञान लिया जाए और गांव के लिए तुरंत वैकल्पिक रास्ते और नए मजबूत पुल का निर्माण कार्य शुरू कराया जाए.
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