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‘मैं ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के विरोध में हूं’, अभिषेक मनु सिंघवी का बड़ा बयान


देश के मशहूर वकील और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि वो ज्ञानेश कुमार पर कानूनी कार्रवाई के खिलाफ हैं.  सिंघवी ने एक यूट्यूब चैनल पर इस संबंध में चर्चा करते हुए कहा कि मैं उन लोगों में से मानने वालों में से हूं, न तो वो (ज्ञानेश कुमार) आम कानूनी कार्रवाई से हट सकते हैं, बल्कि मैं तो कानूनी कार्रवाई का विरोध करता हूं. क्योंकि लोग समझते हैं, कि आप छींके और कोर्ट गए. हर बात में कोर्ट गए, तो आप गणतांत्रिक प्रक्रिया की अवेहलना कर रहे हैं. 

उन्होंने कहा, ‘आप जानते कि याचक कोर्ट जाता है, नोटिस आता है, नोटिस पर जवाब आता है. विलंब है. अत्यंत गंभीर व्यापक बिलंब है. और उसके बाद निर्णय कई कारणों से नहीं आ पाता. हर दर्द का इलाज न्यायपालिका नहीं है.’

यह एक मान्यता दिलाने वाली प्रक्रिया बन गई: सिंघवी

उन्होंने कहा कि कई बार उल्टा होता है कि न्यायपालिका चीजें जाकर, जो नहीं जानी चाहिए. जहां ज्यूडिशियल रिव्यू नहीं हो सकता है. वो उस चीज को जस्टिफाई कर देती है. यह एक मान्यता दिलाने वाली प्रक्रिया बन गई है. भई हम तो गए थे कोर्ट में, कोर्ट ने खारिज कर दिया. इसका मतलब सही है. बहुत ध्यान से जाना चाहिए.

सिंघवी ने कहा, ‘जो भी लोग आजकल कोर्ट में जा रहे हैं, जो भी राजनीतिक पार्टी या जिसके नाम पर जा रहे हैं, तो उनको उनसे दूरी खड़ी करना चाहिए. इसके बाद क्या विकल्प है? एक विकल्प है, Impeachment यानी महाभियोग, पिछली बार इसमें महाभियोग हुआ तो वो त्रिशंकु की तरह हुआ. न खारिज किया गया, न अनुमति दी गई.’ 

‘सबसे आवश्यक है, गणतंत्र में गणतांत्रिक प्रक्रिया’

सिंघवी ने कहा, ‘सबसे आवश्यक है, गणतंत्र में गणतांत्रिक प्रक्रिया. राजनैतिक प्रक्रिया. राजनैतिक प्रक्रिया में भी दो तरह की प्रक्रियाए हैं. एक है राजनीतिक पार्टियों द्वारा, अब लोगों को राजनैतिक पार्टियों को लेकर संदेह है, हिचक है. वही एक तरीका है, राजनीति करने का, वो होना चाहिए, प्रदर्शन, अभियान.’

‘प्रधान साहब गए नहीं थे, जब तक…’

सिंघवी ने कहा, ‘लेकिन जो बीजेपी के पहलू से लगता है कि अगर युवा एक सामूहिक रूप से, जो रूढ़ी ग्रस्त राजनीति का हिस्सा नहीं मानी जाती है. इसलिए उनकी क्रेडिबिलिटी ज्यादा है. वो अगर इस बात पर पुरजोर अभियान करे, तो आपको याद है कि शिक्षा में प्रधान साहब गए नहीं थे, जब तक इन लोगों ने सामूहिक रूप से आवाज उठाई नहीं थी.’ 

सिंघवी ने कहा कि अब 2 तारीख से बंबई में हो रहा है. आज भी हो रहा है. जिस हद तक अनुमति दी जा रही है, यही बात अगर अब पीक पर पहुंच गई तो यह ज्यादा प्रभावशाली हो सकती है.



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